केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का बड़ा एलान, UCC पर फिर एक बार मचा सियासी घमासान
नई दिल्ली | गृहमंत्री अमित शाह ने मुंबई दौरे पर एक ऐसा ऐलान कर दिया जिससे पूरे देश की राजनीति का सियासी पारा आसमान पर है, दरअसल गृहमंत्री अमित शाह ने ऐतिहासिक ऐलान करते हुए कहा की 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले पूरे देश भर में NDA द्वारा शाशित 21 राज्यों में पूर्ण रूप से UCC लागू कर दिया जायेगा, इस घोषणा के तुरंत बाद ही विपक्ष हरकत में आ गया, जहां समर्थक UCC के फायेदे बताते नज़र आये, तो दूसरी तरफ विपक्ष ने कड़े शब्दों में इसकी निंदा की।
इस मामले में आम जनता का भी मत काफी मिला जुला नज़र आया, जहा समर्थक इसे "एक देश एक क़ानून" की विचारधारा बता रहे है, और इस क़ानून को एकता के पहले कदम के रूप में देख रहे है, वही कुछ लोगो का मानना है की ये एक विशेष धर्म के लोगो के अधिकारों की हत्या करने की शाजिश है, विपक्ष ने भी इसे धार्मिक स्वतंत्रता की हत्या बताया।
देश भर में क्या है UCC की स्तिथि
पूरे देश में NDA द्वारा शाशित 21 राज्यों में से केवल एक उत्तराखंड में अभी पूर्ण रूप से UCC लागू कर दी गई है, इसके अलावा गोवा में वर्ष 1867 का PCC (portuguese civil code) लागू है, यह भारत का एकमात्र ऐसा राज्य है , जहां ऐतिहासिक कारणों से सभी धर्मो के लिए एक सामान पारिवारिक क़ानून लागू है। इसके अलावा गुजरात, मध्य प्रदेश और आसाम की 2026 विधानसभाओं में UCC बिल पास कर दिया गया है, और वर्तमान में यह राष्ट्रपति की मंज़ूरी के इंतज़ार में है। अब ऐसे में UCC को लेकर इतने बड़े दावे कहा तक सही नज़र आते है जब पिछले एक दशक से भी अधिक समय से NDA शाशन मे होते हुए भी इसको लागू करने में असफल रही है ।
5 राज्यों में विधानसभा चुनाव, क्या होगा असर
2027 में उत्तर प्रदेश समेत देश के अन्य 4 राज्यों में विधानसभा चुनाव होने जा रहे है, अब ऐसे में राजनैतिक विशेषज्ञों का यह मानना है की भारतीय जनता पार्टी अपने मूल वोटरों को आकर्षित करने के लिए एक बार फिर UCC का मुद्दा उठा रही है, वही जहाँ भाजपा की छवि हमेशा से हिन्दू समर्थक के रूप में रही है और सनातन उनका एक प्रमुख मुद्दा रहा है, ऐसे में UCC का प्रस्ताव नाराज़ समर्थको के मन में एक नई उम्मीद ला सकती है, और एक बार फिर वोटर भारतीय जनता पार्टी के प्रति आकर्षित हो सकते है। अब ऐसे में विपक्ष पर दबाव भी स्वाभाविक है, जहां धर्मनिर्पेक्षता बनाम तुष्टिकरण की बहस में घेरने के लिए इस मुद्दे को समय-समय पर उछालना एक अच्छा रणनीतिक कदम माना जा रहा है।
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