बातचीत की मेज पर सरकार और CJP, क्या टूटेगा गतिरोध या बढ़ेगी सियासी गर्मी?

आंदोलन, आरोप और बातचीत की कोशिशों के बीच अब सबकी निगाहें शुक्रवार दोपहर 12:30 बजे दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब पर टिकी हैं। यहीं सरकार और CJP के प्रतिनिधियों के बीच दूसरी दौर की अहम वार्ता होने जा रही है। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है, जब दोनों पक्षों के बीच पिछले कई दिनों से खींचतान जारी है।

इससे पहले 20 जुलाई को केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के आवास पर हुई बातचीत से कोई समाधान नहीं निकल पाया था। बैठक खत्म हुई, लेकिन सवाल वहीं खड़े रह गए। इसके बाद दोनों ओर से बयानबाजी तेज हो गई।

सरकार का कहना है कि उसने CJP को बातचीत के लिए चार बार न्योता दिया, लेकिन उनकी ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली। वहीं, CJP ने साफ कर दिया कि वह किसी मंत्री के आवास पर बातचीत के लिए नहीं जाएगी। पार्टी की मांग है कि चर्चा किसी निष्पक्ष और तटस्थ स्थान पर हो, ताकि बातचीत का माहौल विश्वासपूर्ण बन सके।

इसी बीच आंदोलन के केंद्र में रहे सोनम वांगचुक ने 26 दिन लंबे अनशन को समाप्त कर दिया। देर रात करीब 12:30 बजे केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह मेदांता अस्पताल पहुंचे और उन्हें जूस पिलाकर अनशन समाप्त कराया। इस घटनाक्रम ने आंदोलन को लेकर चल रही चर्चाओं को और तेज कर दिया।

CJP के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने दावा किया कि सरकार आंदोलन के दबाव में है। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री को देर रात वीडियो संदेश जारी करना पड़ा, क्योंकि जनता का दबाव बढ़ रहा था। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पूरी होने तक प्रदर्शन जारी रहेगा।

वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार देर रात जारी वीडियो संदेश में पेपर लीक के मुद्दे पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि सरकार इस समस्या से निपटने के लिए कड़ा कानून लाएगी।

अब असली सवाल यही है—क्या शुक्रवार की बातचीत किसी समाधान का रास्ता खोलेगी या फिर यह विवाद एक नए राजनीतिक मोड़ की ओर बढ़ेगा? बातचीत की मेज पर होने वाली यह मुलाकात आने वाले दिनों की दिशा तय कर सकती है।

 

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