10 मिनट में ग्रोसरी ही नहीं सांसे भी देता है Blinkit

दिल्ली की एक शांत सुबह अचानक घबराहट में बदल गई, जब सुबह साढ़े सात बजे एक परिवार की दादी अचानक बेहोश होकर गिर पड़ीं। उनकी सांसें चल रही थीं और दिल भी धड़क रहा था, लेकिन वह पूरी तरह अचेत थीं। घर में मौजूद लोगों के लिए यह पल बेहद डरावना था। तुरंत 112 पर कॉल किया गया, लेकिन एंबुलेंस के आने का इंतजार हर सेकंड को भारी बना रहा था।

इसी तनावपूर्ण माहौल में परिवार के एक सदस्य, शिवम कुकरेजा, को हाल ही में देखी एक सुविधा याद आई। उन्होंने Blinkit ऐप पर उपलब्ध एंबुलेंस सेवा के बारे में सुना था। बिना देर किए उन्होंने ऐप खोला और एंबुलेंस के लिए रिक्वेस्ट भेज दी। स्क्रीन पर 6 मिनट का अनुमान दिखा, जो शुरुआत में अविश्वसनीय लगा। लेकिन कुछ ही क्षणों में कन्फर्मेशन कॉल आया और मात्र चार मिनट के भीतर एंबुलेंस उनके घर के बाहर पहुंच गई।

एंबुलेंस में मौजूद प्रशिक्षित नर्सों ने तुरंत स्थिति को संभाल लिया। उन्होंने दादी का ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल जांचा, जिसमें पाया गया कि शुगर खतरनाक रूप से गिरकर 40 तक पहुंच चुकी थी। समय गंवाए बिना उन्हें ड्रिप दी गई। कुछ ही मिनटों में उनकी स्थिति सुधरने लगी—सांसें सामान्य हुईं, आंखें खुलीं और करीब दस मिनट में उन्हें होश आ गया। इसके बाद उन्हें सुरक्षित अस्पताल ले जाया गया।

स्थिति सामान्य होने के बाद जब शिवम ने इस सेवा के शुल्क के बारे में पूछा, तो जवाब ने उन्हें चौंका दिया। नर्सों ने बताया कि यह सेवा निःशुल्क है और इसके लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाता। यहां तक कि जब उन्होंने आभार स्वरूप टिप देने की कोशिश की, तो उसे भी विनम्रता से अस्वीकार कर दिया गया।

इस अनुभव को साझा करते हुए शिवम ने सोशल मीडिया पर लिखा कि अब वे कभी भी ऐप पर दिखने वाले छोटे-छोटे डोनेशन विकल्पों को नजरअंदाज नहीं करेंगे। उनके अनुसार, ये मामूली योगदान कई बार किसी की जिंदगी बचाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

यह घटना इस बात का उदाहरण है कि जब तकनीक का उपयोग संवेदनशीलता और सही उद्देश्य के साथ किया जाए, तो वह सिर्फ सुविधाएं ही नहीं, बल्कि जीवन बचाने का माध्यम भी बन सकती है। दिल्ली-एनसीआर के कुछ क्षेत्रों में Blinkit द्वारा शुरू की गई यह पहल मानवता और नवाचार का एक प्रेरणादायक संगम पेश करती है।

 

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