अनशन तोड़ने के बाद सोनम वांगचुक का बड़ा बयान: सरकार से मिले तीन लिखित आश्वासन, मानी गईं प्रमुख मांगें
नीट (NEET) पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में छात्रों और युवाओं के बीच बढ़ते आक्रोश तथा विभिन्न राजनीतिक दलों के लगातार विरोध-प्रदर्शनों के बीच केंद्र सरकार सक्रिय नजर आई। गुरुवार को सरकार ने कई अहम फैसले और घोषणाएं कीं। इसी क्रम में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपने 26 दिनों से जारी अनशन को देर रात लगभग 12:30 बजे समाप्त कर दिया। उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से तीन महत्वपूर्ण मांगों पर लिखित आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने यह निर्णय लिया।
दो दिनों की बातचीत के बाद खत्म हुआ अनशन
सोनम वांगचुक ने बताया कि पिछले दो दिनों से सरकार और उनके बीच लगातार बातचीत चल रही थी। वे केवल मौखिक भरोसे से संतुष्ट नहीं थे और अपनी मांगों पर लिखित आश्वासन चाहते थे। इसी कारण उन्हें दो दिन अतिरिक्त अनशन पर बैठना पड़ा। अंततः सरकार ने लिखित रूप में आश्वासन दिया, जिसके बाद उन्होंने अपना अनशन समाप्त कर दिया।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ लद्दाख की एपेक्स बॉडी के शीर्ष नेता उनसे मिलने पहुंचे थे। इससे पहले विभिन्न राजनीतिक दलों के लगभग 65 सांसदों ने एक पत्र पर हस्ताक्षर कर उनसे अनशन समाप्त करने की अपील की थी। सांसदों और मंत्रियों ने भरोसा दिलाया था कि नीट पेपर लीक और देश की परीक्षा प्रणाली से जुड़े मुद्दों पर संसद में विस्तृत चर्चा कराई जाएगी।
सरकार ने लिखित में मानीं तीन प्रमुख मांगें
सोनम वांगचुक के अनुसार सरकार ने तीन महत्वपूर्ण बिंदुओं पर लिखित आश्वासन दिया है। पहला, जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले तथा 20 जुलाई के "संसद चलो" मार्च में शामिल छात्रों और युवाओं के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई या एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी। दूसरा, पेपर लीक प्रकरण के कारण जान गंवाने वाले 20 से अधिक बच्चों के परिवारों को सरकार उचित मुआवजा प्रदान करेगी। तीसरा, संसद में परीक्षा प्रणाली में सुधार, शिक्षा व्यवस्था की जवाबदेही और इस पूरे मामले पर विस्तृत बहस कर भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के उपायों पर चर्चा की जाएगी।
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर क्या बोले वांगचुक?
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के सवाल पर सोनम वांगचुक ने कहा कि सरकार इस संबंध में कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं दे सकी। उन्होंने कहा कि उनके सामने दो विकल्प थे—या तो कई सप्ताह तक भूख हड़ताल जारी रखकर अपनी जान जोखिम में डालते, या फिर लिखित आश्वासन मिलने के बाद अनशन समाप्त करते। उन्होंने बताया कि पिछले दो-तीन सप्ताह से हजारों लोग उनसे लगातार आग्रह कर रहे थे कि आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए उनका जीवित रहना जरूरी है।
सरकार को होगा राजनीतिक नुकसान
सोनम वांगचुक ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा न देना सरकार के लिए ही नुकसानदायक साबित होगा। उनका मानना है कि यदि शिक्षा मंत्री इस्तीफा दे देते तो सरकार की राजनीतिक क्षति कम हो सकती थी। उन्होंने कहा कि उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना था कि आंदोलन में शामिल मासूम छात्रों पर कोई एफआईआर दर्ज न हो, क्योंकि उन्होंने लद्दाख में देखा है कि ऐसे मामलों से युवाओं का भविष्य प्रभावित होता है। अंत में उन्होंने मांगों पर सकारात्मक आश्वासन मिलने पर संतोष जताया और आंदोलन को समर्थन देने वाले सभी देशवासियों का धन्यवाद किया।
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