प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह की रैलियां, महागठबंधन का पलटवार

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का पहला चरण अब बस कुछ ही दिन दूर है और सियासी तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। हर तरफ रैलियों, आरोप-प्रत्यारोप और जनता को मनाने की होड़ मची हुई है। क्या इस बार जनता के फैसले में बदलाव आएगा, या वही पुरानी राजनीति का सिलसिला जारी रहेगा? चलिए आपको बताते हैं चुनावी मैदान की ताज़ा हलचल।

आपको बता दें आज सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुजफ्फरपुर के मोतीपुर में जनसभा को संबोधित किया। रैली में बड़ी संख्या में महिलाएं और युवा शामिल हुए। महिलाओं ने बच्चों के साथ पहुंचकर अपनी समस्याएं साझा करने का अवसर पाया। मोदी ने कहा कि बिहार की जनता के लिए एनडीए सरकार ने विकास और सांस्कृतिक गौरव को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। प्रधानमंत्री ने छठ महापर्व को मानवता का महापर्व बताते हुए कहा कि इसे विश्व विरासत सूची में शामिल कराने के प्रयास लगातार जारी हैं। साथ ही, उन्होंने आरजेडी और कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि ये दल केवल कट्टा, क्रूरता, कुशासन, करप्शन के सहारे शासन करते हैं। मोदी ने छठी मईया के अपमान पर सवाल उठाया और जनता से पूछा कि क्या बिहार ऐसी बेशर्मी को सहन करेगा? 

वहीं केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने भी पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राष्ट्रीय एकता दिवस पर कांग्रेस पर निशाना साधा। शाह ने कहा कि सरदार पटेल के योगदान को कांग्रेस ने नजरअंदाज किया। 41 साल तक भारत रत्न देने में देरी और पटेल की समाधि या स्मारक न बनाना इस बात का सबूत है कि कांग्रेस का उनके प्रति सम्मान हमेशा कम रहा। 

बता दें अमित शाह ने चार बड़ी रैलियों को संबोधित किया। लखीसराय में पहली रैली में डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा, तारापुर में दूसरी में डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी, हिलसा में तीसरी और पालीगंज में अंतिम रैली हुई। अमित शाह ने बिहार में एकता और विकास पर जोर दिया और विपक्ष पर आरोप लगाया कि वे राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक गौरव की अनदेखी करते हैं। वहीं आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने अमित शाह के बयान पर पलटवार किया। तेजस्वी ने कहा कि बिहार में उद्योग और रोज़गार की कमी साफ करती है कि बीजेपी और एनडीए का उद्देश्य केवल सत्ता में बने रहना है, विकास लाना नहीं। तेजस्वी ने कहा कि बिहार की जनता अब बदलाव चाहती है और यह चुनाव सिर्फ सत्ता का नहीं, बल्कि राज्य के भविष्य का है।

वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने नालंदा और बरबीघा में महागठबंधन की जनसभाओं को संबोधित किया। प्रियंका गांधी और शशि थरूर भी चुनाव प्रचार में सक्रिय रहे। राहुल गांधी का संदेश युवा और आम जनता को जोड़कर महागठबंधन की ताकत दिखाने का रहा।

वहीं इन दिनों बिहार में सिर्फ यही सवाल गूंज रहे हैं कि क्या इस बार बिहार की जनता मोदी और शाह की विकास और सांस्कृतिक गौरव वाली रैलियों को स्वीकार करेगी, या तेजस्वी और राहुल के बदलाव और रोजगार के संदेश पर ध्यान देगी? क्या एनडीए का डबल इंजन सचमुच बिहार को नई ऊँचाइयों तक ले जाएगा, या महागठबंधन का संदेश जनता में गूंजेगा? जाहिर है बिहार का चुनावी रण अब तैयार है। एक तरफ प्रधानमंत्री और गृहमंत्री की जनसभाओं में सांस्कृतिक गौरव और विकास का जोर, दूसरी तरफ तेजस्वी और राहुल का बदलाव और रोज़गार का एजेंडा। चुनाव नजदीक है और अब बिहार की जनता तय करेगी कि राज्य किस दिशा में जाएगा...विकास की ओर या फिर पुरानी राजनीति की ओर। 

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