केंद्रीय बजट 2026-27 : भारत की विकास यात्रा का नया रोडमैप

भारत का केंद्रीय बजट 2026-27 वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में प्रस्तुत किया गया। यह बजट देश को विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की ओर ले जाने वाला एक महत्वपूर्ण दस्तावेज़ माना जा रहा है। बजट में आर्थिक विकास, अवसंरचना, रोजगार सृजन, उद्योग, कृषि और वित्तीय अनुशासन पर विशेष जोर दिया गया है।

 

बजट 2026 के प्रमुख उद्देश्य

• तेज और टिकाऊ आर्थिक वृद्धि
• मजबूत अवसंरचना का निर्माण
• रोजगार के नए अवसर पैदा करना
• विनिर्माण और MSME सेक्टर को बढ़ावा
• कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना
• वित्तीय घाटे को नियंत्रण में रखना

 

अवसंरचना और पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure)

बजट 2026 में ₹12.2 लाख करोड़ का रिकॉर्ड पूंजीगत व्यय प्रस्तावित किया गया है। यह पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 9–11% अधिक है।

मुख्य घोषणाएँ:
7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर
• राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे का विस्तार
• डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और जलमार्ग विकास
• स्मार्ट सिटी और लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर

इससे निर्माण क्षेत्र, सीमेंट, स्टील और ट्रांसपोर्ट सेक्टर को सीधा लाभ मिलेगा।

 

उद्योग और विनिर्माण क्षेत्र

बजट में “मेक इन इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” को और मजबूत किया गया है।

प्रमुख कदम:
सेमीकंडक्टर मिशन 2.0
Biopharma SHAKTI योजना
• इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा
• औद्योगिक पार्क और क्लस्टर विकास

इन पहलों से भारत को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने का लक्ष्य है।

 

MSME और स्टार्टअप सेक्टर

₹10,000 करोड़ का MSME ग्रोथ फंड
• आसान लोन और क्रेडिट गारंटी
• छोटे व्यवसायों के लिए डिजिटल और मार्केट सपोर्ट
• स्टार्टअप्स के लिए इनोवेशन-फ्रेंडली वातावरण

इससे छोटे और मध्यम उद्यमों को मजबूती मिलेगी और रोजगार बढ़ेगा।

 

कृषि और ग्रामीण विकास

कृषि क्षेत्र को तकनीक और निवेश से जोड़ने पर जोर दिया गया है।

मुख्य पहल:
• AI आधारित कृषि सेवाएँ
• बागवानी, मत्स्य पालन और डेयरी को बढ़ावा
• ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर और वेयरहाउसिंग
• किसानों की आय बढ़ाने की योजनाएँ

 

कर (Tax) नीति और मध्यम वर्ग

आयकर स्लैब में कोई बड़ा बदलाव नहीं
• टैक्स सिस्टम को सरल बनाने पर ध्यान
• TDS/TCS नियमों में सुधार
• टैक्स कंप्लायंस को आसान किया गया

हालांकि मध्यम वर्ग को सीधी कर राहत कम मिली, लेकिन स्थिर टैक्स नीति से निवेश का भरोसा बढ़ा है।

 

वित्तीय अनुशासन और घाटा

सरकार ने राजकोषीय घाटा लगभग 4.3% GDP तक सीमित रखने का लक्ष्य रखा है।
यह संकेत देता है कि सरकार विकास के साथ-साथ वित्तीय संतुलन पर भी ध्यान दे रही है।

 

शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक क्षेत्र

• आयुष और मेडिकल संस्थानों का विस्तार
• मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा
• स्किल डेवलपमेंट और रोजगार-आधारित शिक्षा
• डिजिटल शिक्षा और रिसर्च पर निवेश

 

केंद्रीय बजट 2026-27 एक विकास-उन्मुख और भविष्य-केंद्रित बजट है। इसमें कर राहत सीमित है, लेकिन अवसंरचना, उद्योग, रोजगार और आत्मनिर्भरता पर मजबूत फोकस है। यह बजट भारत की अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक मजबूती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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