छोटेलाल से रितु जायसवाल तक: आरजेडी की बागी लिस्ट में शामिल बड़े नाम
बिहार चुनाव 2025 में बागियों का बवाल तेज़ हो गया है! अब आरजेडी ने भी साफ कर दिया कि पार्टी लाइन तोड़ने वालों के लिए कोई जगह नहीं। जी हां आरजेडी ने 27 नेताओं को पार्टी से बाहर कर दिया है, 6 साल के लिए निष्कासित। ऐसे में सवाल ये है कि क्या यह कार्रवाई चुनाव से पहले अनुशासन वापस लाएगी या और नाराज़गी बढ़ा देगी? चलिए, जानते हैं इस बागी बवाल की पूरी कहानी...
बिहार विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नज़दीक आ रहा है, वैसे-वैसे सियासी दलों के अंदर बगावत की दरारें गहरी होती जा रही हैं। बीजेपी और जेडीयू के बाद अब राष्ट्रीय जनता दल ने भी सर्जिकल स्ट्राइक कर दी है। जी हां बीजेपी से शुरू हुई बागी बवाल की लपटें अब विपक्ष के खेमे में भी पहुंच चुकी हैं। अब आरजेडी ने दिखा दिया है कि पार्टी लाइन से हटने वालों के लिए कोई जगह नहीं! बता दें बीते दिन सोमवार, 27 अक्टूबर को आरजेडी ने 27 नेताओं को पार्टी से 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया। कारण था पार्टी विरोधी गतिविधियां और निर्दलीय प्रत्याशियों का समर्थन। आरजेडी की तरफ से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि ये सभी नेता पार्टी के अधिकृत उम्मीदवारों के खिलाफ चुनावी अभियान चला रहे थे। कुछ ने खुद निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन किया है। ऐसे में पार्टी के हित में सख़्त कार्रवाई ज़रूरी थी। वहीं इस बागी लिस्ट में कौन-कौन से नेता शामिल हैं, ये भी जान लीजिए...बता दें पार्टी की कार्रवाई की चपेट में कई दिग्गज और मौजूदा विधायक भी आए हैं...जिसमें
छोटेलाल राय, विधायक, परसा
रितु जायसवाल, महिला मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष, सीतामढ़ी से निर्दलीय
मोहम्मद कामरान, विधायक, नवादा से निर्दलीय
रामप्रकाश महतो, अनिल साहनी, सरोज यादव, अनिल यादव
और 20 से ज़्यादा पूर्व विधायक और वरिष्ठ नेता।
आपको बता दें सीतामढ़ी की परिहार सीट से आरजेडी की प्रदेश महिला मोर्चा अध्यक्ष रितु जायसवाल निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में हैं, जबकि इसी सीट पर पार्टी ने स्मिता पूर्वे, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रामचंद्र पूर्वे की बहू को टिकट दिया है।
वहीं नवादा की गोविंदपुर सीट पर मौजूदा विधायक मोहम्मद कामरान को टिकट नहीं मिला, तो उन्होंने पार्टी से बगावत कर निर्दलीय पर्चा भर दिया। वहीं सारण की परसा सीट से विधायक छोटेलाल राय अब जेडीयू के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं,
जबकि आरजेडी ने वहां तेज प्रताप यादव की साली डॉ. करिश्मा राय को मैदान में उतारा है।
बता दें इसी दिन जेडीयू ने भी पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में 11 नेताओं को निष्कासित कर दिया। इनमें एक पूर्व मंत्री भी शामिल हैं। जेडीयू की प्रदेश इकाई ने बयान जारी कर कहा कि पार्टी की विचारधारा की अवहेलना और अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इससे पहले बीजेपी भी अपने बागियों के खिलाफ एक्शन ले चुकी है। यानि अब बिहार की सियासत में घर के अंदर की लड़ाई भी चुनाव फाइट का बड़ा मुद्दा बन गई है। अब हर दल में एक ही टेंशन है कि कौन अपना है, और कौन अंदर से विपक्ष का साथ दे रहा है!
जाहिर है बिहार का चुनावी रण अब सिर्फ दलों के बीच नहीं, दल के अंदर भी लड़ा जा रहा है! बीजेपी हो, जेडीयू हो या आरजेडी...हर तरफ एक ही गूंज है कि बागियों के लिए दरवाज़ा बंद! लेकिन बड़ा सवाल ये है कि क्या बागियों पर ये कार्रवाई चुनाव से पहले अनुशासन वापस ला पाएगी, या फिर ये बागी नेता ही नतीजों के दिन किंगमेकर साबित होंगे?
बिहार की राजनीति में इस वक्त सिर्फ एक ही लाइन गूंज रही है कि जिसने पार्टी छोड़ी, उसने सियासत में आग लगा दी!

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