विजय के खिलाफ एफआईआर की मांग: क्या मुख्यमंत्री बनने का सपना प्रभावित होगा?

तमिल सुपरस्टार Vijay और उनकी पार्टी Tamilaga Vettri Kazhagam इन दिनों कानूनी और राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में हैं। वर्ष 2015 में रिलीज हुई फिल्म Puli से जुड़े आयकर मामले में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली याचिका ने राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। इस बीच सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि यदि विजय के खिलाफ एफआईआर दर्ज होती है, तो क्या वह भविष्य में मुख्यमंत्री नहीं बन पाएंगे? भारतीय संविधान और जनप्रतिनिधित्व कानून इस विषय पर क्या कहते हैं, आइए विस्तार से समझते हैं।

मद्रास हाई कोर्ट में पहुंचा मामला

विजय के खिलाफ कथित आयकर अनियमितताओं को लेकर Madras High Court में एक रिट याचिका दायर की गई है। यह मामला लगभग 11 साल पुराना बताया जा रहा है और फिल्म ‘पुलि’ की रिलीज के समय से जुड़ा है। 6 मई 2026 को कोर्ट की रजिस्ट्री ने इस याचिका को औपचारिक नंबर दे दिया। अब अदालत सबसे पहले इसकी स्वीकार्यता यानी मेंटेनेबिलिटी पर सुनवाई करेगी। यदि कोर्ट इसे स्वीकार करता है, तभी आगे कानूनी प्रक्रिया शुरू होगी।

क्या एफआईआर से चुनाव लड़ने पर रोक लगती है?

भारतीय कानून के अनुसार एफआईआर केवल एक शिकायत होती है, जो जांच की शुरुआत का आधार बनती है। कानून का मूल सिद्धांत है कि जब तक किसी व्यक्ति का अपराध अदालत में साबित न हो जाए, तब तक वह निर्दोष माना जाता है। इसलिए केवल एफआईआर दर्ज होने या जांच चलने भर से कोई व्यक्ति चुनाव लड़ने या मुख्यमंत्री बनने से अयोग्य नहीं हो जाता।
यदि विजय के खिलाफ एफआईआर दर्ज भी होती है, तब भी वह कानूनी रूप से चुनाव लड़ सकते हैं और मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के पात्र बने रहेंगे।

जनप्रतिनिधित्व कानून क्या कहता है?

नेताओं की योग्यता और अयोग्यता का निर्धारण मुख्य रूप से जनप्रतिनिधित्व कानून, 1951 की धारा 8(3) के तहत किया जाता है। इस कानून के अनुसार किसी व्यक्ति को तभी अयोग्य ठहराया जा सकता है, जब अदालत उसे दोषी करार दे और कम से कम दो साल या उससे अधिक की सजा सुनाए।
विजय के मामले में अभी केवल एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है। न तो कोई सजा हुई है और न ही अदालत ने उन्हें दोषी ठहराया है।

क्या राज्यपाल शपथ लेने से रोक सकते हैं?

संविधान के तहत राज्यपाल उसी व्यक्ति को मुख्यमंत्री नियुक्त करते हैं, जिसके पास विधानसभा में बहुमत का समर्थन हो। यदि किसी नेता पर आपराधिक मामला लंबित है या एफआईआर दर्ज है, तब भी राज्यपाल उसे शपथ लेने से नहीं रोक सकते। भारतीय राजनीति में कई ऐसे उदाहरण रहे हैं, जहां नेताओं ने अदालतों में मामले लंबित होने के बावजूद मुख्यमंत्री या मंत्री पद की शपथ ली और सरकार चलाई।

बिना विधायक बने भी बन सकते हैं मुख्यमंत्री

भारतीय संविधान में छह महीने का विशेष प्रावधान है। इसके तहत कोई व्यक्ति विधायक बने बिना भी मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकता है। हालांकि, उसे छह महीने के भीतर विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना जरूरी होता है। इसलिए विजय यदि भविष्य में बहुमत हासिल करते हैं, तो कानूनी रूप से उनके मुख्यमंत्री बनने में कोई बाधा नहीं होगी, जब तक किसी अदालत द्वारा अंतिम फैसला और सजा नहीं सुनाई जाती।

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