कपास की खेती में राहत, किसानों पर अतिरिक्त बोझ नहीं
खरीफ सीजन शुरू होने वाला है और कपास किसानों के लिए खुशखबरी यह है कि केंद्र सरकार बीटी कपास (Bt Cotton) के बीजों की कीमतों को स्थिर रखने की तैयारी में है। खासकर बोलगार्ड-1 और बोलगार्ड-2 किस्मों के लिए जल्द ही अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) अधिसूचना जारी होगी। सूत्रों के मुताबिक, इस साल बीजों की कीमत में ज्यादा बढ़ोतरी की संभावना नहीं है।
पिछले साल की कीमतों पर ही मिल सकते बीज
बोलगार्ड-2 के 450 ग्राम पैकेट की कीमत पिछले साल 900 रुपये थी। बोलगार्ड-1 का पैकेट 2016 से 635 रुपये पर स्थिर है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस साल कीमत न बढ़ाने से बीज कंपनियों पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा।
एमआरपी तय करना सरकार के लिए कानूनी जिम्मेदारी
कपास बीज मूल्य (नियंत्रण) आदेश, 2015 के अनुसार, सरकार को हर साल बीजों की अधिकतम कीमत अधिसूचित करना जरूरी है। यह कीमत केवल अधिकतम है, न्यूनतम नहीं। इसका मकसद यह है कि कंपनियां किसानों से मनमानी दाम न वसूल सकें।
95% खेती में बीटी कपास, लेकिन चुनौतियां बढ़ रही हैं
भारत में कपास का लगभग 95% हिस्सा बीटी कपास के तहत आता है। पिंक बोलवर्म जैसे कीट अब बीटी प्रोटीन के खिलाफ प्रतिरोधक हो गए हैं। रस चूसने वाले कीटों के कारण किसानों को कीटनाशकों पर ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है।
विवाद और विरोध
भारतीय किसान संघ ने बीटी कपास की एमआरपी तय करने का विरोध किया है। उनका कहना है कि जब बीटी कपास की कीट प्रतिरोधक क्षमता पर सवाल है, तो कीमत तय करना किसानों के लिए महंगा साबित हो रहा है। फिलहाल सरकार का अंतिम फैसला अभी बाकी है, लेकिन संकेत यही हैं कि इस बार किसानों की जेब पर अतिरिक्त बोझ नहीं डाला जाएगा।
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