नरसिंह संस्थान के अध्यक्ष पद पर विद्यावाचस्पति प्रा. श्रीहरी महाराज पितळे तथा सचिव पद पर आशिष उमाळकर का चयन
बुलढाणा - आदिशक्ति मुक्ताई की परंपरा से जुड़े तथा विश्व के ग्यारह नरसिंह स्थानों में छठे स्थान के रूप में मान्यता प्राप्त संतश्री बाळाभाऊ महाराज पितळे श्री नरसिंह संस्थान के न्यासी मंडल और संप्रदाय के वरिष्ठ गुरुभक्तों की बैठक में संस्थान के अध्यक्ष पद पर विद्यावाचस्पति प्रा. श्रीहरी महाराज पितळे तथा सचिव पद पर आशिष शंकर उमाळकर का चयन किया गया।
महाराष्ट्र शासन से तीर्थक्षेत्र विकास की ‘क’ श्रेणी का दर्जा प्राप्त इस देवस्थान को वारकरी संप्रदाय के विदर्भ क्षेत्र का पहला संस्थान होने का गौरव भी प्राप्त है। इसके सर्वांगीण विकास के लिए स्वर्गीय रंगनाथ महाराज ने एक नई दृष्टि प्रदान की थी। यह बात बैठक में संस्थान के उपाध्यक्ष डॉ. अभय कोठारी ने कही।
महाराष्ट्र के प्रख्यात कीर्तनकार, प्रवचनकार एवं व्याख्याता, वरिष्ठ इतिहास विशेषज्ञ, संत गाडगे बाबा अमरावती विश्वविद्यालय के पीएचडी शोध-मार्गदर्शक तथा अंतरराष्ट्रीय शोध-पत्रिकाओं में अनेक शोध-लेख प्रकाशित करने वाले विद्यावाचस्पति प्रा. श्रीहरी महाराज पितळे का नरसिंह संस्थान के अध्यक्ष पद पर तथा वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता आशिष उमाळकर का सचिव पद पर चयन होना संस्थान के लिए गौरव की बात है। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने ऐसी भावना व्यक्त की।
आभार प्रदर्शन करते हुए संस्थान के न्यासी श्री विठ्ठल खंदारकर ने अपेक्षा व्यक्त की कि श्री नरसिंह संस्थान का व्यापक विकास हो तथा दूर-दूर से आने वाले सभी नरसिंह भक्तों को हर प्रकार की आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध हों। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए सभी को मिलकर प्रयास करना चाहिए।
संवाददाता - सिमा संदीप सावजी

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