मिडिल ईस्ट में फिर बढ़ा तनाव: ट्रंप ने ईरान को बताया 'कैंसर', तेहरान का पलटवार—'हर लड़ाई के लिए तैयार हैं'

मिडिल ईस्ट में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान पर तीखे बयान और हालिया सैन्य कार्रवाई के बाद दोनों देशों के बीच जुबानी जंग और तेज हो गई है। ट्रंप ने युद्धविराम (सीजफायर) खत्म होने की बात कहते हुए ईरान को "कैंसर" करार दिया, वहीं तेहरान ने साफ शब्दों में कहा कि वह किसी भी तरह की धमकी से डरने वाला नहीं है और हर चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

ट्रंप का ईरान पर तीखा हमला

कुछ सप्ताह पहले तक ईरान के नेतृत्व को लेकर अपेक्षाकृत नरम रुख अपनाने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस बार तेहरान के खिलाफ बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि हालिया हमलों के बाद ईरान के साथ युद्धविराम समाप्त हो चुका है, हालांकि बातचीत की संभावना अब भी बनी हुई है। ट्रंप ने कहा, "उनमें कुछ गड़बड़ है। वे बीमार हैं और गंदा खेल खेलते हैं।" साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वह अपने वार्ताकारों को बातचीत जारी रखने की अनुमति दे सकते हैं, लेकिन उन्हें लगता है कि ईरान केवल समय बर्बाद कर रहा है।

अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य कार्रवाई

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने 8 जुलाई को दावा किया कि उसने ईरान के 80 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। इसके जवाब में ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अमेरिका के 85 सैन्य ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई करने का दावा किया। ईरानी सेना के अनुसार, दक्षिणी ईरान पर अमेरिकी हमलों के जवाब में बहरीन स्थित शेख ईसा एयर बेस पर तैनात अमेरिकी बलों को ड्रोन हमले के जरिए निशाना बनाया गया।

ईरान का जवाब—'धमकियों से नहीं डरते'

ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के प्रवक्ता इब्राहिम रेजाई ने कहा कि ईरान ट्रंप की धमकियों से नहीं डरता। उनका कहना था कि देश किसी भी बुराई और चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

वहीं, ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बगेर गालिबफ ने 14 सूत्रीय समझौते के टूटने के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि समझौते के बावजूद अमेरिका ने ईरान पर हमले किए, जो तेहरान के खिलाफ उसकी दबाव की नीति को दर्शाता है।

समझौते के उल्लंघन का लगाया आरोप

मोहम्मद बगेर गालिबफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, "धमकी और जबरन वसूली का युग अब खत्म हो चुका है। इससे कोई फायदा नहीं होगा। हम झुकने वाले नहीं हैं।" उन्होंने अमेरिका पर 14 सूत्रीय समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में नियमों की अनदेखी, हमलों की धमकियां, तेल प्रतिबंधों को दोबारा लागू करना, दक्षिणी ईरान पर सैन्य कार्रवाई और लेबनान पर इजरायली हमलों को जारी रखना इस नीति का हिस्सा है।

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव मिडिल ईस्ट की स्थिरता के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। एक ओर जहां दोनों देशों के बीच बातचीत की संभावना पूरी तरह खत्म नहीं हुई है, वहीं लगातार सैन्य कार्रवाई और तीखे बयान क्षेत्र में संघर्ष के खतरे को और बढ़ा रहे हैं। आने वाले दिनों में दोनों देशों का रुख पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और वैश्विक राजनीति पर महत्वपूर्ण असर डाल सकता है।

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