बिहार चुनाव 2025: तेजस्वी यादव ने जारी किया ‘प्रण पत्र’, 25 नए बड़े वादे
20 साल की सरकार, 20 वादों की नाकामी...और अब 'तेजस्वी प्रण पत्र' में 25 नए वादों की बारिश! जी हां बिहार में चुनावी बिगुल बज चुका है और मैदान में उतरे तेजस्वी यादव लेकर आए हैं अपना नया वादा ‘तेजस्वी प्रण पत्र’! हर घर नौकरी, महिलाओं को 2500 महीना, किसानों के लिए MSP की गारंटी और बिजली 200 यूनिट तक फ्री! सुनने में सब कुछ शानदार लग रहा है, लेकिन सवाल ये है कि क्या ये वादे वाकई पूरे होंगे या फिर हर बार की तरह सिर्फ़ चुनावी जुमले साबित होंगे? और क्या सच में तेजस्वी का ये ‘न्यायपूर्ण नया बिहार’ पुराने नारे से कुछ अलग है या बस चेहरे का पोस्टर बदला है? आइए जानते हैं...
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से ठीक पहले विपक्षी महागठबंधन ने बीते दिन मंगलवार को अपना घोषणापत्र जारी किया, जिसका नाम रखा गया है ‘तेजस्वी प्रण पत्र’, और दावा किया गया है कि ये सिर्फ चुनावी दस्तावेज नहीं बल्कि न्यायपूर्ण और समृद्ध बिहार के निर्माण का संकल्प है। घोषणापत्र के कवर पर तेजस्वी यादव की तस्वीर और लाइन लिखी है न्यायपूर्ण नए बिहार के लिए संकल्प पत्र 2025। इस बार महागठबंधन ने 2020 के 10 लाख नौकरी वाले वादे से आगे बढ़ते हुए कहा है कि हर परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाएगी। सरकार बनने के 20 दिनों के भीतर कानून, और 20 महीनों में भर्ती प्रक्रिया शुरू करने का वादा है। सवाल ये कि जब बिहार में बेरोजगारी दर देश में सबसे ऊपर है, तो क्या ये वादा हकीकत की ज़मीन पर उतरेगा? वहीं महागठबंधन ने किसानों के लिए सभी फसलों की MSP पर खरीद की गारंटी, APMC की वापसी, और मखाना प्रसंस्करण उद्योग लगाने का ऐलान किया है। इसके साथ ही फसल बीमा और किसान बीमा योजना लागू करने की बात कही गई है। ऐसे में अब देखना होगा कि ये बीमा किसानों को राहत देगा या फिर पुराने वादों की तरह कागज़ पर ही रह जाएगा। वहीं दूसरी तरफ घोषणापत्र में कहा गया है कि हर जिले में तकनीकी संस्थान और स्किल डेवलपमेंट सेंटर खोले जाएंगे। 8वीं से 12वीं तक के गरीब छात्रों को टैबलेट और कॉलेज-रहित प्रखंडों में नए डिग्री कॉलेज की घोषणा की गई है। साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं के फॉर्म शुल्क खत्म, परीक्षा केंद्र तक मुफ्त यात्रा, और पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई का वादा किया गया है। यानी इस बार बेरोजगारी के दर्द पर डिजिटल मलहम लगाने की कोशिश है। बता दें महागठबंधन ने महिलाओं को 2,500 प्रतिमाह देने का वादा किया है। साथ ही कहा गया है कि मातृत्व अवकाश, पीरियड लीव, और मुफ्त बस यात्रा सुनिश्चित की जाएगी। राज्य की सभी जीविका दीदियों को सरकारी दर्जा और 30,000 वेतन देने का ऐलान भी किया गया है। और तो और, ताड़ी से प्रतिबंध हटाने और शराबबंदी कानून की समीक्षा की बात भी घोषणापत्र में शामिल है।
महागठबंधन ने कहा है कि आईटी पार्क, डेयरी, पर्यटन, ग्रीन एनर्जी, और हेल्थ सेक्टर में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन होगा। राज्य में 2000 एकड़ में एजुकेशनल सिटी और 5 नए एक्सप्रेसवे बनाने की योजना है। MSME को बढ़ावा, ब्याज-मुक्त ऋण, और माइक्रोफाइनेंस कंपनियों पर नियंत्रण कानून लाने की भी घोषणा की गई है। साथ ही स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा को भी ध्यान में रखते हुए हर नागरिक के लिए 25 लाख तक का मुफ्त स्वास्थ्य बीमा, वृद्ध और विधवा के लिए 1,500 पेंशन, दिव्यांगों के लिए 3,000 मासिक सहायता, और हर साल 200 की वृद्धि का वादा किया गया है। इस बार हर परिवार को 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली, गरीब परिवारों को 500 में गैस सिलेंडर, यानी आम घरों की जेब को राहत देने की कोशिश है।
वहीं महागठबंधन का घोषणापत्र आने के बाद जेडीयू ने तीखा हमला बोला। जेडीयू ने कहा कि तेजस्वी अब पार्टी और परिवार दोनों में 'मैं एक हूँ' की स्थिति में हैं। लालू यादव के नाम पर राजनीति करने वाले तेजस्वी के पोस्टरों में अब लालू की तस्वीर माइक्रोस्कोप से ढूंढनी पड़ेगी। यानी हमला घोषणापत्र पर कम, और तेजस्वी के ‘एकल नेतृत्व’ पर ज़्यादा रहा।
तो कुल मिलाकर देखा जाए तो ‘तेजस्वी प्रण पत्र’ में वादे बहुत हैं, लेकिन दिशा वही पुरानी, रोजगार से लेकर महिला सम्मान तक, हर वर्ग को साधने की कोशिश की गई है। नाम बदला, नारा बदला, पैकेज चमकाया गया, लेकिन सवाल वही है कि क्या बिहार का युवा अब भी वादों पर भरोसा करेगा या इस बार हिसाब मांगेगा? बिहार के वोटर ने भी ठान लिया है कि अब वादों पर नहीं, काम पर वोट मिलेगा! 2025 का रण शुरू है, अब देखना ये है कि तेजस्वी का ‘प्रण पत्र’ सत्ता की चाबी बनता है या बस एक और चुनावी कसम साबित होता है!

No Previous Comments found.