बदायूं सदर में कभी चली थी साइकिल की आंधी, अब कमल के एकछत्र राज का क्या है राज?
उत्तर प्रदेश की राजनीति की जब भी बात होती है, तो बदायूं जिले का नाम बड़े ही अदब और सियासी जोश के साथ लिया जाता है। बदायूं जिला यूं ही सियासत का गढ़ नहीं कहलाता, और जब बात आती है जिले की सबसे अहम बदायूं विधानसभा सीट (संख्या 115) की, तो यहां का मुकाबला किसी ब्लॉकबस्टर फिल्मी ड्रामे से कम नहीं होता। शहरी गलियों से लेकर ग्रामीण चौपालों तक, इस सीट पर पिछले तीन चुनावों में जो सियासी पटकथा लिखी गई है, उसने अच्छे-अच्छे सियासी पंडितों को भी हैरान कर दिया है। कभी यहाँ साइकिल ने ऐसा पैडल मारा कि विरोधी देखते रह गए, तो कभी कमल ऐसा खिला कि विरोधियों के सारे समीकरण धरे के धरे रह गए! आइए, बदायूं सदर के सियासी पन्ने को खोलने हैं और जानते हैं कि पिछले तीन चुनावों में यहां असल खेल क्या रहा है।
साल 2012 का विधानसभा चुनाव उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की हवा ऐसी चली कि बदायूं सदर की सीट पर भी इसका असर साफ दिखा। समाजवादी पार्टी के टिकट पर मैदान में उतरे आबिद रजा खान ने इस मुकाबले को अपने पक्ष में मोड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी। सामने थे भाजपा के मंझे हुए खिलाड़ी महेश चंद्र गुप्ता।
किसको मिले कितने वोट:
विजेता (SP): आबिद रजा खान -62,786 वोट
दूसरा स्थान (BJP): महेश चंद्र गुप्ता -47,373 वोट
तीसरे स्थान पर (BSP): रामसेवक सिंह -44,643 वोट
कांग्रेस प्रत्याशी: फखरे अहमद -12,424 वोट
मुकाबला त्रिकोणीय और बेहद रोमांचक था। बसपा के रामसेवक सिंह ने भी 44 हजार से ज्यादा वोट झटककर मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया था। लेकिन अंत में आबिद रजा खान ने 15,413 वोटों के ठोस अंतर से जीत दर्ज की और विधानसभा का टिकट पक्का किया। उस समय लगभग 61.8 प्रतिशत मतदान के साथ जनता ने खुलकर अपनी पसंद जाहिर की थी।
पाँच साल बीते, वक्त बदला और हवा का रुख भी बदल गया। साल 2017 में पूरे उत्तर प्रदेश में मोदी लहर ऐसी दौड़ी कि बदायूं का किला भी हिल गया। पिछली बार दूसरे नंबर पर रहे बीजेपी के महेश चंद्र गुप्ता इस बार पूरे दमखम के साथ मैदान में उतरे और पिछली हार का ऐसा करारा बदला लिया कि सियासी गलियारों में भूचाल आ गया।
किसको मिले कितने वोट:
विजेता (BJP): महेश चंद्र गुप्ता -87,314 वोट
दूसरा स्थान (SP): आबिद रजा खान -70,847 वोट
तीसरे स्थान पर (BSP): भूपेंद्र सिंह -32,641 वोट
जीत का अंतर: 16,467 वोट
लगभग 60.2 प्रतिशत मतदान के बीच, बीजेपी के महेश चंद्र गुप्ता ने 87 हजार से ज्यादा वोट बटोरे और सपा के आबिद रजा खान को 16,467 वोटों के अंतर से धूल चटा दी। इस जीत के साथ ही भाजपा ने 2012 की हार का हिसाब चुकता करते हुए बदायूं सदर पर भगवा परचम लहरा दिया।
साल 2022 का विधानसभा चुनाव-यानी हालिया सियासी जंग, जिसने बदायूं में रोमांच की सारी हदें पार कर दीं। बीजेपी ने एक बार फिर अपने पुराने सिपहसालार महेश चंद्र गुप्ता पर भरोसा जताया, तो वहीं समाजवादी पार्टी ने इस बार नया चेहरा उतारकर बड़ा दांव खेला और रईस अहमद को मैदान में उतारा। मुकाबला ऐसा था कि हर किसी की सांसें अटकी हुई थीं।
किसको मिले कितने वोट:
विजेता (BJP): महेश चंद्र गुप्ता -1,01,096 वोट
दूसरा स्थान (SP): रईस अहमद -89,917 वोट
तीसरे स्थान पर (BSP): राजेश कुमार सिंह -23,135 वोट
कांग्रेस प्रत्याशी: रजनी सिंह -2,235 वोट
जीत का अंतर: मात्र 11,179 वोट
भले ही मतदान प्रतिशत थोड़ा गिरकर 58.3 प्रतिशत पर आ गया हो, लेकिन वोटों का आंकड़ा एक लाख के पार पहुंच गया। बीजेपी के महेश चंद्र गुप्ता ने इतिहास रचते हुए लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की और एक लाख से ज्यादा वोट हासिल किए। हालांकि, सपा के रईस अहमद ने उन्हें कड़ी टक्कर दी और जीत का अंतर सिमटकर 11,179 वोटों पर आ गया। मुकाबला बेहद कड़ा था, लेकिन बाजी आखिरकार कमल के हाथ ही लगी।
बदायूं विधानसभा सीट (क्रमांक 115) सिर्फ एक इलाका नहीं, बल्कि सियासी धड़कन है। यह क्षेत्र शहरी रौनक और ग्रामीण परिवेश का एक अनूठा संगम है। इसमें बदायूं नगर क्षेत्र के साथ-साथ बिनावर, कुंवरगांव और वजीरगंज से जुड़े कई अहम इलाके भी आते हैं। यही वजह है कि यहां की सियासत में शहर की गलियों के मुद्दों से लेकर गांवों के खेत-खलिहानों तक की गूंज सुनाई देती है। अब जब निगाहें आने वाले सियासी संग्राम पर टिकी हैं, तो जनता के मन में भी कई बड़े सवाल सुलग रहे हैं। इस बार सिर्फ नारों से काम नहीं चलेगा, बल्कि इन जमीनी मुद्दों पर वोटों की तौल होगी:
शहरी मोहल्लों की टूटी सड़कें और जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान कब मिलेगा?
सिंचाई के साधन, खाद की उपलब्धता और फसलों की सही कीमत से जुड़े सवाल।
युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर और पलायन को रोकने की कवायद।
सरकारी अस्पतालों में बदहाल स्वास्थ्य सेवाएं और सरकारी स्कूलों की दशा-दिशा।
पिछले जनप्रतिनिधियों के कार्यकाल में हुए काम और जनता की उम्मीदों का हिसाब-किताब।
बदायूं विधानसभा सीट की यह सियासत किसी थ्रिलर फिल्म से कम नहीं है। एक तरफ बीजेपी जहां लगातार दो बार की जीत के बाद अपने इस किले को और मजबूत करने की फिराक में है, तो वहीं विपक्षी दल इस बार की कमियों को हथियार बनाकर जोरदार वापसी की प्लानिंग कर रहे हैं। आने वाले वक्त में जनता किसके सिर पर ताज सजाएगी और कौन किस पर भारी पड़ेगा, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। लेकिन इतना तय है कि बदायूं का अगला चुनावी दंगल बेहद दिलचस्प, कांटे की टक्कर वाला और धमाकेदार होने वाला है!

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