तुषार गांधी ने CJP आंदोलन को दिया समर्थन, बोले- जंतर-मंतर पर नई क्रांति जन्म ले रही है

नई दिल्ली: महात्मा गांधी के परपोते तुषार गांधी ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन को अपना समर्थन दिया है। उन्होंने केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जंतर-मंतर पर एक नई क्रांति जन्म ले रही है, जो अब केवल सोनम वांगचुक और CJP तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि देश की नई पीढ़ी यानी GenZ इसे आगे बढ़ा रही है।

तुषार गांधी ने सोमवार (20 जुलाई) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कई पोस्ट कर अपनी प्रतिक्रिया साझा की। उन्होंने कहा कि “कॉकरोच अब उड़ेंगे और आसमान छूएंगे।” उन्होंने प्रदर्शन में अपने परिवार की भागीदारी का भी जिक्र किया और बताया कि उनकी बेटी कस्तूरी और दामाद हर्ष संसद तक निकाले गए मार्च में शामिल हुए।

बेटी और दामाद के प्रदर्शन में शामिल होने पर जताया गर्व

तुषार गांधी ने कहा कि उन्हें गर्व है कि उनकी बेटी कस्तूरी और दामाद हर्ष सोमवार सुबह संसद तक होने वाले मार्च का हिस्सा बने। उन्होंने कहा कि दोनों ने इस आंदोलन में शामिल होकर उनके परिवार का प्रतिनिधित्व किया है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों और जनभागीदारी का उदाहरण बताया।

‘3 इडियट्स’ फिल्म और सोनम वांगचुक को लेकर दी प्रतिक्रिया

सोनम वांगचुक के नाम को फिल्म ‘3 इडियट्स’ से जोड़ने को लेकर चल रही बहस पर भी तुषार गांधी ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि उन्हें फिल्म ‘3 इडियट्स’ पसंद आई थी, लेकिन उन्हें यह बात अच्छी नहीं लगी कि इसमें सोनम वांगचुक को ‘इडियट’ कहा गया।

उन्होंने आमिर खान और फिल्म से जुड़े लोगों का धन्यवाद करते हुए कहा कि उन्होंने स्पष्ट किया कि ‘3 इडियट्स’ सोनम वांगचुक पर आधारित या उनसे प्रेरित नहीं थी।

पीएम मोदी सरकार पर साधा निशाना

तुषार गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सहानुभूति दिखाने के बजाय सत्याग्रह को दबाने के लिए अपनी “गेस्टापो” जैसी व्यवस्था का इस्तेमाल कर रही है।

उन्होंने 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय अंग्रेजों ने कांग्रेस के पूरे नेतृत्व को गिरफ्तार कर लिया था और उन्हें लगा था कि आंदोलन खत्म हो जाएगा, लेकिन आम भारतीयों ने एकजुट होकर इसे आगे बढ़ाया।

तुषार गांधी ने कहा कि आज भी देश को उसी “भारत छोड़ो” आंदोलन जैसी भावना दिखाने की जरूरत है, जहां लोग अपने अधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए एकजुट होकर आवाज उठाएं।

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