चिड़ियों की बीट ने बनाया दुनिया का सबसे अमीर देश, फिर कैसे कंगाली की राह पर पहुंच गया नाउरू?
प्रशांत महासागर में स्थित छोटे से द्वीप देश नाउरू की कहानी दुनिया के लिए एक बड़ी सीख है। एक समय ऐसा था जब यह देश केवल पक्षियों की बीट से बने खनिज को बेचकर दुनिया के सबसे अमीर देशों में शामिल हो गया था। 1970 के दशक में नाउरू की प्रति व्यक्ति आय दुनिया में सबसे अधिक मानी जाती थी और यह सऊदी अरब के बाद दूसरे स्थान पर था। हालांकि, कुछ ही दशकों में यह देश आर्थिक रूप से कमजोर हो गया और विदेशी सहायता पर निर्भर होने लगा।
नाउरू की दौलत का रहस्य
नाउरू की समृद्धि का आधार फॉस्फेट था। यह खनिज लाखों वर्षों तक प्रवासी समुद्री पक्षियों की बीट जमा होने से बना था। जब बड़ी संख्या में पक्षी इस द्वीप पर रुकते थे, तो उनकी बीट की परतें लगातार जमा होती जाती थीं। समय के साथ रासायनिक प्रक्रियाओं के कारण ये जमाव उच्च गुणवत्ता वाले फॉस्फेट में बदल गए, जिसकी वैश्विक बाजार में भारी मांग थी।
क्यों इतना कीमती था फॉस्फेट?
फॉस्फेट कृषि में उपयोग होने वाली खाद का एक प्रमुख घटक है। ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे देशों को खेती और फसल उत्पादन बढ़ाने के लिए इसकी बड़ी मात्रा में आवश्यकता थी। जैसे-जैसे दुनिया भर में उर्वरकों की मांग बढ़ी, नाउरू के फॉस्फेट की कीमत और मांग भी बढ़ती गई। इससे इस छोटे से देश को अरबों डॉलर की आय होने लगी।
आजादी के बाद आई समृद्धि
1968 में स्वतंत्रता प्राप्त करने के बाद नाउरू ने फॉस्फेट उद्योग पर पूरा नियंत्रण हासिल कर लिया। निर्यात से होने वाली कमाई सीधे सरकारी खजाने में आने लगी। सरकार ने नागरिकों को मुफ्त शिक्षा, मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएं और कई सार्वजनिक सुविधाएं उपलब्ध कराईं। देश में टैक्स नहीं लिया जाता था और सरकार ने विदेशों में प्रॉपर्टी तथा विभिन्न व्यवसायों में बड़े पैमाने पर निवेश किया।
पतन की शुरुआत और असफल निवेश
नाउरू की अर्थव्यवस्था लगभग पूरी तरह फॉस्फेट पर निर्भर थी। 1990 के दशक तक लगातार खनन के कारण द्वीप के अधिकांश फॉस्फेट भंडार समाप्त हो गए। जैसे-जैसे उत्पादन घटा, देश की आय का मुख्य स्रोत भी खत्म होने लगा। इसके साथ ही फॉस्फेट से अर्जित धन का बड़ा हिस्सा विदेशी होटल, हवाई जहाज और रियल एस्टेट परियोजनाओं में लगाया गया, लेकिन इनमें से कई निवेश असफल साबित हुए। नतीजतन देश की संपत्ति को भारी नुकसान हुआ और नाउरू आर्थिक संकट में फंस गया। आज नाउरू की कहानी इस बात का उदाहरण है कि प्राकृतिक संसाधनों पर अत्यधिक निर्भरता और खराब निवेश रणनीति किसी भी देश को समृद्धि से संकट की ओर धकेल सकती है।
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