राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ा बदलाव, 5585 आवेदनों के बाद आज तय होगा पहला CEO! 3 नए ट्रस्टियों की एंट्री से बढ़ी हलचल
अयोध्या, 2 सितंबर 2026: अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर से जुड़ी प्रशासनिक व्यवस्था में बुधवार को बड़ा बदलाव देखने को मिला। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में तीन नए सदस्यों को शामिल किया गया है। इसके साथ ही ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक में पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी CEO के चयन पर भी फैसला होने की उम्मीद है।
CEO पद के लिए शुरू की गई चयन प्रक्रिया अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। इस पद के लिए देशभर से हजारों आवेदन आए थे। स्क्रीनिंग और इंटरव्यू की लंबी प्रक्रिया के बाद अब केवल तीन नाम अंतिम दौड़ में हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर ट्रस्ट के पहले CEO के रूप में किस व्यक्ति के नाम पर मुहर लगेगी।
तीन नए सदस्यों की ट्रस्ट में एंट्री
राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में बुधवार को तीन नए सदस्यों को शामिल किया गया। इनमें अयोध्या के मदन मोहन पांडेय, दिल्ली के महेश भागचंदका और शिकोहाबाद की निर्मला यादव शामिल हैं।
बताया गया है कि तीनों नए सदस्य ट्रस्ट की बैठक में ऑनलाइन माध्यम से शामिल हुए। इन नियुक्तियों के साथ ट्रस्ट में खाली पड़े तीन पदों को भर दिया गया है।
इन पदों के खाली होने की वजह अलग-अलग रही है। पूर्व महामंत्री चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे के बाद दो पद रिक्त हुए थे, जबकि ट्रस्टी विमलेंद्र मोहन के निधन के बाद एक और पद खाली हो गया था। अब इन तीनों पदों पर नई नियुक्तियां कर दी गई हैं।
नए ट्रस्टियों में कौन-कौन शामिल?
नए सदस्यों में मदन मोहन पांडेय अयोध्या से आते हैं और राम जन्मभूमि से जुड़े कानूनी मामले में मंदिर पक्ष की ओर से हाईकोर्ट में पैरवी कर चुके हैं।
दूसरे नए सदस्य महेश भागचंदका दिल्ली से हैं। उन्हें पूर्व विश्व हिंदू परिषद नेता अशोक सिंघल का रिश्तेदार बताया गया है।
तीसरी सदस्य निर्मला यादव शिकोहाबाद से हैं। तीनों को ट्रस्ट में शामिल किए जाने के बाद अब प्रशासनिक व्यवस्था में नई जिम्मेदारियों का बंटवारा भी महत्वपूर्ण हो गया है।
5585 आवेदन से शुरू हुई CEO की दौड़
राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO की नियुक्ति को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा है। इस पद के लिए आवेदन की प्रक्रिया 6 जुलाई से शुरू की गई थी।
CEO पद के लिए कुल 5,585 आवेदन प्राप्त हुए। इतनी बड़ी संख्या में आवेदन आने के बाद उम्मीदवारों की स्क्रीनिंग की गई।
इसके बाद जस्टिस (रिटायर्ड) प्रमोद कोहली की अध्यक्षता वाली स्क्रीनिंग कमेटी ने चयन प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। कमेटी ने कुल 16 उम्मीदवारों के इंटरव्यू लिए।
इंटरव्यू के बाद तीन उम्मीदवारों के नाम अंतिम विचार के लिए चुने गए। इन तीनों नामों को ट्रस्ट के अध्यक्ष के पास भेजा जा चुका है।
अब ट्रस्ट की बैठक में इनमें से किसी एक नाम पर अंतिम फैसला हो सकता है।
यानी हजारों उम्मीदवारों से शुरू हुई यह दौड़ अब सिर्फ तीन नामों तक पहुंच गई है।
CEO के पद को इतना महत्वपूर्ण क्यों माना जा रहा है?
राम मंदिर निर्माण के बाद अब मंदिर की व्यवस्थाओं और उससे जुड़े प्रशासनिक कामों का दायरा लगातार बढ़ रहा है। देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ विदेशों से भी श्रद्धालु अयोध्या पहुंच रहे हैं।
ऐसे में मंदिर ट्रस्ट के सामने प्रशासनिक कामकाज, वित्तीय प्रबंधन, कानूनी मामलों और विभिन्न वैधानिक जिम्मेदारियों को व्यवस्थित तरीके से संभालने की चुनौती है।
इसी वजह से CEO का पद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र के मुताबिक, CEO की नियुक्ति का उद्देश्य ट्रस्ट के कामकाज को अधिक पेशेवर और पारदर्शी तरीके से संचालित करना है।
प्रस्तावित व्यवस्था में CEO ट्रस्ट के महामंत्री को रिपोर्ट करेंगे। प्रशासनिक, वित्तीय और वैधानिक मामलों से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्य CEO के अधिकार क्षेत्र में होंगे।
ट्रस्ट की डीड में भी होगा बदलाव
बुधवार की बैठक में सिर्फ CEO की नियुक्ति ही मुद्दा नहीं है। ट्रस्ट की डीड में संशोधन भी बैठक के महत्वपूर्ण एजेंडे में शामिल है।
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन 5 फरवरी 2020 को किया गया था। गठन के बाद पहली बार ट्रस्ट की डीड में संशोधन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
इस बदलाव के जरिए ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे और अलग-अलग पदों की जिम्मेदारियों को अधिक स्पष्ट किए जाने की उम्मीद है। CEO के अधिकार और जिम्मेदारियों को लेकर भी इसमें प्रावधान किए जा सकते हैं।
चंदे से जुड़े विवाद के बाद प्रशासनिक बदलाव
राम मंदिर ट्रस्ट की प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव की जरूरत उस समय ज्यादा महसूस हुई, जब मंदिर से जुड़े चंदे को लेकर विवाद सामने आया।
इसके बाद ट्रस्ट के कामकाज और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर सवाल उठे। इसी दौरान पूर्व महामंत्री चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे की बात सामने आई।
इसके बाद ट्रस्ट की व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी तथा व्यवस्थित बनाने की दिशा में कदम उठाए गए। CEO की नियुक्ति को भी इसी प्रशासनिक पुनर्गठन की महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।
PRO की नियुक्ति पर भी चर्चा
ट्रस्ट की बैठक में CEO के अलावा PRO यानी जनसंपर्क अधिकारी के नाम पर भी चर्चा होनी है।
राम मंदिर से जुड़ी गतिविधियों और श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के बीच सूचना एवं जनसंपर्क व्यवस्था की भूमिका भी अहम हो गई है। ऐसे में PRO की नियुक्ति से ट्रस्ट की संचार व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित करने की कोशिश की जा सकती है।
आज के फैसलों पर टिकी नजर
बुधवार की बैठक राम मंदिर ट्रस्ट के लिहाज से कई मायनों में महत्वपूर्ण है। एक तरफ तीन नए सदस्यों को ट्रस्ट में शामिल किया गया है, तो दूसरी ओर CEO की चयन प्रक्रिया अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुकी है।
इसके साथ ही ट्रस्ट की डीड में संशोधन और PRO की नियुक्ति जैसे मुद्दे भी बैठक के एजेंडे में हैं।
सबसे ज्यादा नजर उस फैसले पर है, जिसका इंतजार लंबे समय से किया जा रहा है—राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO का नाम कौन होगा?
5,585 आवेदनों से शुरू हुई चयन प्रक्रिया अब तीन नामों तक पहुंच चुकी है। स्क्रीनिंग कमेटी की सिफारिश के बाद अंतिम फैसला ट्रस्ट को करना है। अगर बुधवार की बैठक में नाम तय हो जाता है, तो यह राम मंदिर ट्रस्ट की प्रशासनिक व्यवस्था में एक नए अध्याय की शुरुआत होगी।
अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के बाद अब उसके संचालन और प्रशासन को लेकर भी व्यवस्था लगातार नए रूप में ढल रही है। तीन नए ट्रस्टियों की नियुक्ति और CEO की संभावित नियुक्ति इसी बदलाव की अगली महत्वपूर्ण कड़ी मानी जा रही है।
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