काशी में मृत्यु को मोक्ष का द्वार क्यों माना जाता है? जानिए ‘काश्यां मरणं मुक्तिः’ का रहस्य
काशी, जिसे वाराणसी या बनारस के नाम से भी जाना जाता है, दुनिया के सबसे प्राचीन जीवित शहरों में से एक माना जाता है। हाल ही में काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा हुई, जब गेट नंबर-4 पर तैनात एक पीएसी जवान की बंदूक से अचानक गोली चलने की घटना में तीन लोग घायल हो गए। हालांकि, काशी अपनी आध्यात्मिक और धार्मिक मान्यताओं के कारण हमेशा से ही आस्था का केंद्र रहा है। यहां का सबसे प्रसिद्ध विश्वास है—“काश्यां मरणं मुक्तिः”, जिसका अर्थ है कि काशी में मृत्यु मोक्ष की ओर ले जाती है।
काशी और मोक्ष की मान्यता का रहस्य
हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, विशेषकर स्कंद पुराण के काशी खंड में यह वर्णन मिलता है कि काशी में मृत्यु होने पर व्यक्ति को जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्ति मिल जाती है। इसे मोक्ष प्राप्ति का द्वार माना जाता है। मान्यता है कि यह पवित्र नगरी स्वयं भगवान शिव द्वारा स्थापित की गई थी और यह उनके त्रिशूल पर स्थित मानी जाती है। इसलिए यहां मृत्यु को भय के रूप में नहीं देखा जाता, बल्कि मोक्ष की प्राप्ति का माध्यम माना जाता है।
मणिकर्णिका घाट और तारक मंत्र का महत्व
काशी में किसी भी हिंदू की मृत्यु होने पर अंतिम संस्कार के लिए मणिकर्णिका घाट को अत्यंत पवित्र माना जाता है। मान्यता है कि यहां स्वयं भगवान शिव दिवंगत आत्मा के कानों में “तारक मंत्र” का उच्चारण करते हैं, जिससे आत्मा संसारिक बंधनों से मुक्त होकर मोक्ष प्राप्त करती है। यह मंत्र आत्मा को भौतिक संसार से अलग कर देता है और उसे परम शांति की ओर ले जाता है।
तारक मंत्र और धार्मिक मान्यताएं
तारक मंत्र को राम नाम के रूप में भी जाना जाता है, जो दो प्रमुख मंत्रों—अष्टाक्षर “ॐ नमो नारायणाय” और पंचाक्षर “नमः शिवाय”—से जुड़ा हुआ माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव ने सबसे पहले यह ज्ञान देवी पार्वती को दिया था। ऐसा भी माना जाता है कि इस मंत्र का जाप करने से विष्णु सहस्त्रनाम के समान पुण्य फल प्राप्त होता है।
दार्शनिक दृष्टिकोण और निष्कर्ष
दार्शनिक दृष्टि से देखा जाए तो काशी की यह मान्यता जीवन और मृत्यु के गहरे आध्यात्मिक अर्थ को दर्शाती है। यह विचार बताता है कि मृत्यु अंत नहीं, बल्कि आत्मा की मुक्ति का मार्ग हो सकती है। काशी में मृत्यु को यमराज के नियंत्रण से मुक्त मानकर भगवान शिव द्वारा मोक्ष प्रदान करने की अवधारणा हिंदू धर्म की आध्यात्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यही कारण है कि काशी को “मोक्ष की नगरी” कहा जाता है, जहां जीवन और मृत्यु दोनों ही आध्यात्मिक यात्रा का हिस्सा माने जाते हैं।
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