जनगणना 2027: क्या कर्मचारियों को मिलती है अलग सैलरी? जानिए पूरी कमाई का गणित
भारत में हर दस साल में होने वाली जनगणना सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि देश की नीतियों और विकास की दिशा तय करने वाली एक बेहद अहम प्रक्रिया होती है. भारत की जनगणना का अगला चरण 2027 में पूरा होना है, जिसकी शुरुआत 1 अप्रैल 2026 से हो चुकी है. इस बार जनगणना को डिजिटल रूप दिया गया है, जिससे प्रक्रिया और भी तेज और सटीक होने की उम्मीद है। लेकिन लोगों के मन में एक बड़ा सवाल है - क्या जनगणना करने वाले कर्मचारियों को अलग से सैलरी मिलती है?
क्या मिलती है अलग सैलरी?
जनगणना के लिए कोई नई नौकरी नहीं दी जाती. यह काम पहले से कार्यरत सरकारी कर्मचारियों—जैसे शिक्षक, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, पटवारी और अन्य अधिकारियों - को सौंपा जाता है.
उन्हें इसके लिए अलग सैलरी नहीं, बल्कि मानदेय (Honorarium) दिया जाता है. यानी यह उनके नियमित वेतन के अतिरिक्त एक तय भुगतान होता है.
कितनी होती है कमाई?
जनगणना का कार्य दो मुख्य चरणों में पूरा होता है, और भुगतान भी उसी आधार पर किया जाता है:
- पहला चरण (घर सूचीकरण): लगभग ₹9,000
- दूसरा चरण (जनसंख्या गणना): लगभग ₹16,000
इस तरह एक गणनाकर्मी कुल मिलाकर ₹25,000 तक कमा सकता है. वहीं, स्टेट नोडल अधिकारियों के लिए यह राशि और अधिक होती है:
- पहला चरण: ₹30,000
- दूसरा चरण: ₹45,000
ट्रेनिंग के दौरान भी मिलता है भत्ता
फील्ड वर्क से पहले कर्मचारियों को विशेष ट्रेनिंग दी जाती है ताकि वे डिजिटल टूल्स और प्रक्रिया को समझ सकें. इस दौरान उन्हें रोजाना:
₹350 से ₹600 तक का भत्ता दिया जाता है.
यह भत्ता उनके दैनिक खर्चों को कवर करने में मदद करता है.
डिजिटल जनगणना: इस बार क्या है खास?
2027 की जनगणना का सबसे बड़ा बदलाव इसका डिजिटल स्वरूप है. कर्मचारियों को मोबाइल ऐप के जरिए डेटा इकट्ठा करना होगा. खास बात यह है कि उन्हें अपने ही स्मार्टफोन या डिजिटल डिवाइस का उपयोग करना पड़ सकता है.
जनगणना में काम करने वालों को अलग सैलरी नहीं मिलती, लेकिन उन्हें अच्छा-खासा मानदेय जरूर दिया जाता है. साथ ही डिजिटल सिस्टम के जरिए यह प्रक्रिया पहले से अधिक आधुनिक और प्रभावी बनने जा रही है.


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