ब्यूटी पार्लर की आड़ में धर्म परिवर्तन और देह व्यापार का गंदा खेल
भोपाल की गलियों से एक ऐसी खबर आई है जिसे सुनकर आपकी रूह कांप जाएगी। दो सगी बहनें, एक ब्यूटी पार्लर और उसके पीछे छिपा देह व्यापार, धर्मांतरण और एमडी ड्रग्स का वो दलदल जिसमें मासूम लड़कियों को बड़ी बेरहमी से धकेला गया। क्या ब्यूटी पार्लर सिर्फ एक मुखौटा था? क्या ईरानी डेरे के अपराधियों से जुड़े हैं इनके तार? और कैसे 'चंदन' को 'प्रिंस' बनाकर शुरू हुआ पाप का ये साम्राज्य? आइए, इस सनसनीखेज मामले की एक-एक परत खोलते हैं!
भोपाल के बागसेवनिया इलाके में रहने वाली दो सगी बहनें अमरीन और आफरीन आज सलाखों के पीछे हैं, लेकिन उनके जुर्म की दास्तानें शहर को डरा रही हैं। जांच में खुलासा हुआ है कि इन बहनों ने ब्यूटी पार्लर को अपना शिकारगाह बनाया था।
पहले लड़कियों को 'बच्चे की देखभाल' के नाम पर नौकरी दी जाती, फिर उन्हें महंगी पार्टियों, शराब और MD ड्रग्स की लत लगाकर उनका शोषण किया जाता था। जब लड़कियां विरोध करतीं, तो उन्हें बदनामी का डर दिखाकर चुप करा दिया जाता और फिर शुरू होता था धर्मांतरण और देह व्यापार का अंतहीन सिलसिला।
मामले में सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब इन बहनों के परिवार के तार भोपाल के कुख्यात 'ईरानी डेरे' से जुड़े मिले।
"अब्बास नगर की झुग्गियों में रहने के दौरान इन बहनों की नजदीकियां ईरानी डेरे के आपराधिक तत्वों से बढ़ी थीं। पुलिस अब इनके कॉल रिकॉर्ड्स खंगाल रही है ताकि इस गैंग के असली आकाओं तक पहुँचा जा सके।" पीड़िताओं ने जो एफआईआर (FIR) दर्ज कराई है, वो किसी डरावनी फिल्म की पटकथा जैसी है: आरोपियों ने चंदन यादव नाम के युवक को अपने जाल में फंसाकर उसका धर्म परिवर्तन कराया और उसे 'प्रिंस' बना दिया। लड़कियों को भोपाल से अहमदाबाद, गुजरात और मुंबई ले जाया जाता था। वहाँ 'यासिर' नाम का शख्स उन्हें स्पा सेंटर के बहाने देह व्यापार के नरक में धकेल देता था। मुंबई का रहने वाला बिलाल, जो इनका मौसेरा भाई है, इस पूरे सिंडिकेट का अहम हिस्सा बताया जा रहा है। वह लड़कियों को धमकाने और ड्रग्स सप्लाई करने में मदद करता था।
एडिशनल डीसीपी गौतम सोलंकी के नेतृत्व में पुलिस की टीमें छापेमारी कर रही हैं। मुख्य आरोपी अमरीन, आफरीन और चंदन यादव उर्फ प्रिंस को जेल भेजा जा चुका है। मास्टरमाइंड यासिर, बिलाल और चानू उर्फ हाशिम रजा की तलाश में पुलिस की दो टीमें मुंबई और गुजरात में डेरा डाले हुए हैं। आफरीन ने अपना मोबाइल फोन छिपाकर पुलिस को खूब गुमराह किया, जिसे बरामद करने की कोशिशें जारी हैं। यह मामला सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि उन मां-बाप के लिए चेतावनी है जो अपनी बेटियों को अनजान लोगों के भरोसे छोड़ देते हैं। भोपाल पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इस 'लेडी डोन' गैंग ने अब तक कितनी और लड़कियों की जिंदगी बर्बाद की है।
तो ये थी भोपाल के उस सिंडिकेट की कहानी जहाँ 'खूबसूरती' के पीछे 'खौफ' का कारोबार चल रहा था। पुलिस की जांच जारी है और उम्मीद है कि जल्द ही इस गैंग के बाकी सदस्य भी सलाखों के पीछे होंगे। सतर्क रहें, सुरक्षित रहें और अपने आसपास की संदिग्ध गतिविधियों पर नज़र रखें।

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