कॉकरोच जनता पार्टी के पीछे कौन हैं अभिजीत दीपके? सोशल मीडिया पर मचा रहे हैं तहलका

सोशल मीडिया की दुनिया में कब कौन सा आइडिया वायरल होकर बड़ा आंदोलन बन जाए, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है. इन दिनों इंटरनेट पर “कॉकरोच जनता पार्टी” (CJP) नाम का डिजिटल पेज तेजी से सुर्खियां बटोर रहा है. एक अदालती टिप्पणी से प्रेरित इस व्यंग्यात्मक अभियान ने इंस्टाग्राम जैसे बड़े प्लेटफॉर्म पर जबरदस्त लोकप्रियता हासिल कर ली है और फॉलोअर्स की रेस में बड़ी राजनीतिक पार्टियों को भी पीछे छोड़ दिया है.

कैसे शुरू हुआ ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ का आइडिया

Cockroach Janta Party: कौन है कॉकरोच जनता पार्टी बनाने वाले

इस पूरे मामले की शुरुआत सुप्रीम कोर्ट की एक टिप्पणी से मानी जा रही है, जिसमें युवाओं के एक वर्ग को लेकर “कॉकरोच” शब्द का इस्तेमाल किया गया था. इस टिप्पणी को एक युवा ने व्यंग्य के रूप में लिया और सोशल मीडिया पर “कॉकरोच जनता पार्टी” नाम से एक डिजिटल अभियान शुरू कर दिया. देखते ही देखते यह आइडिया इंटरनेट यूजर्स के बीच वायरल हो गया और हजारों-लाखों लोग इससे जुड़ने लगे.

इंस्टाग्राम पर जबरदस्त लोकप्रियता

इस डिजिटल पेज @cockroachjantaparty ने इंस्टाग्राम पर तेजी से ग्रोथ करते हुए करीब 10.3 मिलियन (1.03 करोड़) फॉलोअर्स का आंकड़ा पार कर लिया है. बताया जा रहा है कि इसने फॉलोअर्स के मामले में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के इंस्टाग्राम पेज को भी पीछे छोड़ दिया है, जिसके करीब 8.7 मिलियन फॉलोअर्स हैं। यह आंकड़ा सोशल मीडिया पर इस अभियान की ताकत को दिखाता है.

कौन हैं अभिजीत दीपके?

कॉकरोच जनता पार्टी के पीछे मुख्य दिमाग अभिजीत दीपके हैं. उनकी उम्र लगभग 30 साल बताई जाती है. उन्होंने पुणे से पत्रकारिता (Journalism) में स्नातक की पढ़ाई पूरी की और आगे की उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका गए, जहां उन्होंने बोस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशंस (PR) में पोस्ट ग्रेजुएशन किया.

डिजिटल रणनीति के विशेषज्ञ

अभिजीत दीपके एक पॉलिटिकल कम्युनिकेशन स्ट्रैटजिस्ट के रूप में काम करते हैं. वे राजनीतिक दलों के लिए डिजिटल रणनीति बनाते हैं और सोशल मीडिया पर नैरेटिव तैयार करने में माहिर माने जाते हैं. हालांकि इतनी बड़ी सफलता के बावजूद वे यह भी स्वीकार कर चुके हैं कि वे आम युवाओं की तरह नौकरी के लिए आवेदन भी करते रहते हैं.

कॉकरोच जनता पार्टी का यह पूरा मामला दिखाता है कि आज के समय में सोशल मीडिया किस तरह विचारों को आंदोलन में बदल सकता है और एक छोटा सा व्यंग्य भी बड़े डिजिटल प्रभाव में बदल सकता है.

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