बिहार विधान परिषद चुनाव की तारीखों का एलान, नीतीश की सीट पर भी घमासान!
अब बात करेंगे बिहार की उस सियासी खबर की, जिसने पटना के वीरचंद पटेल पथ से लेकर दिल्ली के राजनीतिक गलियारों तक हलचल तेज कर दी है! बिहार की राजनीति में एक बार फिर से शह और मात का खेल शुरू होने वाला है, क्योंकि देश के सबसे पावरफुल इलेक्शन कमीशन यानी चुनाव आयोग ने बिहार विधान परिषद की खाली हो रही सीटों पर चुनाव की तारीखों का ऐसा धमाकेदार ऐलान कर दिया है, जिसने सभी राजनीतिक दलों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। यह कोई आम चुनाव नहीं है; यह विधायकों के वोट से तय होने वाला वो हाई-प्रोफाइल मुकाबला है जहां रसूखदार नेताओं की किस्मत दांव पर लगी है।
सबसे बड़ी बात यह है कि इस चुनावी महा-दंगल में नीतीश कुमार की खाली हुई सीट पर भी उपचुनाव होने जा रहा है, और चिराग पासवान से लेकर जीतन राम मांझी तक अपनी गोटियां सेट करने में जुट गए हैं! दरअसल, बिहार विधान परिषद के 9 सदस्यों का मौजूदा कार्यकाल आगामी 28 जून को समाप्त होने जा रहा है। चूंकि ये सभी सीटें विधायक कोटे की हैं, इसलिए इस बार जनता नहीं बल्कि बिहार विधानसभा के विधायक वोट डालकर नए चेहरों को उच्च सदन भेजेंगे। चुनाव आयोग ने साफ कर दिया है कि 20 जून से पहले हर हाल में चुनाव की पूरी प्रक्रिया को संपन्न करा लिया जाएगा। वहीं इस चुनावी महा-दंगल का पूरा कार्यक्रम आ चुका है, जिसके तहत:
चुनावी अधिसूचना: 1 जून
नामांकन की शुरुआत और आखिरी तारीख: 1 जून से 8 जून के बीच
नामांकन पत्रों की जांच: 9 जून
नाम वापसी की अंतिम तारीख: 11 जून
महा-मतदान: 18 जून, सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक
नतीजे और काउंटिंग: 18 जून, शाम 5 बजे के बाद तुरंत परिणाम
वहीं इस पूरे चुनाव का सबसे बड़ा ट्विस्ट ये है कि आयोग सिर्फ 9 सीटों पर ही नहीं, बल्कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे से खाली हुई सीट पर भी उपचुनाव कराने जा रहा है! दरअसल, जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने हाल ही में राज्यसभा के लिए चुने जाने के बाद अपनी विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद यह सीट खाली हो गई थी। यानी अब कुल मिलाकर 10 सीटों पर राजनीतिक बिसात बिछने जा रही है। इसके अलावा दो और ऐसी सीटें इस लिस्ट में शामिल हैं जो पिछले साल ही खाली हो चुकी थीं। दरअसल, बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पिछले चुनावों में विधायक बनने के बाद विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था, उनकी खाली सीट पर भी इस बार वोटिंग होगी।
वहीं जेडीयू के टिकट पर आकर बिहार सरकार में मंत्री बने भगवान सिंह कुशवाहा ने भी पिछले साल परिषद से इस्तीफा दे दिया था, उनकी सीट को भरने के लिए भी इसी प्रक्रिया के तहत मतदान होगा। ऐसे में इस बार जिन दिग्गजों का कार्यकाल खत्म हो रहा है, उनमें बिहार की राजनीति के कई भारी-भरकम चेहरे शामिल हैं। जब ये अपनी कुर्सी छोड़ेंगे, तो इनकी जगह नए चेहरों को फिट करने के लिए पार्टियों के भीतर माथा-पच्ची शुरू हो चुकी है। वहीं 18 जून को जब विधानसभा के भीतर वोट डाले जाएंगे और उसी शाम जब नतीजे आएंगे, तब यह साफ हो जाएगा कि बिहार की राजनीति में किस नेता का रसूख बढ़ा और किसका पत्ता साफ हुआ!

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