Australia Uranium: ऑस्ट्रेलिया किन देशों को बेचता है यूरेनियम? जानें कीमत और भारत के लिए क्यों है जरूरी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऑस्ट्रेलिया यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में कई अहम कदम उठाए गए. इसी क्रम में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच सिविल न्यूक्लियर सेक्टर में सहयोग को बढ़ावा मिला. इस समझौते के बाद भारत के न्यूक्लियर पावर प्रोग्राम के लिए ऑस्ट्रेलिया से यूरेनियम सप्लाई का रास्ता आसान हुआ.ऑस्ट्रेलिया दुनिया के सबसे बड़े यूरेनियम एक्सपोर्टर्स में शामिल है और इसके पास वैश्विक यूरेनियम भंडार का एक बड़ा हिस्सा मौजूद है. हालांकि, इतना बड़ा भंडार होने के बावजूद ऑस्ट्रेलिया हर देश को यूरेनियम की बिक्री नहीं करता है. इसके लिए सख्त नियम और सुरक्षा शर्तें लागू हैं.
कड़ी शर्तों के तहत होता है यूरेनियम का निर्यात
ऑस्ट्रेलिया के पास दुनिया के सबसे बड़े यूरेनियम भंडारों में से एक है. माना जाता है कि वैश्विक यूरेनियम भंडार का लगभग 28 से 35 प्रतिशत हिस्सा ऑस्ट्रेलिया में मौजूद है। इसके बावजूद देश की यूरेनियम एक्सपोर्ट नीति काफी सख्त है.
ऑस्ट्रेलिया केवल उन्हीं देशों को यूरेनियम बेचता है, जिनके साथ उसके द्विपक्षीय सुरक्षा समझौते होते हैं. खरीदार देशों को यह सुनिश्चित करना होता है कि यूरेनियम का इस्तेमाल केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए किया जाएगा, जैसे न्यूक्लियर पावर प्लांट में बिजली उत्पादन. इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय निगरानी के जरिए यह भी सुनिश्चित किया जाता है कि इसका उपयोग सैन्य गतिविधियों में न हो.
किन देशों को बेचता है ऑस्ट्रेलिया यूरेनियम?
ऑस्ट्रेलिया कई देशों को सीधे या अंतरराष्ट्रीय सप्लाई नेटवर्क के माध्यम से यूरेनियम एक्सपोर्ट करता है. इसके प्रमुख ग्राहकों में अमेरिका सबसे आगे है. इसके अलावा फ्रांस, कनाडा, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे देश भी ऑस्ट्रेलिया से यूरेनियम खरीदते हैं.
यूरोप के कई देश जैसे यूनाइटेड किंगडम, स्वीडन, फिनलैंड, बेल्जियम और स्पेन भी ऑस्ट्रेलिया के यूरेनियम सप्लाई नेटवर्क का हिस्सा हैं. भारत के साथ सिविल न्यूक्लियर सहयोग समझौते के बाद भारत भी ऑस्ट्रेलिया के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार बन गया है.
यूरेनियम की कीमत कितनी है?
यूरेनियम की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग और सप्लाई के आधार पर बदलती रहती है. 2026 के मध्य तक ग्लोबल स्पॉट मार्केट में यूरेनियम की कीमत लगभग 85 डॉलर प्रति पाउंड थी. साल की शुरुआत में यह कुछ समय के लिए करीब 94 डॉलर प्रति पाउंड तक पहुंच गई थी.
एक पाउंड लगभग 0.453 किलोग्राम के बराबर होता है. इस हिसाब से यूरेनियम की कीमत लगभग 187 डॉलर प्रति किलोग्राम बैठती है, जो भारतीय मुद्रा में करीब 15,600 से 15,800 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास हो सकती है.
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है ऑस्ट्रेलिया का यूरेनियम?
भारत में बिजली की बढ़ती मांग के कारण स्वच्छ और भरोसेमंद ऊर्जा स्रोतों की जरूरत लगातार बढ़ रही है. देश के भविष्य के ऊर्जा मिश्रण में न्यूक्लियर पावर की भूमिका काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
न्यूक्लियर रिएक्टरों को लगातार चलाने के लिए यूरेनियम की स्थिर सप्लाई जरूरी होती है. ऑस्ट्रेलिया के विशाल यूरेनियम भंडार और एक भरोसेमंद वैश्विक सप्लायर के रूप में उसकी पहचान भारत के लिए इसे एक अहम साझेदार बनाती है.
ऑस्ट्रेलिया का यूरेनियम बाजार वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. सख्त नियमों के बावजूद अमेरिका, फ्रांस, जापान, चीन और अब भारत जैसे देश इसके प्रमुख साझेदार हैं.भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच बढ़ता न्यूक्लियर सहयोग भविष्य में ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को मजबूत करने में मदद कर सकता है.
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