नीतीश कुमार का नया राजनीतिक खेल: ‘लव-कुश’ स्ट्रेटेजी बिहार में उत्तराधिकारी की दौड़: क्या सम्राट ही होंगे अगले मुख्यमंत्री?
बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, इस सवाल ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा रखी है। इस बीच, वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी ने सोशल मीडिया पर अपनी राय व्यक्त की है और पुराने राजनीतिक घटनाक्रमों को नए संदर्भ में जोड़ते हुए स्थिति का विश्लेषण किया है।
नीतीश कुमार का राज्यसभा प्रवेश और उत्तराधिकारी की चर्चा
नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की संभावना लगभग तय मानी जा रही है। इसी के साथ यह सवाल उठ रहा है कि उनका उत्तराधिकारी कौन होगा। राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि अगले मुख्यमंत्री की कुर्सी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के हाथ में होगी।भाजपा ने पिछली उप-मुख्यमंत्री व्यवस्था में बदलाव किया है और पूर्व दो उपमुख्यमंत्रियों की जगह सम्राट चौधरी को एकमात्र उपमुख्यमंत्री बनाया है। इसके अलावा, सम्राट का गृहमंत्री होना भी उनके पक्ष को मजबूत करता है। कईयों का मानना है कि यह सब नीतीश कुमार की योजना के अनुसार ही हो रहा है।
समता पार्टी और लव-कुश का समीकरण
इस राजनीतिक परिदृश्य की समझ के लिए अतीत को देखना जरूरी है। जब लालू प्रसाद यादव के साथ गठबंधन संभव नहीं रहा, तब नीतीश कुमार ने समता पार्टी की स्थापना की। यह पार्टी 1994 में गांधी मैदान में घोषित हुई थी, और इसका उद्देश्य ‘लव-कुश’ समीकरण था – यानी कुर्मी, कुशवाहा और अन्य अति-पिछड़े समुदायों का राजनीतिक गठबंधन।उस समय लालू यादव का समर्थन पिछड़े और मुस्लिम समुदायों में बहुत मजबूत था। लेकिन धीरे-धीरे, पिछड़ों का लालू से मोह कम होने लगा। समता पार्टी ने उन्हें एक नया विकल्प प्रदान किया। उस रैली में शकुनि चौधरी भी शामिल हुए, और लालू यादव के खिलाफ उनके तीखे भाषणों ने कुशवाहा समुदाय को समता पार्टी की ओर आकर्षित किया।आज भी यह लव-कुश समीकरण बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार के नेतृत्व के साथ जिंदा है।

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