रांची में छात्रों का ‘शॉर्टकट’ मार्च! विधानसभा की 7 बैरिकेडिंग पार कर पहुंचे प्रदर्शनकारी, पुलिस रह गई देखती
रांची: झारखंड की राजधानी रांची में सोमवार को JPSC-JSSC परीक्षा विवाद को लेकर चल रहा छात्रों का आंदोलन अचानक बेहद उग्र और नाटकीय मोड़ पर पहुंच गया। विधानसभा की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। रास्ते में एक-दो नहीं, बल्कि कई स्तरों पर बैरिकेडिंग की गई थी। लेकिन प्रदर्शनकारी इन बाधाओं को पार करते हुए आगे बढ़ते गए।
हालात ऐसे बने कि पुलिस की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद छात्रों ने बैरिकेडिंग के ऊपर से रास्ता बनाया और विधानसभा की ओर बढ़ने लगे। बाद में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस, वाटर कैनन और बल प्रयोग का सहारा लिया।

सात स्तर की बैरिकेडिंग, फिर भी नहीं रुके छात्र
छात्रों के विधानसभा घेराव के ऐलान को देखते हुए प्रशासन ने पहले से ही सुरक्षा का व्यापक इंतजाम किया था। विधानसभा के आसपास निषेधाज्ञा लागू की गई थी और अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई थी। मकसद साफ था—प्रदर्शनकारियों को विधानसभा परिसर के करीब पहुंचने से रोकना।
लेकिन सोमवार को जब बड़ी संख्या में छात्र विधानसभा की तरफ बढ़े तो स्थिति तेजी से बदल गई। प्रदर्शनकारियों ने रास्ते में लगी कंटीले तार वाली बैरिकेडिंग को भी पार कर लिया।
सुरक्षा घेरे को पार करते छात्रों के वीडियो और तस्वीरों ने पूरे घटनाक्रम को चर्चा में ला दिया। कई जगह प्रदर्शनकारी बैरिकेड के ऊपर चढ़ते दिखाई दिए और देखते ही देखते पुलिस द्वारा बनाए गए सुरक्षा घेरे के आगे निकल गए।
आखिर क्यों सड़कों पर उतरे हैं छात्र?
JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर छात्र लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं। छात्रों का आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई और परीक्षा से जुड़ी अनियमितताओं ने हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रदर्शनकारी कई परीक्षाओं की निष्पक्ष जांच, कथित अनियमितताओं पर सख्त कार्रवाई और भर्ती प्रक्रिया में सुधार की मांग कर रहे हैं। कई छात्र केंद्रीय जांच एजेंसी से जांच की मांग पर भी अड़े हुए हैं।
छात्रों का आंदोलन 25 जुलाई से जारी है और रांची में यह लगातार बड़ा रूप लेता गया है। जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में धरने के बाद छात्रों ने विधानसभा मार्च का ऐलान किया था। सरकार और छात्रों के बीच कई दौर की बातचीत भी हुई, लेकिन विवाद का पूरी तरह समाधान नहीं निकल सका।

बातचीत बेनतीजा, फिर बढ़ा टकराव
सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच बातचीत के कई दौर हुए, लेकिन छात्रों की प्रमुख मांगों को लेकर सहमति नहीं बन पाई। इसी के बाद छात्रों ने विधानसभा घेराव का फैसला किया।
सरकार की ओर से छात्रों से संवाद जारी रखने और उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करने की बात कही गई थी। वहीं प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने के मूड में नहीं दिखे।
पुलिस ने संभाला मोर्चा
जब प्रदर्शनकारी सुरक्षा घेरे को पार कर आगे बढ़ने लगे तो पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश की। स्थिति बिगड़ने पर आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया। कुछ स्थानों पर पुलिस ने लाठीचार्ज भी किया।
पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण रहने की अपील की और कहा कि छात्रों की मांगें सरकार तक पहुंच रही हैं। अधिकारियों के मुताबिक, बल प्रयोग को सीमित रखने की कोशिश की गई क्योंकि प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्र शामिल थे।
आंदोलन ने बढ़ाई सरकार की मुश्किलें
JPSC-JSSC विवाद अब केवल परीक्षा से जुड़ा मामला नहीं रह गया है। लगातार हो रहे प्रदर्शन ने सरकार पर राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव भी बढ़ा दिया है।
मामले की जांच को लेकर भी अलग-अलग स्तर पर कार्रवाई सामने आई है। सोमवार को झारखंड CID ने पूर्व JPSC अध्यक्ष एल. खियांग्ते को कथित भर्ती अनियमितताओं के मामले में गिरफ्तार किया। इससे भी परीक्षा विवाद को लेकर चल रही जांच और आंदोलन को नई दिशा मिली है।

छात्रों का संदेश साफ—पीछे हटने को तैयार नहीं
रांची की सड़कों पर सोमवार को जो तस्वीरें सामने आईं, उन्होंने यह साफ कर दिया कि छात्रों का गुस्सा अभी शांत नहीं हुआ है। कई स्तर की सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद बैरिकेडिंग पार कर विधानसभा की ओर बढ़ते प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी।
अब नजर इस बात पर है कि सरकार और छात्रों के बीच बातचीत से कोई समाधान निकलता है या आंदोलन आने वाले दिनों में और बड़ा रूप लेता है। फिलहाल JPSC-JSSC विवाद ने झारखंड में भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता और युवाओं के भविष्य से जुड़े सवालों को फिर केंद्र में ला दिया है।

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