UP में तिरंगा यात्रा के पीछे क्या है BJP का चुनावी मास्टरप्लान?

स्वतंत्रता दिवस करीब है...देश तिरंगे के रंग में रंगने लगा है...सड़कों पर तिरंगा दिखाई दे रहा है...हाथों में तिरंगा है...जुबान पर वंदे मातरम् है...और इसी माहौल के बीच उत्तर प्रदेश की सियासत में भी तिरंगे की एंट्री हो चुकी है। जी हां...बीजेपी पूरे उत्तर प्रदेश में तिरंगा यात्रा के जरिए राष्ट्रभक्ति का संदेश दे रही है...लेकिन सवाल ये है कि क्या ये सिर्फ देशभक्ति का अभियान है? या फिर इसके पीछे 2027 के विधानसभा चुनाव की भी कोई बड़ी तैयारी चल रही है? क्योंकि कहानी सिर्फ तिरंगा लेकर सड़क पर निकलने तक सीमित नहीं है...कहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद हजारों लोगों के साथ सड़क पर पैदल चल रहे हैं...कहीं विधायक और पार्टी के वरिष्ठ नेता तिरंगा यात्रा की अगुवाई कर रहे हैं...कहीं मंडल स्तर पर कार्यक्रम हो रहे हैं...तो कहीं बूथ स्तर तक तिरंगा पहुंचाने की तैयारी है। और अगर आप बीजेपी की तैयारियों को गौर से देखें...तो तस्वीर और दिलचस्प हो जाती है। जी हां गोरखपुर में 29 मंडलों में तिरंगा यात्रा...महानगर के 10 मंडलों और 80 वार्ड में कार्यक्रम...जिले के करीब 2800 बूथों पर तिरंगा फहराने का लक्ष्य...हर बूथ तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने की तैयारी...और 14 अगस्त तक घर-घर तिरंगा पहुंचाने का प्लान। ऐसे में सवाल है कि इतना बड़ा संगठनात्मक नेटवर्क सिर्फ 15 अगस्त मनाने के लिए क्यों सक्रिय किया जा रहा है? क्या बीजेपी तिरंगे के बहाने 2027 के चुनाव की जमीन नाप रही है?
और सबसे बड़ा सवाल...क्या तिरंगा यात्रा बीजेपी के लिए राष्ट्रभक्ति के साथ-साथ 2027 का चुनावी संपर्क अभियान भी बन रही है? देखिए हमारी ये खास रिपोर्ट...

उत्तर प्रदेश में बीजेपी के लिए तिरंगा यात्रा कोई नई चीज नहीं है। पार्टी साल 2022 से ही तिरंगा यात्रा निकालती आ रही है। लेकिन इस बार तस्वीर थोड़ी अलग है। क्योंकि इस बार सिर्फ स्वतंत्रता दिवस का उत्साह नहीं है...सामने 2027 का विधानसभा चुनाव भी है। और राजनीति में टाइमिंग बहुत मायने रखती है। बीजेपी अभी से संगठन को सड़क पर उतार रही है...कार्यकर्ताओं को सक्रिय कर रही है...मंडल और बूथ स्तर तक जिम्मेदारियां बांट रही है...और तिरंगे को लेकर पूरे प्रदेश में माहौल बनाया जा रहा है। गोरखपुर इसका बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद गोरखपुर में तिरंगा यात्रा की अगुवाई कर चुके हैं। उनके साथ बड़ी संख्या में युवा और आम नागरिक भी तिरंगा लेकर चलते दिखाई दिए। इस दौरान सांसद रवि किशन...मंत्री संजय निषाद...महापौर डॉ. मंगलेश कुमार श्रीवास्तव समेत तमाम जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। अब तस्वीर का दूसरा हिस्सा देखिए। आपको बता दें... 

बीजेपी ने गोरखपुर के 29 मंडलों और महानगर के 10 मंडलों में तिरंगा यात्रा की जिम्मेदारी बांट दी है।

जिले में 19 ब्लॉक और 9 विधानसभा क्षेत्रों तक संगठन को सक्रिय किया गया है।

महानगर के सभी 80 वार्डों में तिरंगा यात्रा निकालने की तैयारी है।

यानी यह सिर्फ एक शहर की यात्रा नहीं...बल्कि बूथ तक पहुंचने की कवायद है। दरअसल, जिले में करीब 2800 बूथों पर 50-50 तिरंगा फहराने का लक्ष्य रखा गया है। यानी सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं...हजारों कार्यकर्ताओं को एक साथ मैदान में उतारने की तैयारी है और यही वो जगह है जहां तिरंगा यात्रा का राजनीतिक महत्व सामने आता है। क्योंकि चुनाव से पहले किसी भी पार्टी के लिए सबसे बड़ी ताकत सिर्फ नेता नहीं होते...सबसे बड़ी ताकत होती है उसका बूथ संगठन। जिस पार्टी का कार्यकर्ता बूथ पर सक्रिय है...जो मोहल्ले तक पहुंच रहा है...जो लोगों के घर तक जा रहा है...जो स्थानीय मुद्दे सुन रहा है...चुनाव के समय वही संगठन ज्यादा प्रभावी दिखाई देता है। ऐसे में अब बीजेपी इसी नेटवर्क को तिरंगा यात्रा के जरिए सक्रिय कर रही है। वहीं अब बात करते हैं उस सबसे बड़े राजनीतिक फायदे की...जो बीजेपी को तिरंगा यात्रा से मिल सकता है। और वो है...राष्ट्रवाद का नैरेटिव। 

जी हां तिरंगा ऐसा प्रतीक है जिस पर खुलकर राजनीति करना विपक्ष के लिए आसान नहीं होता। बीजेपी अगर तिरंगा लेकर सड़क पर उतरती है...स्वतंत्रता सेनानियों को याद करती है...वंदे मातरम् के नारे लगाती है...भारत माता की जय के नारे लगाती है...तो पार्टी खुद को राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रीय गौरव के साथ जोड़ती है।
अब विपक्ष के सामने चुनौती ये है कि अगर वह इस यात्रा में शामिल होता है...तो बीजेपी के साथ उसी नैरेटिव में खड़ा दिखाई देगा। और अगर वह खुलकर विरोध करता है...तो बीजेपी उसे राष्ट्रवाद के मुद्दे पर घेरने की कोशिश कर सकती है।
यानी बीजेपी ने ऐसा मुद्दा चुना है...जिसका विरोध करना विपक्ष के लिए राजनीतिक रूप से काफी मुश्किल है। हालांकि इसका मतलब ये बिल्कुल नहीं कि विपक्ष के पास कोई जवाब नहीं है। विपक्ष रोजगार...महंगाई...किसान...युवा...भर्ती परीक्षाओं...कानून-व्यवस्था...और दूसरे जन मुद्दों को लेकर अपनी राजनीति आगे बढ़ा सकता है।

अब आइए आपको प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में संसद भवन के अंदर का नजारा दिखाते हैं। आपको बता दें एनडीए सांसदों की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मंगल बैठक वंदे मातरम नारे के साथ शुरू हुई। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन और एनडीए के अन्य नेता तिरंगा लहराते नजर आए।  
इतना ही नहीं...NDA सांसदों के हाथों में पोस्टर भी दिखाई दिए। इन पोस्टरों के जरिए झारखंड में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के मुद्दे को उठाया गया और विपक्ष पर छात्रों के मुद्दे से भागने का आरोप लगाया गया। यानी एक तरफ तिरंगा...दूसरी तरफ विपक्ष पर राजनीतिक हमला।

तो कुल मिलाकर...उत्तर प्रदेश में बीजेपी की तिरंगा यात्रा को सिर्फ स्वतंत्रता दिवस की तैयारी मानना तस्वीर का आधा हिस्सा देखना होगा। बीजेपी के लिए ये यात्रा कार्यकर्ताओं को मैदान में उतारने का मौका है...मंडल को सक्रिय करने का मौका है...बूथ तक पहुंचने का मौका है...घर-घर संपर्क बढ़ाने का मौका है...और सबसे अहम...चुनाव से काफी पहले अपने संगठन की ताकत को परखने का मौका है। और अब देखना यही होगा...तिरंगे की ये लहर 15 अगस्त के बाद कितने दिनों तक सियासत में बनी रहती है...क्या ये सिर्फ आजादी के जश्न तक रहेगी...या फिर यही तिरंगा यात्रा...मिशन-2027 की चुनावी तैयारी का बड़ा अध्याय बन जाएगी? 

Leave a Reply



comments

Loading.....
  • No Previous Comments found.