2 सांसदों से 18 करोड़ सदस्यों तक: कैसे बनी भाजपा दुनिया की सबसे बड़ी सियासी ताकत?

6 अप्रैल 1980 को दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान से जिस 'कमल' ने अपनी यात्रा शुरू की थी, आज वो दुनिया के सबसे बड़े राजनीतिक वटवृक्ष के रूप में सीना ताने खड़ा है। जी हां आज भाजपा अपना 47वां स्थापना दिवस मना रही है और यह दिन सिर्फ एक पार्टी का जन्मदिन नहीं, बल्कि भारतीय राजनीति के उस 'अजेय रथ' का उत्सव है जिसने शून्य से शिखर तक का सफर तय किया है। कभी संसद में महज 2 सीटों पर सिमटने वाली पार्टी आज 18 करोड़ सदस्यों के साथ चीन की कम्युनिस्ट पार्टी को पछाड़कर दुनिया की 'नंबर वन' सियासी ताकत बन चुकी है।

दरअसल, भारतीय जनता पार्टी की कहानी किसी करिश्मे से कम नहीं है। 1984 के लोकसभा चुनाव में जब सहानुभूति की लहर थी, तब भाजपा के पास केवल 2 सांसद थे...गुजरात के एके पटेल और आंध्र प्रदेश के जंगा रेड्डी। लेकिन 'नेशन फर्स्ट, पार्टी नेक्स्ट, सेल्फ लास्ट' के मंत्र ने ऐसी जान फूंकी कि आज 21 राज्यों में भाजपा या उसके गठबंधन यानि NDA का भगवा परचम लहरा रहा है। गुजरात में 31 साल का अटूट शासन हो या हरियाणा में हैट्रिक का रिकॉर्ड, भाजपा ने हर उस मिथक को तोड़ दिया है जिसे राजनीति के पंडित असंभव कहते थे।

आपको बता दें भाजपा सिर्फ सदस्यों के मामले में ही नहीं, बल्कि संसाधनों के मामले में भी देश की सबसे अमीर पार्टी है। जी हां ADR की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2024-25 में पार्टी की आय 6,769 करोड़ रुपये रही। यह पैसा और संगठन की मशीनरी ही है जिसके दम पर आज भाजपा केरल से लेकर बंगाल और तेलंगाना तक अपनी जड़ें जमाने के लिए जी-जान से जुटी है। भले ही इन राज्यों में अभी पूर्ण बहुमत की सरकार न हो, लेकिन भाजपा का वोट बैंक वहां के स्थापित किलों को हिला रहा है। जाहिर है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न केवल भाजपा को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया, बल्कि उन्होंने इतिहास के पन्नों में अपना नाम स्वर्णाक्षरों में दर्ज करा लिया है। गुजरात के मुख्यमंत्री और भारत के प्रधानमंत्री के तौर पर उनके कार्यकाल को मिला दें, तो उन्होंने सिक्किम के पवन चामलिंग का 8930 दिनों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। वह अब भारत के सबसे लंबे समय तक सरकार के प्रमुख रहने वाले नेता बन चुके हैं। अटल बिहारी वाजपेयी जी ने जहां 5 साल का कार्यकाल पूरा करने वाले पहले गैर-कांग्रेसी पीएम का गौरव हासिल किया था, वहीं पीएम मोदी भाजपा को लगातार तीसरी बार केंद्र की सत्ता दिलाकर नया कीर्तिमान रच रहे हैं।

आपको बता दें भाजपा की जड़ें 1951 के 'भारतीय जनसंघ' और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान में छिपी हैं। 1977 में आपातकाल के बाद जनसंघ का विलय 'जनता पार्टी' में हुआ, लेकिन दोहरी सदस्यता के विवाद ने 6 अप्रैल 1980 को एक नई पार्टी BJP को जन्म दिया। दिलचस्प बात यह है कि शुरुआत में भाजपा ने 'गांधीवादी समाजवाद' को अपनाया था, लेकिन 1985 के बाद 'एकात्म मानववाद' और हिंदुत्व पार्टी की मुख्य पहचान बन गए। राम मंदिर से लेकर अनुच्छेद 370 तक, पार्टी ने अपने हर बड़े वैचारिक वादे को हकीकत में बदला है।

वहीं आज स्थापना दिवस के मौके पर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने कार्यकर्ताओं में नया जोश भरा है। पीएम मोदी ने कार्यकर्ताओं को 'भारत प्रथम' के सिद्धांत का सिपाही बताया और विकसित भारत के निर्माण का संकल्प दोहराया। 

वहीं अमित शाह ने कहा कि भाजपा ने सीमाओं की सुरक्षा से लेकर सांस्कृतिक पुनर्जागरण तक हर संकल्प को चरितार्थ किया है। उन्होंने एक वीडियो शेयर करते हुए भाजपा की उपलब्धियों को बताया.

वहीं योगी आदित्यनाथ ने इसे केवल सत्ता का सफर नहीं, बल्कि "अंत्योदय से राष्ट्रोदय" की एक जीवंत वैचारिक परंपरा करार दिया।

कुल मिलाकर देखा जाए तो आज भाजपा जिस मुकाम पर है, वहां से उसकी नजरें अब उन राज्यों पर हैं जहां अभी 'कमल' पूरी तरह नहीं खिला है। बंगाल में ममता बनर्जी को चुनौती देना हो, असम में हैट्रिक की तैयारी हो या तमिलनाडु में अपनी जमीन तलाशना, भाजपा का चुनावी मोड कभी ऑफ नहीं होता। 1857 की क्रांति के प्रतीक 'रोटी और कमल' से प्रेरणा लेकर शुरू हुई यह यात्रा आज आधुनिक भारत की सबसे बड़ी हकीकत बन चुकी है। 47 साल पहले जो पौधा लगाया गया था, वह आज एक ऐसा वटवृक्ष है जिसकी छाया कन्याकुमारी से कश्मीर तक महसूस की जा रही है। यह महज एक पार्टी का स्थापना दिवस नहीं, बल्कि भारतीय राजनीति के 'भगवा युग' के निरंतर विस्तार की घोषणा है!

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