BRICS समिट खत्म, लेकिन मोदी की कूटनीति की गूंज बरकरार! भारत ने दुनिया को क्या दिखाया?
नई दिल्ली में हुआ BRICS 2026 समिट अब खत्म हो चुका है...लेकिन इस समिट की गूंज अभी लंबे वक्त तक सुनाई देने वाली है। जी हां नई दिल्ली का भारत मंडपम इन दिनों ग्लोबल कूटनीति का सबसे बड़ा पावरहाउस बना रहा, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिर्फ दो दिनों में ऐसा कूटनीतिक चक्रव्यूह रचा कि पूरी दुनिया देखती रह गई! मौका था 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का, जिसकी थीम थी “मजबूती, नए प्रयोग, आपसी सहयोग और टिकाऊ विकास को बढ़ावा देना।” अमेरिका के टैरिफ वाले झटकों और मिडिल ईस्ट की सुलगती आग के बीच जब दुनिया के तमाम धुरंधर एक मंच पर जुटे, तो हर किसी के मन में यही सवाल था कि क्या भारत इतने बड़े भू-राजनीतिक मतभेदों के बीच इन सबको एक साथ ला पाएगा? और यकीन मानिए, भारत ने वो कर दिखाया जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी! तो आइए...एक-एक करके समझते हैं कि BRICS 2026 में भारत ने आखिर कौन-कौन से बड़े दांव चले...और दुनिया के सामने भारत की कूटनीतिक तस्वीर कितनी मजबूत होकर उभरी।
सबसे पहले आप जरा पीएम मोदी के इस तूफानी शेड्यूल को देखिए; तीन दिनों के भीतर उन्होंने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से लेकर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और यूएई, मलेशिया, इथियोपिया, वियतनाम, मिस्र, दक्षिण अफ्रीका समेत तमाम देशों के दिग्गजों के साथ ताबड़तोड़ 15 औपचारिक द्विपक्षीय बैठकें डाल दीं! पुतिन के साथ हुई बैठक में डिफेंस डील्स, S-400 सिस्टम और 2030 तक 100 अरब डॉलर के ट्रेड का टारगेट सेट हुआ, तो चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ साफ कर दिया गया कि भाई, अगर रिश्ते सुधारने हैं तो बॉर्डर पर शांति पहली शर्त है, हम प्रतिद्वंद्वी नहीं बल्कि साझेदार बनकर आगे बढ़ेंगे। ईरान के राष्ट्रपति के साथ चाबहार पोर्ट और रीजनल सिक्योरिटी पर बात हुई, तो यूएई और दूसरे ग्लोबल लीडर्स के साथ भी कूटनीति के पेंच कसे गए। अब जरा भारत की उन 5 महा-कामयाबियों पर गौर कीजिए जिसने इस समिट को ऐतिहासिक बना दिया!
पहली बड़ी कामयाबी...BRICS को साझा घोषणापत्र तक पहुंचाना
सबसे पहली और सबसे धांसू कामयाबी रही मिडिल ईस्ट की जंग में कूटनीति का जादू चलाना। जी हां ईरान और यूएई जैसे देशों के बीच चले आ रहे भारी तनाव के बावजूद भारत ने दोनों को एक ही साझा घोषणापत्र पर राजी कर लिया और जंग के माहौल के बीच दोनों देशों के शीर्ष नेताओं की आपस में मुलाकात भी करा दी।
दूसरी बड़ी कामयाबी....BRICS को अमेरिका विरोधी मंच बनने से रोकना
दूसरी बड़ी सफलता रही वह 'साझा घोषणापत्र' जिस पर रूस-यूक्रेन और अमेरिका-इजरायल-ईरान की जंग के बावजूद सबकी मुहर लगी, यानी इतने बिखराव वाले वक्त में भी ब्रिक्स को टूटने नहीं दिया गया।
तीसरी बड़ी कामयाबी...पहलगाम हमले पर सामूहिक निंदा
जी हां तीसरी और सबसे कड़क चोट लगी आतंकवाद पर, जब चीन जैसे देश की मौजूदगी वाले मंच पर जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की ऐसी कड़ी सामूहिक निंदा हुई कि आतंक के आकाओं की नींद उड़ गई!
चौथी बड़ी कामयाबी....ईरान और UAE को एक ही मंच पर लाना.
चौथी बड़ी बात ये रही कि भारत ने इस मंच को अमेरिका या पश्चिम के खिलाफ 'विरोध का अखाड़ा' बनने से बचा लिया और पूरा फोकस 'ग्लोबल साउथ' के अधिकारों और विकास पर टिकाए रखा।
पांचवीं बड़ी कामयाबी...15 द्विपक्षीय बैठकें और भारत की रणनीतिक कूटनीति
और पांचवीं सबसे बड़ी बात यह है कि इस कलयुग जैसी भू-राजनीतिक उथल-पुथल में भारत ने ग्लोबल लीडर की भूमिका निभाते हुए दुनिया को यह बता दिया कि बातचीत और कूटनीति से बड़ा कोई हथियार नहीं है। जी हां तीन दिनों के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने अलग-अलग देशों के राष्ट्राध्यक्षों और सरकार प्रमुखों के साथ 15 औपचारिक द्विपक्षीय बैठकें कीं। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बैठक की रही। दोनों नेताओं ने रक्षा... ऊर्जा... परमाणु ऊर्जा... क्रिटिकल मिनरल्स और व्यापार जैसे मुद्दों पर बातचीत की। भारत और रूस ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने के लक्ष्य पर भी चर्चा की। यानि पूरे BRICS समिट को अगर एक लाइन में समझें तो भारत का संदेश काफी साफ नजर आया। भारत ने कहा...रूस से दोस्ती रहेगी... चीन से बातचीत जारी रहेगी... ईरान से रणनीतिक रिश्ते मजबूत होंगे... अमेरिका और पश्चिम से भी संबंध अपने रास्ते पर चलते रहेंगे... लेकिन भारत अपनी विदेश नीति किसी एक खेमे के हिसाब से नहीं चलाएगा। भारत अपने हितों के हिसाब से रिश्ते बनाएगा... और ग्लोबल साउथ की आवाज को भी मजबूत करेगा। यही वजह है कि BRICS 2026 को भारत के लिए सिर्फ एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के तौर पर नहीं देखा जा रहा... बल्कि इसे भारत की संतुलित और कूटनीति के बड़े प्रदर्शन के तौर पर भी देखा जा रहा है।
तो कुल मिलाकर...नई दिल्ली में BRICS का मंच सजा...दुनिया के बड़े नेता भारत आए...और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन दिनों में 15 औपचारिक द्विपक्षीय बैठकों के जरिए भारत की कूटनीतिक मौजूदगी का दम दुनिया को दिखाया। अब 2027 में ब्रिक्स की कमान चीन के हाथों में जाने वाली है, लेकिन चीन को कमान मिलने से पहले भारत ने जो कूटनीतिक लकीर खींच दी है, उसकी गूंज ग्लोबल राजनीति में बहुत लंबे समय तक सुनाई देने वाली है!
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