First Electricity Supply History: भारत में सबसे पहले कहां आई थी बिजली? जानिए पहली रोशनी से बिजली के सफर तक की पूरी कहानी

आज बिजली हमारे जीवन का सबसे जरूरी हिस्सा बन चुकी है। फ्रिज, एसी, वॉशिंग मशीन, कंप्यूटर और इंटरनेट जैसी सुविधाएं बिजली के बिना अधूरी हैं। लेकिन एक समय ऐसा भी था जब सूरज ढलने के बाद भारत के ज्यादातर हिस्से अंधेरे में डूब जाते थे और लोग लालटेन, मशालों और मिट्टी के तेल के दीयों पर निर्भर रहते थे। अंग्रेजों के शासनकाल में जब भारत में पहली बार बिजली की रोशनी पहुंची तो यह लोगों के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं था। भारत में बिजली आने का इतिहास बेहद दिलचस्प और बदलाव भरा रहा है।

भारत में सबसे पहले कहां चमकी थी बिजली की रोशनी?

भारत में पहली बार बिजली का प्रदर्शन साल 1879 में कलकत्ता (अब कोलकाता) में हुआ था। 24 जुलाई 1879 को पीडब्ल्यू फ्लेरी एंड कंपनी ने शहर के लोगों के सामने पहली बार बिजली की रोशनी दिखाई। बिना तेल, आग या बत्ती के कांच के गोले से निकलती तेज रोशनी देखकर लोग हैरान रह गए थे। उस दौर में यह तकनीक लोगों के लिए किसी जादू जैसी लगती थी और इसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते थे।

देश में पहला इलेक्ट्रिक बल्ब कहां जला?

सार्वजनिक प्रदर्शन के करीब दो साल बाद साल 1881 में भारत में बिजली का व्यावसायिक इस्तेमाल शुरू हुआ। कलकत्ता की मैकिनॉन एंड मैकेंजी कॉटन मिल पहली ऐतिहासिक जगह बनी, जहां बिजली का बल्ब लगाया गया। इससे फैक्ट्रियों में रात के समय भी काम करना आसान हो गया और भारत के औद्योगिक विकास को नई दिशा मिली।

कलकत्ता को ही क्यों चुना गया?

उस समय कलकत्ता ब्रिटिश भारत की राजधानी और सबसे बड़ा प्रशासनिक व व्यापारिक केंद्र था। अंग्रेजों ने अपने आर्थिक हितों को देखते हुए सबसे पहले यहीं बिजली व्यवस्था विकसित की। इसके बाद 1882 में मुंबई के कॉफर्ड मार्केट को बिजली की रोशनी से सजाया गया। साल 1889 में कलकत्ता की हैरिसन रोड (अब महात्मा गांधी रोड) देश की पहली सड़क बनी, जहां बिजली के खंभों के जरिए स्ट्रीट लाइट शुरू की गई।

भारत में बिजली उत्पादन की शुरुआत

बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए अंग्रेजों ने पावर स्टेशन बनाना शुरू किया। साल 1897 में दार्जिलिंग के पास सिदरापोंग में भारत का पहला हाइड्रो-इलेक्ट्रिक पावर स्टेशन स्थापित किया गया। इसके बाद 1899 में कलकत्ता में देश का पहला थर्मल पावर स्टेशन शुरू हुआ, जिससे बड़े स्तर पर बिजली उत्पादन संभव हुआ।

पहला पूरी तरह बिजली वाला शहर और शुरुआती बिजली बिल

साल 1902 में कर्नाटक के कोलार गोल्ड फील्ड्स (KGF) में बनी टाउनशिप देश की पहली ऐसी जगह बनी, जहां हर घर में बिजली कनेक्शन पहुंचा। इसके बाद 1905 में बेंगलुरु एशिया के शुरुआती शहरों में शामिल हुआ, जहां शिवनासमुद्र हाइड्रो पावर स्टेशन से स्ट्रीट लाइट शुरू हुई।

शुरुआती दौर में बिजली आम लोगों के लिए एक महंगी सुविधा थी। बिजली का खर्च इतना अधिक था कि यह मुख्य रूप से ब्रिटिश अधिकारियों, अमीर व्यापारियों, राजा-महाराजाओं और बड़े संस्थानों तक सीमित रही। आम परिवारों के लिए बिजली का बिल चुकाना आसान नहीं था, क्योंकि न्यूनतम शुल्क भी उस समय की औसत आय के मुकाबले काफी ज्यादा था। यही वजह रही कि गांवों और गरीब परिवारों तक बिजली पहुंचने में कई दशक लग गए।

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