सीएम सिटी भरतपुर में गरीबों के हक पर पहरा! अगावली में आखिर किसका राज?
भरतपुर/बयाना : मुख्यमंत्री के जीरो टॉलरेंस के दावों और विकास की योजनाओं के बीच अगावली गांव की जमीनी तस्वीर कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि शिवालिक सिलिका क्रेशर क्षेत्र में संचालित गतिविधियों के कारण उन्हें श्मशान घाट तक जाने वाले रास्ते, चारागाह भूमि और हजारों वर्ष पुराने बताए जाने वाले स्वयंभू हनुमान जी के मंदिर तक पहुंचने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का दावा है कि मंदिर तक जाने वाला मार्ग भी बाधित है। ऐसे में सवाल उठता है कि आस्था, अंतिम संस्कार और आमजन की बुनियादी सुविधाओं का समाधान आखिर कब होगा?
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि क्रेशर और खनन गतिविधियों के कारण उनके मकानों में बड़ी-बड़ी दरारें आ गई हैं। हालांकि इन दरारों के वास्तविक कारणों की पुष्टि तकनीकी जांच के बाद ही हो सकती है, लेकिन ग्रामीणों की चिंता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। प्रशासन को विशेषज्ञों की टीम भेजकर मकानों का निरीक्षण कराना चाहिए और यह स्पष्ट करना चाहिए कि दरारें प्राकृतिक कारणों से हैं या क्रेशर संचालन और भारी वाहनों की आवाजाही से।
इसके साथ ही खनन पट्टे की सीमाओं, पर्यावरणीय स्वीकृतियों, धूल और ध्वनि प्रदूषण तथा सुरक्षा मानकों की निष्पक्ष जांच जरूरी है। यदि कहीं नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, यदि आरोप तथ्यहीन हैं, तो प्रशासन को जांच रिपोर्ट सार्वजनिक कर ग्रामीणों की शंकाओं का समाधान करना चाहिए।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या किसी आम ग्रामीण को अपने ही गांव में श्मशान घाट, मंदिर और चारागाह तक पहुंचने के लिए संघर्ष करना पड़ेगा? क्या प्रशासन मौके पर पहुंचकर रास्तों की स्थिति देखेगा और स्थायी समाधान निकालेगा?
अब सवाल सीधे प्रशासन से है—अगावाली के ग्रामीणों को न्याय कब मिलेगा?
जिला प्रशासन, खनन विभाग और पुलिस को ग्रामीणों की शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। विकास तभी सार्थक है, जब उसकी रोशनी गांव के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और अगावाली के लोगों को सम्मान, सुरक्षा तथा अपने अधिकार मिलें।
रिपोर्टर : देवेन्द्र

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