नीतीश कैबिनेट: आखिरी बैठक में क्या हुआ?
बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार की अध्यक्षता में हुई अंतिम कैबिनेट बैठक ने एक महत्वपूर्ण राजनीतिक चरण का समापन किया। 20 फरवरी के बाद लंबे अंतराल के बाद यह बैठक बुलाई गई, लेकिन इसमें कोई बड़ा निर्णय नहीं लिया गया। यह बैठक अधिकतर औपचारिकता तक सीमित रही.
आखिरी कैबिनेट बैठक: सिर्फ औपचारिकता
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बैठक समाप्त होने के बाद मुख्य सचिवालय के पोर्टिको में मंत्रियों से मिले और संक्षिप्त बातचीत की. इसके बाद वे अपने आवास अणे मार्ग के लिए रवाना हो गए.
सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में केवल मंत्रिपरिषद् को भंग करने पर औपचारिक चर्चा हुई. कोई नई योजना या नीति संबंधी फैसला नहीं लिया गया। आमतौर पर कैबिनेट के बाद होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस भी इस बार रद्द कर दी गई, जिससे साफ हो गया कि बैठक में कोई महत्वपूर्ण घोषणा नहीं थी.
पिछली बैठकों के अहम फैसले
- 2025 में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की सरकार बनने के बाद से अब तक कुल सात कैबिनेट बैठकें हुईं.
- पहली बैठक (25 नवंबर 2025) में रोजगार पर विशेष ध्यान दिया गया और बंद पड़ी चीनी मिलों को शुरू करने की मंजूरी दी गई.
- दूसरी बैठक (9 दिसंबर 2025) में एक करोड़ रोजगार के लक्ष्य को पूरा करने के लिए तीन नए विभाग बनाने और कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में 5% बढ़ोतरी का फैसला लिया गया.
- तीसरी बैठक (15 दिसंबर 2025) में “सात निश्चय योजना 3.0” को मंजूरी दी गई, जिसमें रोजगार और आय बढ़ाने पर जोर था.
इसके बाद की बैठकों में कृषि और पशुपालन क्षेत्रों में नौकरियों का सृजन, मुंबई में बिहार भवन के निर्माण और पिछड़ा वर्ग के छात्रों के लिए आर्थिक सहायता योजनाओं का विस्तार जैसे फैसले लिए गए.
हालांकि अंतिम कैबिनेट बैठक केवल औपचारिक रही, लेकिन इससे पहले लिए गए फैसले सरकार की प्राथमिकताओं को स्पष्ट करते हैं. रोजगार, विकास और सामाजिक कल्याण पर केंद्रित ये निर्णय नीतीश कुमार की शासन शैली को दर्शाते हैं.


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