खुद की पार्टी के विधायक के खिलाफ सपाइयों की घेराबंदी
भिवंडी : भिवंडी की राजनीति में उस समय हलचल मच गई, जब समाजवादी पार्टी के भिवंडी शहर जिला सचिव Hamid Sheikh ने अपनी ही पार्टी के भिवंडी पूर्व विधानसभा क्षेत्र के विधायक Rais Kasam Sheikh के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। हमीद शेख ने मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis, राज्य के मुख्य सचिव और राज्यपाल को पत्र भेजकर विधायक की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
हमीद शेख द्वारा भेजे गए शिकायत पत्र में विधायक रईस कासम शेख द्वारा वर्ष 2019 और 2024 के विधानसभा चुनावों में चुनाव आयोग को सौंपे गए शपथ पत्रों का हवाला देते हुए कई गंभीर सवाल उठाए गए हैं। शिकायत के अनुसार, वर्ष 2019 के शपथ पत्र में विधायक ने अपने खिलाफ केवल एक आपराधिक मामला लंबित होने की जानकारी दी थी, जबकि 2024 के शपथ पत्र में ऐसे मामलों की संख्या बढ़कर चार बताई गई है। इस खुलासे के बाद पार्टी के भीतर नाराजगी खुलकर सामने आने लगी है।
शिकायत में विधायक की संपत्ति में हुई वृद्धि को लेकर भी सवाल खड़े किए गए हैं। पत्र के मुताबिक, वर्ष 2019 में विधायक की घोषित संपत्ति करीब 5.48 करोड़ रुपये थी, जो 2024 में बढ़कर लगभग 7.60 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। वहीं देनदारियां भी 2.42 करोड़ रुपये से बढ़कर 3.33 करोड़ रुपये होने का दावा किया गया है।
हमीद शेख ने मांग की है कि विधायक और उनके परिवार की संपत्तियों के स्रोतों की जांच आर्थिक अपराध शाखा (EOW) या अन्य सक्षम एजेंसियों से कराई जाए। उन्होंने चुनाव आयोग को दिए गए शपथ पत्रों में दर्ज संपत्ति और आपराधिक मामलों की विस्तृत जांच कर रिपोर्ट सार्वजनिक करने की भी मांग की है।
सूत्रों के अनुसार, भिवंडी के करीब 10 से 12 लोगों ने भी अलग-अलग पत्र भेजकर विधायक के खिलाफ कार्रवाई और जांच की मांग की है। इनमें पूर्व उपमहापौर Ahmed Siddiqui, पूर्व नगरसेवक Matloob Sardar, सुरेश पाटील तथा आरपीआई (एकतावादी) भिवंडी शहराध्यक्ष और पूर्व नगरसेवक Vikas Nikam समेत अन्य लोगों के नाम शामिल बताए जा रहे हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने समाजवादी पार्टी के भीतर चल रहे अंतर्कलह को खुलकर सामने ला दिया है। मामले की शिकायत विधानसभा अध्यक्ष को भी भेजी गई है। हमीद शेख ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि यह शिकायत किसी व्यक्तिगत या राजनीतिक द्वेष से प्रेरित नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में पारदर्शिता और कानून के समान पालन की भावना से की गई है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि इस मामले में शासन स्तर पर जांच शुरू होती है, तो आने वाले समय में महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा हो सकता है।
हालांकि, इस पूरे मामले में विधायक रईस शेख का पक्ष जानने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।
संवाददाता : मुस्तकीम खान

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