क्या सच में लोग कम बोलने लगे हैं? नई स्टडी के चौंकाने वाले खुलासे
आज की डिजिटल दुनिया में लोग पहले से ज्यादा जुड़े हुए दिखते हैं, लेकिन क्या वे उतना ही बात भी कर रहे हैं? एक नई स्टडी ने इस सवाल पर चौंकाने वाला खुलासा किया है. रिसर्च के मुताबिक, स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल के चलते लोगों की आमने-सामने की बातचीत में बड़ी गिरावट आई है. कभी जहां लोग घंटों बैठकर बातें किया करते थे, अब वहां मैसेज और स्क्रीन ने जगह ले ली है.
रिसर्च में क्या सामने आया?
मिसौरी-कैनसस सिटी विश्वविद्यालय और एरिजोना विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने 2005 से 2019 के बीच 22 अलग-अलग स्टडी का विश्लेषण किया. इसमें करीब 2200 लोगों की ऑडियो रिकॉर्डिंग शामिल थी. नतीजों में पाया गया कि लोगों द्वारा बोले जाने वाले शब्दों में लगभग 28 प्रतिशत की गिरावट आई है.पहले जहां एक व्यक्ति रोजाना औसतन 16,632 शब्द बोलता था, अब यह घटकर करीब 11,900 रह गया है. खास बात यह रही कि प्रतिभागियों को यह पता नहीं था कि उनकी बातचीत पर नजर रखी जा रही है, जिससे डेटा ज्यादा सटीक माना गया.
युवाओं पर सबसे ज्यादा असर
स्टडी में यह भी पाया गया कि यह गिरावट युवाओं में अधिक देखने को मिल रही है. 25 साल से कम उम्र के लोग रोजाना औसतन 451 शब्द कम बोल रहे हैं, जबकि 25 साल से अधिक उम्र के लोगों में यह कमी करीब 314 शब्दों की है. इससे साफ है कि नई पीढ़ी पर डिजिटल लाइफस्टाइल का गहरा असर पड़ रहा है.
लाइफस्टाइल में बड़ा बदलाव
एक्सपर्ट्स के अनुसार, बातचीत में आई यह गिरावट हमारी बदलती जीवनशैली का परिणाम है. अब लोग फोन कॉल या आमने-सामने की बातचीत की बजाय मैसेजिंग ऐप्स और सोशल मीडिया पर निर्भर हो गए हैं. पहले जो काम सीधे बात करके होते थे—जैसे रास्ता पूछना, दुकान पर बातचीत या पड़ोसियों से मेलजोल—अब वे ऑनलाइन हो रहे हैं.
साइकोलॉजिस्ट की चेतावनी
मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि इसका असर सिर्फ अकेलेपन तक सीमित नहीं है. आमने-सामने की बातचीत से मिलने वाला भावनात्मक जुड़ाव, आवाज का उतार-चढ़ाव और बॉडी लैंग्वेज अब डिजिटल बातचीत में नहीं मिल पाता. इससे धीरे-धीरे संवाद की क्षमता भी प्रभावित हो सकती है. एक रिसर्च में यह भी सामने आया कि जब मांएं स्मार्टफोन का ज्यादा इस्तेमाल करती हैं, तो वे अपने छोटे बच्चों से लगभग 16 प्रतिशत कम बात करती हैं, जो बच्चों के विकास पर असर डाल सकता है.
क्या महिलाएं ज्यादा बोलती हैं?
डेटा के अनुसार औसतन महिलाएं पुरुषों की तुलना में ज्यादा बोलती हैं. महिलाएं रोज करीब 13,000 शब्द बोलती हैं, जबकि पुरुष लगभग 12,000 शब्दों के आसपास रहते हैं. हालांकि उम्र बढ़ने के साथ यह अंतर बदल भी सकता है.
समाधान क्या है?
स्टडी की को-राइटर Valeria Pfeifer का कहना है कि इस गिरावट को रोका जा सकता है. अगर हर व्यक्ति रोज कम से कम एक नए इंसान से बातचीत शुरू करे, तो संवाद की आदत वापस लाई जा सकती है. छोटे-छोटे बदलाव जैसे फोन से दूरी बनाना, फोन कॉल को बढ़ावा देना और परिवार के साथ ज्यादा समय बातचीत में बिताना इस समस्या को कम कर सकता है.


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