दिल्ली बिल्डिंग हादसा: 10 मिनट में मौके पर पहुंची ब्लिंकिट एंबुलेंस टीम

दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार को पांच मंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। यह इमारत छात्रों के रहने के लिए पीजी के तौर पर इस्तेमाल हो रही थी। हादसे के बाद कई लोग मलबे में दब गए और मौके पर अफरा-तफरी मच गई। कुछ ही सेकंड में पूरा इलाका धूल और मलबे से भर गया और लोगों की मदद की आवाजें सुनाई देने लगीं।

हादसे के बाद स्थानीय लोग भी राहत और बचाव कार्य में जुट गए। लोगों ने बिना किसी पहचान या रिश्ते की परवाह किए मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने की कोशिश की। कुछ छात्रों ने मोबाइल फोन के जरिए बाहर मौजूद लोगों से संपर्क कर मदद की गुहार लगाई।

इसी दौरान मलबे में फंसे लोगों तक ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए ब्लिंकिट से ऑक्सीजन सिलेंडर मंगवाए गए। आमतौर पर रोजमर्रा का सामान कुछ ही मिनटों में पहुंचाने वाला ब्लिंकिट इस आपात स्थिति में ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए इस्तेमाल किया गया।

हादसे की सूचना मिलते ही ब्लिंकिट एंबुलेंस मौके पर पहुंची

सत्य निकेतन हादसे के बाद ब्लिंकिट की एंबुलेंस टीम भी घटनास्थल पर पहुंची। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में ब्लिंकिट के स्टाफ ने बताया कि हादसे की पहली सूचना उनकी टीम को करीब 1:40 बजे मिली थी।

स्टाफ के मुताबिक, सूचना मिलते ही एंबुलेंस को घटनास्थल के लिए रवाना किया गया और करीब 1:50 बजे, यानी लगभग 10 मिनट के भीतर टीम मौके पर पहुंच गई। टीम ने राहत और बचाव अभियान में हर संभव सहयोग करने की कोशिश की और जरूरतमंद लोगों तक मेडिकल सहायता पहुंचाने में मदद की।

ब्लिंकिट एंबुलेंस के स्टाफ ने बताया कि उनकी एंबुलेंस सफदरजंग अस्पताल में तैनात रहती है और कंपनी के ऐप के जरिए मिलने वाली इमरजेंसी कॉल के बाद टीम को अलर्ट किया जाता है। सूचना मिलते ही उपलब्ध एंबुलेंस को मौके पर भेजने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है।

कैसे बुक करें ब्लिंकिट एंबुलेंस?

अगर आपके इलाके में ब्लिंकिट की एंबुलेंस सुविधा उपलब्ध है, तो ऐप के होम पेज पर 'Ambulance' का विकल्प दिखाई दे सकता है। इस विकल्प पर क्लिक करने के बाद 'Request Ambulance' चुनकर पिक-अप एड्रेस कन्फर्म किया जा सकता है। रिक्वेस्ट मिलने के बाद एंबुलेंस लोकेशन पर भेजी जाती है। बुकिंग के बाद मरीज को ले जाने वाले अस्पताल की जानकारी भी दी जा सकती है।

एंबुलेंस में कौन-कौन सी सुविधाएं?

ब्लिंकिट एंबुलेंस में स्ट्रेचर, व्हीलचेयर, ऑक्सीजन, वाइटल मॉनिटरिंग डिवाइस, AED यानी डिफिब्रिलेटर, सक्शन मशीन, जरूरी दवाइयां और फ्लूइड जैसी सुविधाएं उपलब्ध होने की जानकारी दी गई है।

क्या एंबुलेंस में डॉक्टर मौजूद रहता है?

इस एंबुलेंस सर्विस में डॉक्टर मौजूद नहीं रहता। हालांकि, प्रशिक्षित पैरामेडिक को जरूरत पड़ने पर इमरजेंसी डॉक्टर से फोन या वीडियो कॉल के जरिए टेली-कंसल्टेशन की सुविधा मिल सकती है।

किन मामलों में इस्तेमाल की जा सकती है एंबुलेंस?

इस सर्विस का इस्तेमाल हार्ट अटैक या कार्डियक इमरजेंसी, दौरा पड़ने, रोड एक्सीडेंट और कुछ ओपीडी मामलों में किया जा सकता है। अगर किसी इलाके में यह सुविधा उपलब्ध है, तो रोड एक्सीडेंट के मरीज के लिए भी एंबुलेंस बुक की जा सकती है।

हालांकि, वेंटिलेटर पर मौजूद मरीजों, 12 महीने से छोटे बच्चों, डिलीवरी या बच्चे के जन्म से जुड़े मामलों और मोर्टरी ट्रांसपोर्ट के लिए यह सर्विस उपलब्ध नहीं होने की जानकारी दी गई है।

कहां उपलब्ध है और कितना समय लगता है?

फिलहाल ब्लिंकिट की एंबुलेंस सर्विस दिल्ली और गुरुग्राम के कुछ चुनिंदा इलाकों में उपलब्ध बताई गई है। अगर ऐप में एंबुलेंस का विकल्प दिखाई दे रहा है, तो इसका मतलब है कि आसपास सर्विस उपलब्ध है। सामान्य तौर पर एंबुलेंस करीब 10 मिनट में पहुंच सकती है, हालांकि ट्रैफिक और सड़क की स्थिति के कारण समय कम-ज्यादा हो सकता है। बुकिंग के दौरान अनुमानित पहुंचने का समय बताया जा सकता है।

बुकिंग के बाद पैरामेडिक मरीज की स्थिति जानने के लिए फोन कर सकता है और एंबुलेंस पहुंचने तक जरूरी निर्देश दे सकता है। एंबुलेंस स्टाफ मरीज को उठाकर एंबुलेंस तक पहुंचाने में भी मदद करता है।

मरीज के साथ कितने लोग जा सकते हैं?

मरीज के साथ अधिकतम दो लोग एंबुलेंस में जा सकते हैं। मरीज को उपलब्ध नजदीकी या परिवार द्वारा चुने गए अस्पताल तक पहुंचाया जा सकता है।

अस्पताल से मरीज को घर लाने के लिए भी इस एंबुलेंस सर्विस का इस्तेमाल किया जा सकता है। एंबुलेंस मरीज के अस्पताल की मेडिकल टीम की देखरेख में लेने तक साथ रह सकती है। अगर किसी कारण से मरीज को वहां भर्ती नहीं किया जाता, तो दूसरे अस्पताल ले जाने में भी मदद की जा सकती है।

ब्लिंकिट एंबुलेंस का कितना चार्ज?

दी गई जानकारी के मुताबिक, फिलहाल ब्लिंकिट की यह एंबुलेंस सर्विस पूरी तरह फ्री बताई गई है।

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