सितंबर में फूलगोभी-पत्तागोभी की नर्सरी तैयार करें, सही तरीके से खेती कर कमाएं बेहतर मुनाफा
हरी सब्जियों की खेती में सही किस्म और समय पर बुआई से किसान बेहतर उत्पादन और कम समय में अच्छी कमाई कर सकते हैं। सितंबर का महीना फूलगोभी और पत्तागोभी की नर्सरी तैयार करने के लिए उपयुक्त माना जाता है। इस समय उन्नत किस्मों की पौध तैयार करने पर फसल दीपावली और शुरुआती सर्दियों में मंडियों तक पहुंच सकती है।
जमीन और क्यारियों का चुनाव
नर्सरी के लिए उपजाऊ दोमट और अच्छी जल निकासी वाली जमीन चुनें। खेत का ऊंचा हिस्सा बेहतर रहता है, क्योंकि निचले स्थान पर पानी जमा होने से पौधों की जड़ें सड़ने और फफूंद रोग का खतरा बढ़ सकता है। क्यारियां जमीन से करीब 10 से 15 सेंटीमीटर ऊंची और लगभग 1 मीटर चौड़ी बनाएं तथा दो क्यारियों के बीच छोटी नालियां रखें।
मिट्टी और खाद की तैयारी
नर्सरी तैयार करने से पहले जमीन की 2 से 3 बार जुताई कर मिट्टी को भुरभुरी और समतल करें, ताकि बीजों का अंकुरण समान रूप से हो और जड़ों का विकास अच्छा रहे। क्यारियों में प्रति वर्ग मीटर करीब 4 से 5 किलोग्राम अच्छी तरह सड़ी गोबर की खाद या वर्मीकम्पोस्ट मिलाएं। कच्ची या अधपकी खाद का इस्तेमाल न करें।
बीज शोधन और बुवाई का तरीका
नर्सरी में रोगों से बचाव के लिए बीज शोधन जरूरी है। हाइब्रिड बीजों के लिए पैकेट पर दिए निर्देश देखें, जबकि बिना उपचारित बीजों को कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार अनुशंसित मात्रा में कार्बेंडाजिम या ट्राइकोडर्मा से उपचारित किया जा सकता है। बीजों की 4 से 5 सेंटीमीटर दूरी पर कतारें बनाकर बुवाई करें, उन्हें अधिक गहराई में न दबाएं और ऊपर से मिट्टी की हल्की परत डालें।
सिंचाई और रोग नियंत्रण
नर्सरी में हल्की सिंचाई करें और तेज धूप व बारिश से पौधों की सुरक्षा रखें। खरपतवार निकालते रहें तथा रोगग्रस्त पौधों को तुरंत हटा दें। यदि पौधे जमीन की सतह के पास से गलकर गिरने लगें तो यह डैम्पिंग-ऑफ का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में सिंचाई कम कर जल निकासी सुधारें और कृषि विशेषज्ञ की सलाह व उत्पाद के लेबल निर्देश के अनुसार उपयुक्त फफूंदनाशी का इस्तेमाल करें।
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