ईरान ने लिया बदला, कतर की एनर्जी फैसिलिटी पर मिसाइल अटैक से बड़ा नुकसान

BY UJJWAL SINGH 
 
मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है. दुनिया की सबसे बड़ी गैस फील्ड पर हमले के बाद ईरान और इजरायल के बीच टकराव तेज हो गया है, जिसका असर पूरे खाड़ी क्षेत्र पर दिखाई दे रहा है. ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए कतर सहित कई देशों की ऊर्जा सुविधाओं को निशाना बनाया, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता बढ़ गई है.
 
साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमला और बढ़ा तनाव
 
बुधवार को इजरायल ने ईरान स्थित साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमला किया, जो दुनिया की सबसे बड़ी प्राकृतिक गैस भंडारण साइट मानी जाती है. इस हमले में ईरान के पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स को निशाना बनाया गया। यह हमला ईरान के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि यह उसकी ऊर्जा अर्थव्यवस्था का प्रमुख केंद्र है.
 
कतर की ऊर्जा साइट पर ईरानी मिसाइल हमला
 
इजरायली हमले से नाराज़ ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी. कतर की प्रमुख औद्योगिक नगरी रास लफान इंडस्ट्रियल सिटी में मिसाइल हमले की पुष्टि हुई है. कतर की सरकारी ऊर्जा कंपनी के अनुसार, इस हमले में उनकी मुख्य गैस सुविधा को भारी नुकसान पहुंचा है.हमले के बाद इलाके में आग लग गई, जिसे नियंत्रित करने के लिए तुरंत आपातकालीन टीमों को तैनात किया गया. हालांकि राहत की बात यह रही कि किसी के हताहत होने की खबर नहीं है.
 
कूटनीतिक तनाव: ईरानी दूतावास के कर्मचारियों को निकाला गया
 
हमले के बाद कतर ने सख्त रुख अपनाते हुए ईरानी दूतावास के सैन्य और सुरक्षा अधिकारियों को 24 घंटे के भीतर देश छोड़ने का आदेश दिया. उन्हें “पर्सोना नॉन ग्राटा” घोषित कर दिया गया.कतर ने आरोप लगाया कि ईरान क्षेत्रीय स्थिरता को कमजोर कर रहा है और पड़ोसी देशों को निशाना बना रहा है.
 
सऊदी अरब ने रोकी मिसाइलें, बढ़ी सुरक्षा चिंता
 
इस बीच सऊदी अरब ने दावा किया कि उसने राजधानी रियाद की ओर आ रही चार बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया. हालांकि, कुछ मलबा गिरने से चार लोग घायल हो गए। यह घटना दर्शाती है कि संघर्ष अब कई देशों को अपनी चपेट में ले रहा है.
 
मध्य पूर्व में बढ़ता यह संघर्ष वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय शांति दोनों के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है. लगातार हो रहे हमलों और जवाबी कार्रवाइयों से स्थिति और बिगड़ने की आशंका है. यदि जल्द ही कूटनीतिक समाधान नहीं निकाला गया, तो यह तनाव बड़े युद्ध का रूप ले सकता है

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