ब्राह्मण-OBC-दलित-मुस्लिम समीकरण साधेगी BJP? नई टीम में 8 चेहरे

यूपी की सियासत में 2027 का चुनाव अभी करीब एक साल दूर है...लेकिन बीजेपी ने अभी से ऐसा दांव चला है, जिसने प्रदेश की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। बीजेपी ने पार्टी संगठन में बड़ा फेरबदल किया है...राष्ट्रीय टीम में नए चेहरों को जगह दी है...और सबसे खास बात ये कि उत्तर प्रदेश, पंजाब और गुजरात जैसे चुनावी राज्यों की कमान अनुभवी नेताओं के हाथों में सौंप दी गई है। उत्तर प्रदेश के लिए विनोद तावड़े को प्रभारी बनाया गया है...जगदीश ईश्वरभाई पटेल को सह-प्रभारी की जिम्मेदारी मिली है। पंजाब की कमान सतीश पूनिया को और गुजरात की जिम्मेदारी तरुण चुघ को दी गई है। लेकिन कहानी सिर्फ प्रभारियों की नियुक्ति तक सीमित नहीं है। बीजेपी की नई राष्ट्रीय टीम में यूपी से आठ चेहरों को जगह मिली है...और इन आठ नामों में ब्राह्मण, OBC, दलित, मुस्लिम और महिला प्रतिनिधित्व का पूरा सियासी गणित दिखाई दे रहा है। यानी सवाल सीधा है...क्या बीजेपी ने संगठन का नया चेहरा बनाया है या 2027 का चुनावी समीकरण भी साथ-साथ साधने की कोशिश की है? एक तरफ समाजवादी पार्टी का PDA...दूसरी तरफ बीजेपी का OBC और दलित आधार...सवर्ण वोट बैंक को संभालने की चुनौती...महिला वोटरों को साथ रखने की कोशिश...और मुस्लिम समाज तक पहुंच बढ़ाने की रणनीति। तो आखिर बीजेपी की नई टीम में यूपी के इन आठ चेहरों को जगह देने के पीछे क्या है पूरा खेल? आइए समझते हैं...

बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन की अगुवाई में घोषित नई टीम को पार्टी की पहली बड़ी राष्ट्रीय संगठनात्मक कवायद माना जा रहा है। इस टीम में कई नए चेहरों को जगह मिली है, वहीं अनुभवी नेताओं को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं। सबसे पहले अगर उत्तर प्रदेश की बात करें तो। बीजेपी ने महाराष्ट्र के वरिष्ठ नेता और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव एवं राज्यसभा सांसद विनोद तावड़े को उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया है। उनके साथ जगदीश ईश्वरभाई पटेल को सह-प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है। दरअसल, यूपी बीजेपी के लिए सबसे महत्वपूर्ण राज्यों में से एक है। यहां 2027 में विधानसभा चुनाव होना है और इसी वजह से संगठन की कमान ऐसे नेताओं को देना काफी अहम माना जा रहा है, जिनके पास चुनावी प्रबंधन और संगठन चलाने का लंबा अनुभव है। आपको बता दें विनोद तावड़े को बीजेपी के भीतर एक कुशल रणनीतिकार के तौर पर देखा जाता है। महाराष्ट्र की राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रहे तावड़े संगठन को जमीनी स्तर तक मजबूत करने और चुनावी मैनेजमेंट के लिए जाने जाते हैं। अब 2027 के यूपी चुनाव में उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती बीजेपी के मौजूदा संगठन को और मजबूत करना होगी। साथ ही कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखना...और अलग-अलग सामाजिक समूहों के बीच पार्टी की पकड़ बनाए रखना। वहीं उनके साथ सह-प्रभारी बनाए गए जगदीश ईश्वरभाई पटेल गुजरात के वरिष्ठ बीजेपी नेता हैं। वह राष्ट्रीय मंत्री हैं और संगठन में लंबे समय तक काम कर चुके हैं। गुजरात में शहरी और ग्रामीण स्तर पर बूथ संगठन को मजबूत करने का अनुभव उनके पास है। यानी यूपी में एक तरफ तावड़े का चुनावी रणनीति और संगठन का अनुभव...दूसरी तरफ पटेल का बूथ मैनेजमेंट और गुजरात मॉडल का अनुभव।

अब बात पंजाब की करें तो, बीजेपी ने सतीश पूनिया को पंजाब का प्रभारी बनाया है। पूनिया बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव और राज्यसभा सांसद हैं। राजस्थान बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और राजस्थान विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष रह चुके सतीश पूनिया को संगठन का मजबूत चेहरा माना जाता है। दरअसल, पंजाब में 2027 में विधानसभा चुनाव होना है। यहां आम आदमी पार्टी की सरकार है और बीजेपी के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपना संगठन मजबूत करना और चुनावी आधार को बढ़ाना है।
सतीश पूनिया छात्र राजनीति के दौरान एबीवीपी से जुड़े रहे और युवा मोर्चा के जरिए राजनीति में आगे बढ़े। ऐसे में संगठनात्मक अनुभव के आधार पर पार्टी ने उन्हें पंजाब की जिम्मेदारी दी है।

वहीं अब आते हैं गुजरात की तो, गुजरात बीजेपी का मजबूत गढ़ माना जाता है...लेकिन आगामी चुनाव को देखते हुए पार्टी यहां भी संगठन को मजबूत रखने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती। बीजेपी ने राज्यसभा सांसद और राष्ट्रीय महामंत्री तरुण चुघ को गुजरात का प्रभारी बनाया है। तरुण चुघ लंबे समय से पार्टी संगठन में अहम जिम्मेदारियां संभालते रहे हैं। वह राष्ट्रीय कार्यालय प्रभारी की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं और संगठन के भीतर उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। यानी यूपी...पंजाब और गुजरात तीनों राज्यों में बीजेपी ने अनुभवी नेताओं को आगे कर चुनावी तैयारी को तेज करने का संकेत दिया है। आपको बता दें बीजेपी की नई राष्ट्रीय टीम में उत्तर प्रदेश से 8 नेताओं को जगह मिली है। पिछली टीम में यूपी से सात चेहरे थे। इस बार संख्या बढ़कर आठ हो गई है। जिसमें 

स्मृति ईरानी
हरीश द्विवेदी
रेखा वर्मा
तारिक मंसूर
भोला सिंह
संगीता यादव
अमरपाल मौर्य
कुंवर बासित अली का नाम शामिल है। 

और इन नियुक्तियों को अगर सामाजिक नजरिए से देखें तो तस्वीर और दिलचस्प हो जाती है। जी हां ब्राह्मण चेहरा...OBC चेहरा...दलित चेहरा...मुस्लिम चेहरे...महिला चेहरे...यानी बीजेपी ने एक ही टीम के जरिए यूपी के कई सामाजिक समूहों को संदेश देने की कोशिश की है। दरअसल, ऐसा इसलिए है क्योंकि, अब यूपी में पार्टी नहीं चाहती कि किसी भी सामाजिक समूह में नाराजगी चुनाव से पहले बड़ा रूप ले। और यहीं से बीजेपी की नई टीम का अगला चेहरा सामने आता है। वहीं दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी का PDA मॉडल...यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समीकरण...बीजेपी के सामने बड़ी राजनीतिक चुनौती है। लेकिन असली परीक्षा पद मिलने के बाद शुरू होती है। क्योंकि चुनाव में सिर्फ चेहरा दिखाना काफी नहीं होता...चेहरे के पीछे संगठन चाहिए...जमीनी संपर्क चाहिए...और मतदाता का भरोसा चाहिए।

तो कुल मिलाकर बीजेपी ने 2027 के विधानसभा चुनाव से करीब एक साल पहले अपनी चुनावी मशीनरी को गति देने का संकेत दे दिया है। उत्तर प्रदेश, पंजाब और गुजरात जैसे राज्यों में अनुभवी नेताओं को जिम्मेदारी देना बताता है कि पार्टी अब चुनावी मोड में तेजी से आगे बढ़ रही है। और यूपी के लिए सबसे बड़ा संदेश ये है कि बीजेपी ने अपनी नई राष्ट्रीय टीम में सामाजिक समीकरणों को खुलकर जगह दी है। ब्राह्मण से लेकर OBC तक...दलित से लेकर मुस्लिम तक...महिलाओं से लेकर अनुभवी चुनावी चेहरों तक...बीजेपी ने एक ही टीम में कई सामाजिक और राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है। लेकिन 2027 का चुनाव अभी दूर है...और राजनीति में एक साल बहुत लंबा वक्त होता है। इस दौरान मुद्दे बदलेंगे...समीकरण बदलेंगे...गठबंधन बदल सकते हैं...नेताओं की भूमिका बदल सकती है...और जनता का मूड भी बदल सकता है। फिलहाल इतना तय है...2027 की जंग अभी शुरू नहीं हुई है...लेकिन बीजेपी ने चुनावी बिसात पर अपनी नई चाल जरूर चल दी है। अब देखना होगा...अगली चाल किसकी होती है...और यूपी की जनता 2027 में किसके सामाजिक समीकरण और किसके चुनावी वादों पर भरोसा करती है। 

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