अमेरिका ने टैरिफ पर मोदी का वार , सारी दुनिया आई भारत के साथ

अमेरिका ने टैरिफ बढ़ाकर भारत को झटका देने की कोशिश की...पूरी दुनिया में तहलका मच गया .. मगर भारत इतना कमजोर नहीं है कि एक अमेरिका का टैरिफ भारत की कूटनीतिक नींव हिला दे ... जी हां .क्या हुआ अगर अमेरिका ने टैरिफ बढ़ाकर भारत को झटका देने की कोशिश की? क्योंकि भारत डरा नहीं, पीछे नहीं हटा — बल्कि अपनी रणनीति से अमेरिका को ऐसी शांति से शह दी कि अब ट्रंप भी सोच में पड़ गए होंगे.... जहाँ ट्रंप अपनी जिद पर अड़े हैं, वहीं भारत ने पिछले दो महीनों में एक के बाद एक राजनयिक मास्टरस्ट्रोक चल दिए हैं। चीन से लेकर कतर तक, फिलीपींस से लेकर फिजी तक, हर देश के साथ नई दोस्ती पक्की की जा रही है — और संदेश साफ है:
"हमसे रार करोगे तो हमें और मज़बूत पाओगे!"
दरसल इस अगस्त, चीन के विदेश मंत्री वांग यी भारत आए। जिस वक़्त अमेरिका भारत से दूरी बना रहा था, भारत और चीन मिलकर सीमा प्रबंधन और शांति बहाली की बात कर रहे थे।दोनों देशों ने मिलकर बहुपक्षीय मुद्दों पर सहयोग, संवाद तंत्र को दोबारा शुरू करने और एकतरफा धमकियों का विरोध करने पर सहमति जताई।सीमा विवाद को पीछे छोड़, भारत और चीन अब आंखों में आंख डालकर दोस्ती की बातें कर रहे हैं।
वहीं , कजाकिस्तान के उप रक्षा मंत्री भारत आए और बात हुई सैन्य सहयोग को और गहरा करने की।दोनों देशों ने माना कि दोस्ती तो है ही, अब इसे अगले स्तर पर ले जाना चाहिए — मतलब, रक्षा उद्योग में साझेदारी और सैन्य अभ्यासों में बढ़ोतरी तय है।इसके अलावा फिलीपींस के राष्ट्रपति मार्कोस भारत आए और जमकर डील हुई।व्यापार, रक्षा, डिजिटल तकनीक, अंतरिक्ष, सुरक्षा — मतलब फुल-पैकेज डिप्लोमेसी!
वहीं फिजी के भी प्रधानमंत्री राबुका भारत आए और उनका बयान तो अमेरिका के लिए एक सीधा संदेश था।उन्होंने कहा:"अगर कोई आपसे नाखुश भी है तो भी आपका व्यक्तित्व इतना बड़ा है कि सब झेल जाते हैं।"भारत और फिजी ने मिलकर हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और समावेशन की बात की और रक्षा सहयोग पर कार्य योजना बनाई।
इतना ही नहीं , अमेरिका की बेरुख़ी के बीच, कतर के वाणिज्य मंत्री भारत आए और बताया कि अब तेल-गैस से आगे बढ़कर टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और निवेश की बात करनी है।भारत और कतर अब AI, स्टार्टअप और डिजिटल स्पेस में हाथ मिला रहे हैं।
वहीं , ब्राजील के राष्ट्रपति ने साफ कह दिया:"मैं ट्रंप से नहीं, मोदी से बात करूंगा।"इस बयान से सिर्फ ट्रंप ही नहीं, पूरी दुनिया समझ गई कि ब्राजील भारत के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है।भारत ब्राजील का पांचवां सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर है और यहां की कंपनियों ने 6 अरब डॉलर से ज़्यादा निवेश भी कर रखा है।
और अब कल प्रधानमंत्री मोदी जापान और फिर चीन की यात्रा पर निकलेंगे।जापान में तो लगभग तय है — 10 ट्रिलियन येन (करीब 68 अरब डॉलर) का निवेश भारत में आने वाला है।इसके अलावा सुरक्षा सहयोग पर भी बड़ा समझौता होगा।चीन में 7 साल बाद पीएम मोदी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलेंगे — और फिर सितंबर में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत आएंगे।
कुल मिलाकर देखा जाए तो अमेरिका ने टैरिफ से वार किया,मगर भारत ने सभी दिशाओं में दोस्ती की दीवार खड़ी कर दी।अब सवाल अमेरिका के सामने है:"आप टैरिफ बढ़ाइए, हम दुनिया से रिश्ते मजबूत कर लेंगे।"
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