जाति जनगणना में मुस्लिम समुदाय की जातियों को भी शामिल किया जाएगा

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संकेत दिए हैं कि आगामी जाति आधारित जनगणना में मुस्लिम समुदाय की जातियों को भी शामिल किया जाएगा। यह पहल 2025 में प्रस्तावित जनगणना के हिस्से के रूप में हो सकती है, जो कोविड-19 महामारी और लोकसभा चुनावों के कारण पहले स्थगित हो गई थी। 

बिहार राज्य में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया था कि राज्य में होने वाली जाति आधारित जनगणना में हिंदू समुदाय के साथ-साथ मुस्लिम जातियों की भी गिनती की जाएगी। इससे यह संकेत मिलता है कि बिहार में मुस्लिम समुदाय की जातियों की पहचान और गिनती की जाएगी, जो पहले कभी नहीं हुई थी। मुस्लिम समुदाय के विभिन्न निकायों ने भी जाति आधारित जनगणना में मुस्लिमों को शामिल करने की मांग की है। उनका कहना है कि हिंदू समुदाय की तरह मुस्लिम समाज भी विभिन्न जातियों और उप-जातियों में विभाजित है, और उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति का सही आंकलन तभी संभव है जब उनकी जातियों की गिनती की जाए ।

आपको बता दें केंद्र सरकार ने 30 अप्रैल 2025 को घोषणा की कि आगामी जनगणना में जाति आधारित आंकड़े शामिल किए जाएंगे। यह निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट समिति द्वारा लिया गया, जो भारतीय समाज में सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

मुस्लिम समुदाय की जातियों की गिनती

इस पहल के तहत, मुस्लिम समुदाय की जातियों की भी गिनती की जाएगी। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसे "सामाजिक न्याय की दिशा में ऐतिहासिक निर्णय" बताया है । इससे पहले, बिहार और तेलंगाना जैसे राज्यों में जाति आधारित जनगणना की गई थी, जिसमें मुस्लिम समुदाय की जातियों का विवरण भी शामिल था ।

सरकार का दृष्टिकोण

केंद्र सरकार का मानना है कि जाति आधारित आंकड़े सामाजिक और आर्थिक योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में सहायक होंगे। हालांकि, प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्षी दलों पर आरोप लगाया है कि वे जाति आधारित राजनीति करके समाज में विभाजन की कोशिश कर रहे हैं । कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे "गहरी सामाजिक सुधार की दिशा में पहला कदम" बताया है ।

जाति आधारित आरक्षण पर सरकार की स्थिति

जाति आधारित आरक्षण के मुद्दे पर, प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया है कि उनकी सरकार धर्म के आधार पर आरक्षण देने के खिलाफ है। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह मुस्लिम समुदाय को आरक्षण देने की कोशिश कर रही है, जबकि उनकी सरकार केवल सामाजिक और आर्थिक पिछड़ेपन के आधार पर आरक्षण देने का पक्षधर है ।

केंद्र सरकार की जाति आधारित जनगणना की पहल भारतीय समाज में सामाजिक और आर्थिक असमानताओं को समझने और उन्हें दूर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि, मुस्लिम समुदाय की जातियों की गिनती से संबंधित विवरणों की स्पष्टता अभी बाकी है, और इस पर विभिन्न राजनीतिक दलों और संगठनों के बीच चर्चा जारी है।

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