PoK की कहानी: 1947 से लेकर आज तक पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर का पूरा सच और आज के विरोध की आग

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के रावलकोट में इन दिनों हालात तनावपूर्ण हैं। स्थानीय लोग पाकिस्तान सरकार की नीतियों और कथित दमन के खिलाफ सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। ईदगाह मैदान में हुए बड़े प्रदर्शन में लोगों ने अपनी नाराजगी जताते हुए कहा कि वे अब मौजूदा शासन को स्वीकार नहीं करेंगे। कुछ प्रदर्शनकारियों ने यहां तक चेतावनी दी कि अगर उनके अधिकारों का हनन जारी रहा तो वे भारत के साथ जुड़ने की बात पर भी विचार कर सकते हैं। ऐसे में एक बार फिर सवाल उठता है कि आखिर पीओके पाकिस्तान के पास कैसे गया और इसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि क्या है।

1947: आजादी और कश्मीर की स्थिति

साल 1947 में भारत के विभाजन के समय जम्मू-कश्मीर एक रियासत थी। उस समय महाराजा हरि सिंह इस रियासत को स्वतंत्र रखना चाहते थे और किसी भी देश में तुरंत विलय नहीं करना चाहते थे। हालांकि, यह स्थिति ज्यादा समय तक नहीं टिक सकी।

कबायली हमला और पाकिस्तान की भूमिका

22 अक्टूबर 1947 को पाकिस्तान समर्थित कबायली लड़ाकों ने जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ कर दी। इन हमलों का उद्देश्य कश्मीर पर नियंत्रण स्थापित करना था। तेजी से बढ़ते हमलों और बिगड़ते हालात के कारण महाराजा हरि सिंह को स्थिति संभालना मुश्किल हो गया।

भारत में विलय और सैन्य हस्तक्षेप

स्थिति नियंत्रण से बाहर होने पर महाराजा हरि सिंह ने भारत से सैन्य सहायता मांगी। भारत ने सहायता देने से पहले विलय की शर्त रखी। इसके बाद 27 अक्टूबर 1947 को महाराजा ने विलय पत्र पर हस्ताक्षर कर दिए और जम्मू-कश्मीर भारत का हिस्सा बन गया। इसके तुरंत बाद भारतीय सेना ने आक्रमणकारियों को पीछे धकेलने के लिए अभियान शुरू किया।

संयुक्त राष्ट्र की भूमिका

इस विवाद को बाद में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाया गया और 1 जनवरी 1948 को मामला संयुक्त राष्ट्र (UN) में पहुंचा। सुरक्षा परिषद ने कई प्रस्ताव पारित किए, जिनमें शांति बहाली और जनमत संग्रह की बात शामिल थी। लेकिन जनमत संग्रह की शर्त थी कि पाकिस्तान अपने कब्जे वाले क्षेत्रों से सेना और कबायलियों को वापस बुलाए, जो कभी पूरी तरह से लागू नहीं हो सका।

युद्धविराम और पीओके का निर्माण

दिसंबर 1948 में युद्धविराम (सीजफायर) लागू हुआ। उस समय तक कश्मीर का बड़ा हिस्सा, लगभग 78 हजार वर्ग किलोमीटर, पाकिस्तान के नियंत्रण में आ चुका था। सीजफायर के बाद जो क्षेत्र पाकिस्तान के पास रह गया, वही आज पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) कहलाता है।

पीओके का मुद्दा आज भी भारत-पाकिस्तान संबंधों में एक संवेदनशील और जटिल विषय बना हुआ है। वर्तमान में वहां चल रहे विरोध प्रदर्शनों ने एक बार फिर इस क्षेत्र की राजनीतिक और सामाजिक स्थिति को चर्चा में ला दिया है।

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