चुनावी रण में लालू परिवार की दरार! तेजस्वी और तेज प्रताप आमने-सामने
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की सरगर्मियां तेज़ी पकड़ चुकी हैं और सियासी मैदान में अब एक से बढ़कर एक दिग्गज अपने पत्ते खोलने लगे हैं। जनता दल यूनाइटेड ने अपनी पूरी 101 सीटों की उम्मीदवारों की सूची घोषित कर दी है, वहीं भाजपा और महागठबंधन के नेता भी अपनी-अपनी तैयारियों में जुटे हुए हैं। क्या इस चुनाव में फिर से वही पुरानी राजनैतिक लड़ाइयां होंगी, या फिर नया राजनीतिक समीकरण देखने को मिलेगा? तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव के बीच की टक्कर किस दिशा में जाएगी? क्या महुआ विधानसभा सीट पर सियासी भूचाल आएगा? आइए, जानते हैं इस चुनाव की पूरी कहानी...
आपको बता दें नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल ने आज गुरुवार को अपनी दूसरी सूची जारी की, जिसमें 44 उम्मीदवारों के नाम शामिल हैं। इस सूची में 9 महिलाएं और 4 मुस्लिम उम्मीदवार भी शामिल हैं, जो जेडीयू की अल्पसंख्यकों को साधने की रणनीति को दर्शाता है। इसके साथ ही जेडीयू ने अपनी सभी 101 सीटों पर प्रत्याशियों के नाम का ऐलान कर दिया है। खास बात ये है कि जेडीयू ने बाहुबली आनंद मोहन के बेटे चेतन आनंद को नबीनगर से मैदान में उतारा है, जबकि गोपाल मंडल का टिकट काटकर उनकी जगह बुलो मंडल को मौका दिया गया है।
जेडीयू ने इस बार सामाजिक समीकरणों को बड़ी बारीकी से साधा है। कुल उम्मीदवारों में 37 ओबीसी, 22 ईबीसी, 22 सामान्य, 15 एससी, एक एसटी और 4 मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिया गया है। इसके साथ ही महिलाओं को भी कुल 13 टिकट दिए गए हैं, जो पहली सूची की तुलना में संतुलन बनाता है। पहली लिस्ट में जहां लव कुश समाज को ज्यादा प्राथमिकता मिली थी, तो वहीं दूसरी सूची में पिछड़े वर्ग को बड़ा स्थान दिया गया है। बता दें...
बीजेपी और जेडीयू को 101-101 सीटें मिली हैं
लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) को 29 सीटें
राष्ट्रीय लोक मोर्चा और हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा को 6-6 सीटें मिली हैं।
वहीं दूसरी तरफ भाजपा ने अपनी तीसरी सूची में 18 प्रत्याशियों के नाम घोषित कर दिए हैं, जिसमें राघोपुर से सतीश यादव को टिकट मिला है, जो सीधे नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को चुनौती देंगे। अब बात करते हैं महागठबंधन की, जहां सीट बंटवारे को लेकर जारी खींचतान साफ नजर आ रही है। कांग्रेस ने बिना अंतिम सहमति के 17 उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है, जबकि आरजेडी ने अभी तक पूरी सूची घोषित नहीं की है। तेजस्वी यादव ने अपनी परंपरागत सीट राघोपुर से नामांकन दाखिल कर दिया है, लेकिन उनकी सबसे बड़ी चुनौती है उनके बड़े भाई तेज प्रताप यादव हैं, जो अब खुले तौर पर उनकी ताकत के खिलाफ खड़े हो गए हैं। जी हां तेज प्रताप यादव ने महुआ विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है, जो आरजेडी के लिए बड़ी चिंता का विषय है। महुआ सीट पर पहले से आरजेडी के विधायक मुकेश रौशन हैं, इसलिए यहां जोरदार टकराव की पूरी संभावना है। तेज प्रताप की यह चाल सीधे तौर पर तेजस्वी यादव के राजनीतिक दाव-पेंच को चुनौती देती है। वहीं तेज प्रताप यादव का कहना है कि अगर तेजस्वी दो सीटों से लड़ेंगे, तो वह भी राघोपुर से चुनाव लड़ेंगे। ये सब राजनीतिक खेल बिहार चुनाव को और भी दिलचस्प बना रहे हैं। लालू परिवार की राजनीति में अब दो भाइयों की यह टक्कर एक नई कहानी लिख रही है। ऐसे में सवाल है कि क्या जेडीयू की यह रणनीति इस बार उन्हें विधानसभा में बहुमत दिला पाएगी, या फिर जनता का मूड बदल चुका है? तेजस्वी यादव के सामने बीजेपी की चुनौती बड़ी है, लेकिन क्या तेज प्रताप यादव की वापसी महागठबंधन को कमजोर करेगी या उसे और मजबूती देगी?
आखिर लालू परिवार के इस राजनीतिक ड्रामे में क्या निर्णायक होगा? क्या परिवार के रिश्ते राजनीति से ऊपर रह पाएंगे?
जाहिर है बिहार के इस चुनावी महायुद्ध में हर कदम पर रणनीति, चाल और परिवार के रिश्ते एक साथ नज़र आ रहे हैं। जेडीयू ने अपने उम्मीदवारों के चयन में सामाजिक संतुलन साधा है, बीजेपी ने अपनी पूरी ताकत के साथ मुकाबला तय किया है, और महागठबंधन के अंदरूनी मतभेद भी खुलकर सामने आ रहे हैं। तेजस्वी और तेज प्रताप की लड़ाई बिहार की राजनीति को एक नया आयाम देने वाली है। क्या इस बार बिहार का ताज किसी नए चेहरे के सिर सजेगा, या परंपरागत राजनैतिक गठजोड़ बरकरार रहेंगे? चुनाव की आंधी में सियासी पत्ते कैसे बंटेंगे, ये तो वोटिंग के दिन ही तय होगा। तो बने रहें इस चुनावी रेस के साथ, क्योंकि बिहार 2025 में राजनीति का असली रंग अभी बाकी है!
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