बुजुर्गों के दर्द पर हमदर्दी का मरहम

इटावा,जसवंतनगर :  जिम्मेदारियों और शासकीय व्यस्तताओं के बीच जब दिल में संवेदनशीलता और समाज के प्रति अपनापन जिंदा हो, तो इंसान वक्त निकाल ही लेता है। कुछ ऐसा ही संवेदनशील और दिल को छू लेने वाला नजारा देखने को मिला जब जसवंतनगर की नायब तहसीलदार नेहा सचान एक वृद्धाश्रम पहुंचीं। तहसील क्षेत्र की सीमाओं से परे जाकर उन्होंने अपना समय उन बेसहारा बुजुर्गों के नाम समर्पित किया, जिन्हें अपनों ने ही बेगाना बना दिया था।
वृद्धाश्रम के शांत और उदास माहौल में जब प्रशासनिक अधिकारी नेहा सचान मुस्कुराते हुए दाखिल हुईं, तो वहां रह रहे बुजुर्गों के चेहरे पर एक अलग ही चमक और सुकून तैर गया। नेहा सचान ने आश्रम में रह रहे एक-एक बुजुर्ग से बहुत ही आत्मीयता से मुलाकात की, उनका हाथ थामा और उनसे लंबा संवाद किया। अपनों के जरिए घर से निकाले जाने का दंश झेल रहे इन बेसहारा बुजुर्गों के दिल में छिपे गहरे मानसिक दर्द को समझते हुए नायब तहसीलदार नेहा सचान ने बेहद आत्मीय भाव से उनकी तकलीफें सुनीं। उन्होंने बुजुर्गों को महसूस कराया कि वे अकेले नहीं हैं और समाज में आज भी उनकी कद्र करने वाले लोग मौजूद हैं। बातचीत के दौरान कई बुजुर्गों की आंखें छलक आईं, तो नेहा सचान का दिल भी भर आया।
इस दौरान नायब तहसीलदार नेहा सचान ने इस वृद्धाश्रम का संचालन कर रहे श्री रविशंकर पांडे जी के सेवाभाव और समर्पण की भी जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि अपनी दिवंगत बेटी की पावन स्मृति में इस तरह का विशाल सामाजिक और नेक कार्य चलाना वाकई वंदनीय और अतुलनीय है। उन्होंने आश्रम में बुजुर्गों के लिए की गई बेहतर व्यवस्थाओं का जायजा लिया, जहाँ नियमित साफ-सफाई, शुद्ध और पौष्टिक भोजन, भ्रमण की सुविधा के साथ-साथ बुजुर्गों के उत्तम स्वास्थ्य के लिए योग शिक्षक तक की व्यवस्था की गई है। नेहा सचान ने संचालक रविशंकर पांडे जी को इस उत्कृष्ट और पुण्य कार्य के लिए दिल से बधाई दी। एक प्रशासनिक पद पर रहते हुए भी आम जनता और बेसहारा बुजुर्गों के प्रति नायब तहसीलदार नेहा सचान का यह संवेदनशीलता से भरा अंदाज अब हर तरफ चर्चा और तारीफ का विषय बना हुआ है।

रिपोर्टर : देवेन्द्र सिंह

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