Z+ Security: क्या किसी आम आदमी को भी मिल सकती है Z+ सुरक्षा? जानिए आवेदन की पूरी प्रक्रिया

जब भी किसी नेता, उद्योगपति, सेलिब्रिटी या न्यायाधीश को उच्च स्तरीय सुरक्षा प्रदान की जाती है, तब वीआईपी सुरक्षा का मुद्दा चर्चा में आ जाता है। आमतौर पर लोगों का मानना है कि Z या Z+ जैसी सुरक्षा केवल प्रभावशाली और शक्तिशाली व्यक्तियों को ही मिलती है। लेकिन भारतीय कानून के अनुसार सुरक्षा किसी व्यक्ति के पद, प्रतिष्ठा या आर्थिक स्थिति के आधार पर नहीं, बल्कि उसके सामने मौजूद खतरे के स्तर के आधार पर दी जाती है। यही वजह है कि यदि किसी आम नागरिक की जान को गंभीर खतरा हो, तो उसे भी Z+ सुरक्षा प्रदान की जा सकती है।

आम नागरिक को भी मिल सकती है Z+ सुरक्षा

भारतीय सुरक्षा व्यवस्था में Z+ सुरक्षा सबसे उच्च श्रेणी की सुरक्षा व्यवस्थाओं में शामिल है। किसी भी व्यक्ति को यह सुरक्षा तभी प्रदान की जाती है जब खुफिया एजेंसियां यह निष्कर्ष निकालें कि उसकी जान को आतंकवादी संगठनों, आपराधिक गिरोहों या अन्य गंभीर स्रोतों से बड़ा खतरा है। सुरक्षा श्रेणी तय करते समय व्यक्ति का पेशा, सामाजिक स्थिति या आर्थिक हैसियत नहीं देखी जाती, बल्कि खतरे की गंभीरता को आधार बनाया जाता है। यदि खतरा अत्यधिक गंभीर पाया जाता है, तो एक आम नागरिक को भी Z+ सुरक्षा मिल सकती है।

सुरक्षा के लिए कैसे करें आवेदन?

यदि किसी व्यक्ति को अपनी जान को खतरा महसूस होता है, तो उसे सबसे पहले स्थानीय स्तर पर संबंधित अधिकारियों से संपर्क करना होता है। इसके लिए वह अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन, सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (SP), डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (DM) या सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (SDM) को लिखित आवेदन दे सकता है। आवेदन में खतरे की प्रकृति का स्पष्ट उल्लेख करना आवश्यक होता है। साथ ही धमकी भरे फोन कॉल, संदेश, पत्र या अन्य उपलब्ध साक्ष्यों को भी आवेदन के साथ संलग्न करना चाहिए।

खतरे की जांच में खुफिया एजेंसियों की भूमिका

आवेदन प्राप्त होने के बाद गृह विभाग मामले की जांच के लिए इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) जैसी खुफिया एजेंसियों की मदद ले सकता है। एजेंसियां खतरे के स्रोत, उसकी गंभीरता और संभावित हमले की संभावना का विस्तृत आकलन करती हैं। इस गोपनीय रिपोर्ट के आधार पर वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों और गृह मंत्रालय के प्रतिनिधियों की समिति अंतिम निर्णय लेती है कि सुरक्षा दी जानी चाहिए या नहीं और किस स्तर की सुरक्षा उपयुक्त होगी।

सुरक्षा का खर्च कौन उठाता है?

संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्तियों, न्यायाधीशों और वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों की सुरक्षा का पूरा खर्च सरकार वहन करती है। हालांकि यदि कोई आम नागरिक, उद्योगपति या सेलिब्रिटी सुरक्षा की मांग करता है और उसे मंजूरी मिल जाती है, तो कई मामलों में सुरक्षा का खर्च संबंधित व्यक्ति को स्वयं उठाना पड़ सकता है।

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