इस्लाम में 4 शादियों का नियम: शौक नहीं, जिम्मेदारी है इमाम उमर अहमद इलियासी का बयान

BY UJJWAL SINGH 

इस्लाम में चार शादियों की इजाजत को लेकर अक्सर समाज में बहस होती रहती है. इसी मुद्दे पर अखिल भारतीय इमाम संगठन (AIIO) के प्रमुख इमाम डॉ. उमर अहमद इलियासी ने स्पष्ट किया है कि यह अनुमति शौक या लालच के लिए नहीं, बल्कि विशेष परिस्थितियों और सामाजिक जिम्मेदारी के तहत दी गई है. उन्होंने कहा कि इस नियम को गलत तरीके से समझना या इस्तेमाल करना इस्लाम की मूल भावना के खिलाफ है.

चार शादियों का उद्देश्य क्या है?

इमाम उमर अहमद इलियासी के अनुसार इस्लाम में चार शादियों की अनुमति कुछ खास परिस्थितियों में ही दी गई है. इसका उद्देश्य जरूरतमंद महिलाओं को सहारा देना और सामाजिक संतुलन बनाए रखना है, न कि व्यक्तिगत इच्छाओं या शौक को पूरा करना। यदि कोई व्यक्ति अपनी पहली पत्नी के साथ सुखी जीवन जी रहा है, तो दूसरी शादी का कोई औचित्य नहीं माना जाता.

पहली पत्नी की सहमति जरूरी

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दूसरी शादी करने से पहले पहली पत्नी की सहमति लेना बेहद जरूरी है. बिना सहमति के शादी इस्लामिक दृष्टिकोण से स्वीकार्य नहीं मानी जाती। यह नियम पारिवारिक संतुलन और न्याय बनाए रखने के लिए है.

सामाजिक जिम्मेदारी पर जोर

इमाम साहब ने कहा कि चार शादियों का उद्देश्य केवल उन महिलाओं को सुरक्षा और सहारा देना है, जो किसी मजबूरी या परिस्थिति के कारण जीवन में असहाय हो जाती हैं। इसका उपयोग लालच या ऐय्याशी के लिए करना पूरी तरह गलत है.उन्होंने अंत में कहा कि भारत में इस तरह के मामले बहुत कम देखने को मिलते हैं, लेकिन कुछ लोग इस्लामिक नियमों का गलत अर्थ निकाल लेते हैं। असल में यह व्यवस्था केवल जिम्मेदारी और जरूरत के आधार पर बनाई गई है, जिसे सही तरीके से समझना और पालन करना जरूरी है।

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