Monsoon 2026: केरल से कश्मीर तक कब पहुंचता है मानसून? जानें देशभर में बारिश का पूरा टाइमटेबल

भीषण गर्मी और उमस से परेशान लोगों के लिए राहत की खबर है. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून इस वर्ष 4 जून 2026 को केरल तट पर दस्तक देने जा रहा है. केरल को भारतीय मानसून का प्रवेश द्वार माना जाता है, जहां से शुरू होकर मानसून अगले 45 दिनों में पूरे देश को भिगोते हुए कश्मीर और लद्दाख तक पहुंचता है. आइए जानते हैं मानसून का विज्ञान और देशभर में इसके पहुंचने का संभावित टाइमटेबल.

क्या है मानसून का विज्ञान?

मानसून दरअसल मौसमी हवाओं का एक विशाल तंत्र है, जो समुद्र से नमी लेकर जमीन की ओर बढ़ता है. गर्मियों में धरती समुद्र की तुलना में तेजी से गर्म होती है, जिससे वायुदाब में अंतर पैदा होता है और हवाएं समुद्र से जमीन की ओर बहने लगती हैं.समुद्र के ऊपर से गुजरते समय ये हवाएं भारी मात्रा में जलवाष्प अपने साथ ले आती हैं और बाद में बारिश कराती हैं.

दो शाखाओं में बंट जाता है मानसून

हिंद महासागर से उठने वाली मानसूनी हवाएं विषुवत रेखा पार कर भारत पहुंचती हैं. दक्षिणी प्रायद्वीप से टकराने के बाद यह दो भागों में बंट जाती हैं. पहली अरब सागर शाखा, जो महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान की ओर बढ़ती है, जबकि दूसरी बंगाल की खाड़ी शाखा पश्चिम बंगाल, बिहार और पूर्वोत्तर राज्यों तक पहुंचती है.

कैसे तय होता है मानसून का आगमन?

आईएमडी केवल बारिश के आधार पर मानसून की घोषणा नहीं करता. हवाओं की दिशा, गति, नमी और वर्षा की मात्रा जैसे कई मानकों की जांच की जाती है. अंडमान, केरल, लक्षद्वीप और कर्नाटक के प्रमुख मौसम स्टेशनों में लगातार दो दिन तक 2.5 मिमी या अधिक बारिश होने पर मानसून के आगमन की आधिकारिक घोषणा की जाती है.

देशभर में मानसून का संभावित टाइमटेबल

मई के अंत में मानसून अंडमान पहुंचता है. 4 जून को केरल में प्रवेश करने के बाद यह जून के पहले सप्ताह में कर्नाटक, तमिलनाडु, गोवा और आंध्र प्रदेश तक फैल जाता है.

8 से 14 जून के बीच मुंबई, पुणे, तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल में मानसून सक्रिय हो जाता है. 15 से 20 जून के बीच मध्य प्रदेश, गुजरात, बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश तक इसकी पहुंच हो जाती है.

25 से 30 जून के बीच पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में बारिश शुरू होती है. दिल्ली, हरियाणा और पंजाब में मानसून सामान्यतः 27 जून से 1 जुलाई के बीच पहुंचता है, जबकि राजस्थान के पश्चिमी हिस्सों में इसकी एंट्री जुलाई के पहले सप्ताह में होती है.

कश्मीर तक कब पहुंचता है मानसून?

दक्षिण-पश्चिम मानसून 15 जुलाई तक जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के पहाड़ी इलाकों तक पहुंच जाता है। हालांकि लंबा सफर तय करने के कारण वहां पहुंचते-पहुंचते हवाओं में नमी कम हो जाती है, जिससे मैदानी क्षेत्रों की तुलना में कम बारिश होती है. मौसमीय परिस्थितियों के अनुसार इन तारीखों में कुछ बदलाव संभव है.

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