ब्रेकअप के बाद एक्स-गर्लफ्रेंड ने लिए 52 लाख, वकील नहीं किया हायर ChatGPT की मदद से जीत गया केस
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आज कई क्षेत्रों में लोगों की मदद कर रहा है, लेकिन क्या AI की सहायता से कोई कानूनी लड़ाई भी जीती जा सकती है? ब्रिटेन में सामने आए एक मामले ने इस सवाल को चर्चा में ला दिया है। यहां एक फायरफाइटर ने महंगे वकील करने के बजाय ChatGPT की मदद ली और कोर्ट में खुद अपना पक्ष रखकर केस जीत लिया।
मामला ब्रिटेन के 40 वर्षीय क्रेग टिटचेनर का है, जो हीथ्रो एयरपोर्ट पर फायरफाइटर के तौर पर काम करते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, साल 2019 में उनकी किस्मत तब बदली जब उन्होंने लॉटरी के एक स्क्रैच कार्ड से करीब 2.58 करोड़ रुपये का इनाम जीता।
कुछ साल बाद, 2022 में क्रेग ने अपनी तत्कालीन गर्लफ्रेंड हीदर डगलस को लगभग 52 लाख रुपये दिए। हीदर पेशे से साइकियाट्रिक नर्स थीं और दोनों के बीच यह तय हुआ था कि वह इस रकम को निवेश करेंगी। योजना थी कि निवेश से मिलने वाले फायदे को दोनों आपस में साझा करेंगे।
हालांकि, रिश्ता खत्म होने के बाद मामला बिगड़ गया। क्रेग ने जब अपनी रकम वापस मांगी तो हीदर ने पैसे लौटाने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि यह रकम उन्हें तोहफे के तौर पर दी गई थी। इसके बाद क्रेग ने कानूनी रास्ता अपनाने की कोशिश की, लेकिन वकीलों की फीस इतनी ज्यादा थी कि उनके लिए आगे बढ़ना मुश्किल हो गया।
इसी दौरान उन्होंने ChatGPT की मदद लेने का फैसला किया। क्रेग के मुताबिक, AI टूल ने उन्हें कानूनी प्रक्रिया समझने, जरूरी दस्तावेज तैयार करने और कोर्ट में अपना पक्ष रखने के तरीके बताए। इसके बाद उन्होंने खुद ही सेंट्रल लंदन काउंटी कोर्ट में अपना केस लड़ा।
क्रेग ने बताया कि खुद अपनी पैरवी करना आसान नहीं था, लेकिन उनके पास दूसरा विकल्प भी नहीं था। उनका मानना है कि ChatGPT की मदद के बिना शायद वह यह कानूनी लड़ाई आगे नहीं बढ़ा पाते।
कोर्ट में हीदर डगलस ने दावा किया कि 52 लाख रुपये उन्हें गिफ्ट के रूप में मिले थे। उन्होंने क्रेग पर अन्य आरोप भी लगाए, लेकिन जज शेर्लोट हार्ट ने इन दावों को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि हीदर यह साबित नहीं कर पाईं कि रकम उपहार थी। इसके अलावा, वह अपने दावे के समर्थन में जरूरी बैंक रिकॉर्ड भी पेश नहीं कर सकीं।
आखिरकार कोर्ट ने क्रेग के पक्ष में फैसला सुनाया और उन्हें उनकी रकम वापस करने का आदेश दिया। यह मामला अब इस बात को लेकर चर्चा में है कि किस तरह AI टूल आम लोगों को जटिल प्रक्रियाओं को समझने में मदद कर सकते हैं, हालांकि कानूनी मामलों में विशेषज्ञ सलाह की जरूरत बनी रहती है।
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