मुख्य चौक में आवारा पशुओं का आतंक; संतोष टॉकीज चौक पर यातायात हुआ बाधित
देऊलगांव राजा : देऊलगांव राजा शहर के संतोष टॉकीज चौक क्षेत्र में आवारा पशुओं की बढ़ती संख्या नागरिकों के लिए गंभीर समस्या बनती जा रही है। पूरे दिन गाय, बैल एवं अन्य पशुओं के झुंड इस व्यस्त चौक पर डेरा जमाए रहते हैं, जिससे यातायात बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। वाहन चालकों, राहगीरों तथा स्थानीय व्यापारियों को प्रतिदिन भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई बार यातायात जाम, छोटे-बड़े हादसों की आशंका तथा नागरिकों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा उत्पन्न होने के बावजूद संबंधित प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं किए जाने पर नागरिकों में तीव्र नाराजगी देखी जा रही है।हर वर्ष वर्षा ऋतु में खेतों में बुवाई पूरी होने के बाद किसान फसलों की सुरक्षा के लिए कांटेदार बाड़ लगाते हैं या आवारा पशुओं को खेतों से भगा देते हैं। इसके बाद ये पशु भोजन की तलाश में शहर का रुख करते हैं। शहर में पहुंचने के बाद संतोष टॉकीज चौक जैसे व्यस्त स्थानों पर झुंड बनाकर खड़े हो जाने से यातायात बाधित होता है, दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ता है और नागरिकों की जान पर संकट मंडराने लगता है।इन आवारा पशुओं के कारण क्षेत्र के व्यापारियों को भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। दुकानों के सामने पशुओं का जमावड़ा, सड़कों पर गंदगी, दुर्गंध और ग्राहकों को होने वाली असुविधा के कारण व्यापार प्रभावित हो रहा है। वहीं, वाहन चालकों को पशुओं से बचते हुए वाहन चलाना पड़ता है, जिससे दुर्घटनाओं की संभावना दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है।विशेष बात यह है कि स्थानीय स्तर पर इन पशुओं के मालिकों की जानकारी होने के बावजूद उनके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है। नागरिकों ने मांग की है कि नगर परिषद और पशुपालन (पशु चिकित्सा) विभाग संयुक्त अभियान चलाकर संबंधित पशु मालिकों को नोटिस जारी करें, सड़कों पर पशु छोड़ने वालों पर जुर्माना लगाएं तथा इस समस्या पर स्थायी रोक लगाएं।नागरिकों ने प्रशासन को चेतावनी भी दी है कि यदि सूचना देने के बाद भी पशु मालिक अपने पशुओं को नहीं संभालते हैं, तो आवारा पशुओं को जब्त कर गौशाला में भेजा जाए। केवल बैठकों, पंचनामों और आश्वासनों तक सीमित रहने के बजाय कानून का प्रभावी पालन कर इस समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाना चाहिए।नागरिकों के प्रशासन से सीधे सवाल संतोष टॉकीज चौक पर रोज दिखाई देने वाले आवारा पशु प्रशासन की नजर में क्यों नहीं आते?
क्या किसी गंभीर दुर्घटना के बाद ही कार्रवाई करने की परंपरा बदलेगी?
नागरिकों, व्यापारियों और वाहन चालकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?सड़कों पर पशु छोड़ने वाले पशु मालिकों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की जाती?
शहर के मुख्य चौक पर आवारा पशुओं का बढ़ता जमावड़ा केवल यातायात की समस्या नहीं, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा का भी गंभीर मुद्दा बन चुका है। इसलिए नागरिकों ने नगर परिषद, पशुपालन विभाग तथा संबंधित प्रशासन से मांग की है कि तत्काल संयुक्त अभियान चलाकर आवारा पशुओं को हटाया जाए, पशु मालिकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और शहरवासियों को सुरक्षित एवं सुचारु यातायात की सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
रिपोर्टर : राजेश पंडित
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