पूर्व CJI बीआर गवई का बड़ा बयान, कहा- लंबित मामलों पर सार्वजनिक टिप्पणी सही नहीं
पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) बी.आर. गवई ने एक बयान में कहा है कि न्यायिक अनुशासन और मर्यादा इस बात की अनुमति बिल्कुल नहीं देते कि कोई सेवारत या सेवानिवृत्त न्यायाधीश अदालत में लंबित किसी भी मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से अपनी प्रतिक्रिया दे। एएनआई से बातचीत करते हुए पूर्व सीजेआई गवई ने जोर देकर कहा कि जब कोई मामला अदालत में विचाराधीन हो, तो न्यायाधीशों को पूरी तरह से न्यायिक मर्यादा का पालन करना चाहिए। उनका यह बयान सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्ज्वल भुयन द्वारा चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया पर की गई टिप्पणियों के बाद सामने आया है।
जस्टिस उज्ज्वल भुयन ने हाल ही में एसआईआर अभियान के सिलसिले में नागरिकों के मतदान के अधिकार और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए कुछ महत्वपूर्ण बातें कही थीं, जो इस समय कानूनी और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई हैं। इस पूरे विवाद के बीच विभिन्न कानूनी दिग्गजों की अलग-अलग राय सामने आ रही है, जिसमें मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण और नाम काटे जाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
इस मामले में वरिष्ठ वकील और कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंहवी ने जस्टिस उज्ज्वल भुयन और पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस आर.एफ. नरीमन द्वारा जताई गई चिंताओं का समर्थन किया है। सिंहवी का तर्क है कि इन न्यायाधीशों की टिप्पणियां ऐसे महत्वपूर्ण विषयों से जुड़ी हैं जो सीधे तौर पर देश के लोकतंत्र में आम नागरिकों के अधिकारों को प्रभावित करती हैं और इस पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

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