Farthest Satellite in Space: Voyager 1 ने तोड़ा सारे रिकॉर्ड

BY UJJWAL SINGH 

अंतरिक्ष में अब तक मानव द्वारा भेजे गए सबसे दूर के ऑब्जेक्ट की बात करें तो Voyager 1 का नाम सबसे पहले आता है. नासा ने इसे 5 सितंबर 1977 को लॉन्च किया था, और यह यान अब तक लगभग 25.7 अरब किलोमीटर की दूरी तय कर चुका है. लगभग पांच दशकों के बाद भी कोई दूसरा स्पेसक्राफ्ट इसे पीछे नहीं छोड़ पाया. इसकी इस सफलता के पीछे सही समय, ग्रहों का अनोखा संरेखण और वैज्ञानिकों की दूरदर्शिता है.

मिशन का सही समय और दुर्लभ संरेखण

वॉयेजर 1 का मिशन उस समय शुरू हुआ जब बाहरी ग्रह  बृहस्पति, शनि, यूरेनस और नेपच्यून  एक दुर्लभ स्थिति में थे. यह स्थिति हर 176 साल में सिर्फ एक बार बनती है. इस अनोखी रेखा ने वैज्ञानिकों को ऐसा मिशन डिज़ाइन करने की अनुमति दी जिसमें यान एक ग्रह से दूसरे ग्रह पर जा सके और उसकी गति लगातार बढ़ती रहे.

ग्रेविटी एसिस्ट: गति का राज़

वॉयेजर 1 ने अपनी अद्भुत दूरी तय करने में ग्रेविटी एसिस्ट तकनीक का शानदार इस्तेमाल किया. जब यह बृहस्पति और शनि जैसे विशाल ग्रहों के पास से गुजरा, तो उनके गुरुत्वाकर्षण का लाभ लिया. यह तकनीक एक ब्रह्मांडीय गुलेल की तरह काम करती है और ज्यादा ईंधन खर्च किए बिना यान की गति बढ़ा देती है. यही वजह है कि वॉयेजर 1 ने सूरज के गुरुत्वाकर्षण से मुक्त होकर गहरे अंतरिक्ष में प्रवेश किया.

सौरमंडल की सीमा पार करना

2012 में वॉयेजर 1 ने हेलियोपॉज पार किया, जो सूर्य के प्रभाव की सीमा को दर्शाता है.इसके बाद यह इंटरस्टेलर स्पेस में प्रवेश करने वाला पहला मानव निर्मित ऑब्जेक्ट बन गया. वर्तमान में यह यान लगभग 17 किलोमीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से आगे बढ़ रहा है.

रिकॉर्ड क्यों टूटा नहीं

वॉयेजर 1 की लंबी उम्र और रेडियोस्टॉप थर्मोइलेक्ट्रिक जेनरेटर इसे लगातार पावर प्रदान करता है. यह रेडियोधर्मी क्षय से निकलने वाली गर्मी को बिजली में बदलता है. 48 साल बाद भी यह यान धरती पर डेटा भेज रहा है. सही समय, ग्रहों का संरेखण, ग्रेविटी एसिस्ट और लंबी उम्र ने वॉयेजर 1 को हर दूसरे स्पेसक्राफ्ट से आगे रख दिया है. आज भी कोई मिशन इसकी दूरी का मुकाबला नहीं कर पाया.

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