बिहार कैबिनेट विस्तार का सबसे बड़ा सरप्राइज, नीतीश के बेटे ने थामी सत्ता की कमान!

बिहार की सियासत का सबसे बड़ा पावर शो आज पटना के गांधी मैदान में दुनिया ने देखा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह की मौजूदगी में सम्राट चौधरी की टीम ने वो हुंकार भरी है, जिसकी गूंज दिल्ली तक सुनाई दे रही है। 22 दिनों का इंतज़ार खत्म हुआ और एक साथ 32 मंत्रियों ने शपथ लेकर बिहार की सत्ता की कमान संभाल ली है। लेकिन इस शपथ ग्रहण की सबसे बड़ी खबर क्या है? क्या ये सिर्फ मंत्रियों का विस्तार है? जी नहीं! आज बिहार की राजनीति में निशांत का उदय हुआ है। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार ने पहली बार मंत्री पद की शपथ लेकर सबको चौंका दिया है। तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों के बेटे, केंद्रीय मंत्रियों की संतानें और जातीय समीकरणों का ऐसा कॉकटेल तैयार किया गया है, जिसे देख विपक्ष के पसीने छूट रहे हैं। आज हम आपको दिखाएंगे कि सम्राट की इस नई सेना में किसे मिली जगह, किसका कटा पत्ता और कैसे आरजेडी ने इस भव्य समारोह पर तीखा हमला बोला है।

आपको बता दें आज गुरुवार का दिन पटना के लिए ऐतिहासिक रहा। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन ने जब एक-एक कर 32 चेहरों को मंत्री पद की शपथ दिलाई, तो पूरा मैदान तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और जेडीयू अध्यक्ष नीतीश कुमार की एक साथ मौजूदगी ने एनडीए की एकजुटता का बड़ा संदेश दिया। इस कैबिनेट विस्तार में एनडीए के पांचों पांडवों यानी बीजेपी, जेडीयू, एलजेपीआरवी, हम और आरएलएम को बराबर का सम्मान मिला है। क्षेत्रीय और जातीय संतुलन साधने के लिए अनुभवी चेहरों के साथ-साथ युवाओं की भी फौज खड़ी की गई है। इस नई कैबिनेट की सबसे खास बात यह रही कि इसमें सियासी विरासत को नया आयाम दिया गया है।

नीतीश कुमार के बेटे निशांत की एंट्री सबसे बड़ा सरप्राइज रही। पहली बार वे सक्रिय राजनीति में मंत्री के रूप में सामने आए हैं। पूर्व सीएम जीतनराम मांझी के बेटे डॉ. संतोष कुमार सुमन ने फिर से मंत्री पद की शपथ ली। पूर्व सीएम जगन्नाथ मिश्रा के बेटे नीतीश मिश्रा ने बीजेपी कोटे से अपनी जगह पक्की की। पूर्व केंद्रीय मंत्री दिवंगत दिग्विजय सिंह की बेटी और अर्जुन पुरस्कार विजेता श्रेयसी सिंह ने भी मंत्री बनकर नई पारी शुरू की। आरएलएम प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश को भी इस विराट मंत्रिमंडल में स्थान मिला है।

वहीं इसके अलावा सम्राट चौधरी ने अपनी टीम में पुराने वफादारों पर भरोसा जताया है। जेडीयू से श्रवण कुमार, अशोक चौधरी, लेसी सिंह, मदन सहनी, और शीला कुमारी जैसे नाम फिर से पावर में लौटे हैं। वहीं बीजेपी की तरफ से रामकृपाल यादव, नीतीश मिश्रा, दिलीप जायसवाल और श्रेयसी सिंह जैसे चेहरों ने कमान संभाली है। दलित और पिछड़ों को साधने के लिए रत्नेश सदा, लखेंद्र कुमार रौशन और भगवान सिंह कुशवाहा को भी कैबिनेट में जगह दी गई है। अल्पसंख्यकों की बात करें तो मोहम्मद जमा खान ने भी मंत्री पद की शपथ ली।

वहीं आपको बता दें जहाँ गांधी मैदान में जश्न था, वहीं लालू यादव की पार्टी RJD ने इसे राजतंत्र करार दिया। विपक्षी दल ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए लिखा कि..."पूरे पटना शहर को बंद कर दिया गया है। जो 5 साल जनता को चूसकर अपना घर भरेंगे, वो भ्रष्ट महाराज शपथ ले रहे हैं और बेचारी प्रजा सड़कों पर रेंग रही है।" 

विपक्ष ने इस सरकार को कामचोर और नाकारा बताते हुए सीधा निशाना साधा। खैर ये थी बिहार की वो नई टीम, जिसके कंधों पर अब विकास की जिम्मेदारी है। शपथ तो हो गई, चेहरे भी साफ हो गए, लेकिन असली पिक्चर अभी बाकी है। विभागों का बंटवारा होना है। आज देर रात या कल सुबह तक ये साफ हो जाएगा कि सम्राट चौधरी अपनी टीम में किसे गृह विभाग देंगे, किसे वित्त और किसे मिलेगी शिक्षा की कमान। वहीं सवाल ये भी है कि क्या नीतीश कुमार के बेटे निशांत को कोई भारी-भरकम विभाग मिलेगा? क्या पुराने दिग्गज अपना रसूख बचा पाएंगे? फिलहाल ये तो नाम सामने आने के बाद ही पता चलेगा। 

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