2027 के लिए BJP का बड़ा चक्रव्यूह! 18,900 बूथों पर फोकस, अखिलेश की टेंशन बढ़ी?
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की बिछी सियासी बिसात पर मात खाने से बचने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने अब ऐसा चक्रव्यूह रचना शुरू कर दिया है, जिसे देखकर विपक्षी दलों की भी नींद उड़नी तय है। जी हां लोकसभा चुनाव 2024 के झटकों से सबक लेते हुए बीजेपी ने अब हवा-हवाई भाषणों से हटकर 'हाइपर-लोकल' और 'माइक्रो-मैनेजमेंट' का खतरनाक हथियार निकाल लिया है। पार्टी ने हार के एक-एक वोट, एक-एक पोलिंग बूथ और एक-एक सामाजिक समीकरण का कच्चा-चिट्ठा खोलकर रख दिया है। आखिर क्या है बीजेपी का यह सीक्रेट रिकवरी प्लान? किस इलाके में भगवा खेमे को सबसे ज्यादा चोट पहुंची और कैसे पार्टी 2027 में सत्ता की हैट्रिक लगाने के लिए जमीन पर पसीना बहा रही है? आइए जानते हैं इस सियासी रणनीति का पूरा सच!
जाहिर है 2024 के लोकसभा चुनावों में यूपी के नतीजों ने हर किसी को चौंका दिया था। जहां बीजेपी 2019 की अपनी 62 सीटों से लुढ़ककर 33 पर आ गई, वहीं समाजवादी पार्टी ने 37 सीटों पर कब्जा जमाकर अपनी धमाकेदार वापसी दर्ज की। जब बीजेपी ने इन नतीजों को विधानसभा वार और बूथ वार स्कैन किया, तो एक बहुत बड़ा खेल समझ में आया। पार्टी के आंकड़ों में यह बात सामने आई कि 2022 के विधानसभा चुनाव में जिन 18,900 बूथों पर बीजेपी ने बंपर जीत दर्ज की थी, वही बूथ 2024 में कमजोर पड़ गए और वहां वोटरों ने किनारा कर लिया। बस! यहीं से शुरू हुआ बीजेपी का ताबड़तोड़ रिकवरी प्लान। पार्टी अब पूरे राज्य में हवा बनाने के बजाय सीधे उन 18,900 बूथों की रग टटोल रही है। आपको बता दें 16 से 22 सितंबर के बीच खुद यूपी प्रभारी विनोद तावड़े मैदान में उतर रहे हैं और एक-एक बूथ की समीक्षा कर रहे हैं कि आखिर कहां चूक हुई और उसे पटरी पर कैसे लाया जाए। वहीं बीजेपी के अंदरूनी सर्वे और डेटा से एक बात बेहद साफ हो गई है कि पार्टी की पकड़ शहरों में तो मजबूत बनी हुई है, लेकिन असली डेंट गांवों में लगा है।
दूसरी तरफ सपा प्रमुख अखिलेश यादव का PDA फार्मूला और गैर-यादव ओबीसी तथा गैर-जाटव दलित वोटों का खिसकना बीजेपी के लिए सबसे बड़ी सिरदर्दी बन गया है। इसके अलावा, मायावती की बीएसपी का कमजोर होना और उसके वोट बैंक का एक बड़ा हिस्सा विपक्षी इंडिया गठबंधन की तरफ ट्रांसफर हो जाना भी हार की बड़ी वजहों में शुमार रहा। आपको बता दें उत्तर प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में बीजेपी को कहां और कितना झटका लगा, इसकी पूरी रिपोर्ट सामने आ चुकी है:
अवध क्षेत्र
2022 विधानसभा चुनाव: 154 सीटों में से 101 सीटें
2024 लोकसभा चुनाव: घटकर 51 सीटों पर सिमटा
सीधे सीटों का नुकसान: 50 सीटों का भारी घाटा
मुख्य प्रभावित जिले: अमेठी, फैजाबाद, कन्नौज, सुल्तानपुर और सीतापुर में पार्टी की जड़ें सबसे ज्यादा हिलीं।
पूर्वांचल
2022 विधानसभा चुनाव: 102 सीटों में से 53 सीटें
2024 लोकसभा चुनाव: घटकर 36 सीटों पर बढ़त
सीधे सीटों का नुकसान: 17 सीटों का घाटा
मुख्य कारण: जौनपुर, गाजीपुर, मछलीशहर और चंदौली जैसे जिलों में गैर-यादव ओबीसी वोटों का छिटकना।
पश्चिमी यूपी और रुहेलखंड
पश्चिमी यूपी: 76 सीटों में से 57 से घटकर आंकड़ा 43 पर आया, 14 सीटों का नुकसान।
रुहेलखंड: 30 सीटों के मुकाबले सिर्फ 22 सीटों पर बढ़त मिली।
बुंदेलखंड
2022 विधानसभा चुनाव: 19 सीटों में से 14 सीटें
2024 लोकसभा चुनाव: घटकर 9 सीटों पर आया
मुख्य कारण: किसी बड़ी राजनीतिक लहर के बजाय स्थानीय मुद्दे और सरकार के खिलाफ नाराजगी।
तो आंकड़े गवाह हैं कि अगर 2024 के लोकसभा परिणामों को 403 विधानसभा सीटों पर लागू कर दिया जाए, तो 2022 में 255 सीटें जीतने वाली बीजेपी का ग्राफ सीधे तौर पर 161 सीटों के आसपास आकर खड़ा हो जाता है। लेकिन राजनीति में इतिहास हमेशा खुद को नहीं दोहराता, बशर्ते समय रहते सबक सीख लिया जाए। बीजेपी ने हार के इन जख्मों को अपनी ताकत बनाने के लिए बूथ-स्तर पर सुई से लेकर तलवार तक का जुगाड़ बिठाना शुरू कर दिया है। अब देखना यह होगा कि क्या बीजेपी का यह हाइपर-लोकल रिकवरी प्लान अखिलेश यादव के PDA चक्रव्यूह को भेद पाएगा या 2027 के दंगल में यूपी की गद्दी का ताज कोई और बाजी मार ले जाएगा? मुकाबला बेहद दिलचस्प और कांटे का होने वाला है!
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